सेंटर फॉर सिविल सोसायटी

पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों ने प्रकृति और संस्कृति, कला और जीवन, सामरिक ललक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक शांति, जैव एवं सांस्कृतिक विविधता के बीच एक बेमिसाल तालमेल स्थापित किया है और इसे संरक्षित भी किया है। इन लोगों ने इस संतुलन की खूबी को संगीत, कला, स्थापत्य, अपनी सोच और ज्ञान प्रणाली, जीवन के आधारभूत रीति रिवाज से लेकर अपने कार्यों, मौसम और प्रकृति में संजोये रखा है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देशभर में युवा सशक्तिकरण का अभियान पूरी लगन से जारी है। न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य सरकारें भी इस दिशा में प्रयासरत हैं। ऐसे में प्रशिक्षुओं को बेहतर विकल्प और संस्थानों के चुनाव की स्वतंत्रता देने की मांग भी उठ रही है। इसी आवश्यकता को देखते हुए सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने एक टूलकिट तैयार किया है जिससे प्रशिक्षुओं को इंस्टिट्यूट चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी और प्रशिक्षण संस्थानों पर भी बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा।

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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की विद्यार्थियों के प्रति अरुचि और कक्षाओं से नदारद रहने के मामले सामने आते रहते हैं। इस व्यवस्था में बदलाव के लिए जरूरी है कि न सिर्फ मानिटरिंग सिस्टम बेहतर हो बल्कि शिक्षकों को उनके प्रदर्शन पर आधारित प्रोत्साहन दिया जाए। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी (सीसीएस) की ओर से दिल्ली के सरकारी, निजी व बजट स्कूलों को ध्यान में रखकर हुई रिसर्च में सामने आया है कि किस तरह से सरकारी स्कूलों की हालत खराब हो रही है और निजी स्कूलों की साख मजबूत हो रही है।