कमेन्टरी - स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।

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डियर मि. चिदंबरम,

दुनिया भर में घूम-घूम कर आप सभी को यह समझाने में जुटे हैं कि 2012-13 में वित्त घाटे को जीडीपी के 5.3 प्रतिशत से ऊपर न जाने देने के लिए बजट में आप भरपूर सख्ती बरतने जा रहे हैं। विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए निवेश के उपयुक्त माहौल बनाने का वादा भी आपने किया है। अफसोस की बात है कि आपका पहला उद्देश्य अनजाने में ही दूसरे वाले के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। आपके टैक्स अधिकारी वित्तीय घाटा कम करने के लिए आमदनी बढ़ाने पर इस हद तक तुले हैं कि टैक्स डिमांड जारी करने में तर्क की सीमा...

Published on 11 Feb 2013 - 17:36

चिदंबरम की ओपन बजट की पहल कामयाब हुई है, अब क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां भारत को धमका नहीं सकतीं

कभी बजट प्रस्तावों को टॉप सीक्रेट रखने का चलन था। वित्त मंत्री महीनों पहले से बजट मामलों पर चुप्पी साध लेते थे। लेकिन अब समय बदल गया है। आज बजट प्रस्ताव अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियां बन जाते हैं। देश के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम दुनियां भर के देशों के सामने बजट की बानगी पेश कर रहे हैं। पहले उन्होंने देश को बजट प्रस्तावों की झलक दिखाई। अब वह ग्लोबल मंच पर भारत के आगामी बजट की झलकियां दिखा रहे...

Published on 5 Feb 2013 - 18:16

बर्बादी से बचाने के लिए इसे कई कॉरपोरेशनों में तोड़कर उनके शेयर जनता को बेच दिए जाने चाहिए

दस साल बाद आखिरकार रेलवे का किराया बढ़ाया गया। यह बात और है कि सवारी गाड़ियों पर आने वाले 25 हजार करोड़ रुपए के घाटे में से मात्र 6600 करोड़ रुपयों की भरपाई ही इस वृद्धि से हो पाएगी। सरकारें रेल किरायों पर इतनी ज्यादा सब्सिडी इतने लंबे समय से आखिर क्यों देती आ रही हैं? अन्य किसी भी सब्सिडी की तुलन में रेल सब्सिडी का औचित्य सबसे कम है। न तो रेलों का ज्यादा इस्तेमाल गरीबों द्वारा किया जाता है...

Published on 16 Jan 2013 - 19:19

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