स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।

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Delhi Airport's Terminal 3भारत में हाल ही में संपन्न हुए कामनवेल्थ खेलों से हमें फिर ये संकेत मिलता है की जहां सरकार और सरकारी  संगठन भ्रष्टाचार, फिजूलखर्ची और अक्षमता में लिप्त है, वहीँ निजी सेक्टर अपनी ही लय में देश में विकास के काम सफलता से निपटाता जा रहा है.

निजी सेक्टर की सफलता का एक हालिया उदाहरण है दिल्ली एअरपोर्ट पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टर्मिनल 3 का निर्माण. इस टर्मिनल का कार्य कामनवेल्थ खेलो के शुरू होने से काफी पहले जुलाई में ही पूरा हो चुका  था.

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हम साम्यवाद के धराशायी होने की बीसवीं सालगिरह की ओर अग्रसर हैं. यह घटना जनता की नुमाइंदगी के साम्यवादी दावे को व्यापक रूप से नकार देती है. फिर भी, ऐसे साम्यवादी दावे अब भी बरकरार हैं जो कभी-कभार युवाओं की नई पीढ़ी को चौंकाते हैं जिन्हें यह मालूम ही नहीं है कि 9 नवंबर 1989 के दिन बर्लिन की दिवार क्यों गिरी.

कार्ल मार्क्स का कहना था, लोकतांत्रिक पूंजीवाद में अमीर अधिक अमीर हो जाते हैं और गरीब ज्यादा गरीब. मार्क्सवाद ने युवा आदर्शवादियों को करीब एक शताब्दि तक प्रेरित किया. रूस में 1918 में हुई लेनिन की क्रांति का नई सुबह के रूप में जयजयकार किया गया.

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अंतरराष्ट्रीय मंदी की समाप्ति की घोषणा के लिए कॉरपोरेट जगत बेताब नजर आ रहा है। दुनिया भर के शेयर बाजारों ने तेज छलांग भी लगानी शुरू कर दी है। बावजूद इन अच्छी खबरों के अंतरराष्ट्रीय मुदा कोष ने निराशावादी भविष्यवाणी की है। 1929 की महामंदी के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जीडीपी के साल 2009 में 1.3 फीसदी और 2010 में 1.9 फीसदी तक सिमटने का अनुमान व्यक्त किया गया है। दो फीसदी से भी कम विकास दर अंतरराष्ट्रीय मंदी का संकेत है। इसके अलावा अनुमान

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भारत के निर्यात में जनवरी-फरवरी में 22 फीसदी कमजोरी दर्ज की गई है और यह कमी लगातार बढ़ती जा रही है। सुखद बात यह है कि भारत के सॉफ्टवेयर एवं आईटी आधारित सेवाओं के निर्यात में लचीलापन बना हुआ है, हालांकि इस पर भी नया खतरा मंडरा रहा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मंदी की वजह से सबसे अधिक प्रभावित अमेरिका और ब्रिटेन में भारतीय कंपनियां अपने आईटी उत्पादों का 81 फीसदी हिस्सा निर्यात करती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं के असफल ह
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कांग्रेस की चुनावी सफलता के बाद शेयर बाजार में करीब 20 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। बाजार को पहले वाम मोर्च के दखल का जो डर था, वह कांग्रेस की बड़ी जीत से दूर हो गया। यहां एक बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि कांग्रेस अपनी जीत को चाल बनाए रखने का जनादेश मानती है, सुधार का नहीं। अंतरराष्ट्रीय मंदी के बावजूद कांग्रेस की नीतियां कमोबेश पहले की तरह ही रहने वाली हैं।
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नई दिल्ली : आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान जताया गया है कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था अक्टूबर महीने तक सुधरने लगती है, तो भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.75 फीसदी तक पहुंच सकती है और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो भी इसमें 6.25 फीसदी की वृद्धि तो दर्ज की ही जाएगी।
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प्रिय श्री प्रणव मुखर्जी आपके सामने बजट संबंधी समस्याओं का अंबार खड़ा है। देश का राजकोषीय घाटा भले ही काफी बढ़ गया हो लेकिन मंदी के दौरान आप आसानी से कर बढ़ाने या खर्च कम करने का जोखिम नहीं ले सकते। कर संग्रह में वृद्धि का सबसे आसान तरीका यही होगा कि सिगरेट पर टैक्स फिर बढ़ा दिया जाए। तंबाकू के उपयोग से कैंसर होता है, लिहाजा इस पर कर बढ़ाने के हर कदम को जीवन रक्षा उपाय के रूप में पेश किया जा सकता है।
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जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भारत-अमेरिका परमाणु करार को आगे बढ़ाने की बात की तो कई विश्लेषकों को यह लगा कि बुश अमेरिकी परमाणु उपकरण निर्माताओं के लिए कई अरब डॉलर के ऑर्डर का रास्ता साफ करने में जुटे हैं। कई भारतीय वैज्ञानिकों ने इस करार का विरोध इसलिए किया था क्योंकि उन्हें डर था कि इससे घरेलू परमाणु ऊर्जा संयंत्र में अमेरिकी दखल बढ़ेगा।
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प्रिय श्री कपिल सिब्बल आपसे देश को मानव संसाधन मंत्री के रूप में काफी उम्मीदें हैं। शिक्षा जगत में सुधार के प्रति आपकी प्रतिबद्धता, उच्च शिक्षा में बदलाव और विदेशी विश्वविद्यालयों के देश में आसान प्रवेश से हममें काफी आशाएं जगी हैं। वैसे शिक्षा जगत में व्यापक सुधार की दृष्टि से हमें गरीबों और ऐतिहासिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए प्राथमिक शिक्षा में सुधार की कोशिश करनी चाहिए। गरीब लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजते हैं, लेकिन उन्हें वहां शिक्षा बमुश्किल ही मिल पाती है।
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नई दिल्ली :2008-09 के आर्थिक सर्वे में ऐसे सुधारों की लिस्ट है, जिन्हें लागू करने की तुरंत जरूरत है। फिर चाहे वो कृषि वायदा पर लगी पाबंदी हटाना हो, विदेशों से कर्ज जुटाने के अधिकारों की नीलामी हो, बैंकों में चरणबद्ध तरीके से FDI सीमा लागू करना और वोटिंग के अधिकारों को हिस्सेदारी पर आधारित बनाना हो। कोयला खनन और परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र को दाखिल होने की इजाजत देना, बीमा क्षेत्र और रक्षा उद्योगों में में एफडीआई सीमा 51 फीसदी तक बढ़ाना, पुलिस, न्यायिक तथा प्रशासनिक सुधार लागू करना और ओवरटाइम समेत प्रतिदिन 12 घंटे काम करने की इजाजत देने के लिए श्रम कानूनों में संशोधन

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