स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।

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बजट के प्रस्तुत होते ही सेंसेक्स ने 600 अंकों की छलांग लगाई, लेकिन जैसे ही निवेशकों को ये समझ आया कि बजट की कुछ बातें वित्तीय घाटे को ध्यान में रखने की बजाय आंकड़ों में सुधार और आशावाद पर अधिक आधारित है, तो सेंसेक्स को नीचे गिरते भी ज्यादा वक्त नहीं लगा।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट में कर प्रबंधन की कुशलता की कमी दिखाई पड़ती है, फिर भी इसमें वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दिखाई पड़ती है और रसोई गैस, खाद और मिट्टी के तेल के लिए नकद सब्सिडी की एक नई नीति सामने रखता है।

वित्त मंत्री ने वित्तीय क्षेत्र के सात अहम विधेयकों पर फिर से विचार शुरू करने का संकल्प कर आर्थिक सुधारों की संभावनाएं बढ़ाई हैं। इनमें बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ाकर 49 फीसदी करने और बैंकों में विदेशी निवेशकों के मतदान अधिकार को समाप्त करने संबंधी विधेयक भी शामिल है।

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बड़ी आपदाएं निरंतर आती रहती हैं। एशिया के आर्थिक संकट ने एशिया की चमत्कारिक अर्थव्यवस्था को तहस नहस कर दिया। 2007-09 की महामंदी ने वॉल स्ट्रीट के पांच शीर्ष निवेश बैंकों, सबसे बड़े बैंक (सिटी बैंक), सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी (एआईजी), सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी (जनरल मोटर्स) और सबसे बड़ी बंधक एवं बीमा कंपनी (फैनी मे और फ्रेडी मैक) को दीवालियेपन / राहत की कगार पर पहुंचा दिया। कैरिबियन सागर में हुई बीपी दुर्घटना दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरण त्रासदी मानी जाती है। कुछ लोगों को डर है कि ग्लोबल वार्मिंग अब तक का सबसे बड़ा मानवनिर्मित संकट होगा।

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हम एक नए दशक में प्रवेश कर रहे हैं और यह सही समय है, जब हमें भारत की वैश्विक स्थिति की वास्तविकता को भली-भांति समझ लेना चाहिए। 1990 में भारत विदेशी सहायता के लिए हाथ फैलाए दिखता था, जिसने भुखमरी और गरीबी के विश्व रिकॉर्ड बनाए थे। भारत खुद को तीसरी दुनिया के नेता के तौर पर पेश करता था, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अन्य विकासशील देश भारत को आर्थिक और राजनीतिक रोल मॉडल की बजाए दस्तावेज तैयार करने वाले विशेषज्ञ के रूप में देखते थे। कई विकासशील देश विकास की दौड़ में भारत को पीछे छोड़ रहे थे।

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जब विकृत या गलत या उल्टी प्रोत्साहन व्यवस्था भ्रष्टाचार को दंडित करने की बजाए ईनाम देती है, तब भ्रष्टाचार बढ़ने लगता है। हमें इस विकृत प्रोत्साहन का अंत करने के लिए संस्थागत परिवर्तनों की जरूरत है।

मुझे आशा है कि साल 2010 को एक ऐसे साल के रूप में याद किया जाएगा, जब नाराज मतदाता नेताओं को बाध्य कर देंगे कि वे राजनीति को एक फायदेमंद और कर मुक्त पेशे के रूप में देखना बंद करें। मीडिया में इन दिनों कई घोटाले जैसे अवैध खनन, आदर्श सहकारी समिति, राष्ट्रमंडल खेल और 2जी लाइसेंस जैसे मामले छाए हुए हैं।

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स्वामीनाथन अय्यर

लोग कई बार मुझसे ये पूछते हैं कि वाकई जुगाड़ है क्या? ग्लोबल मैनेजमेंट विशेषज्ञ भारत के तेजी से हो रहे आर्थिक विकास का श्रेय जुगाड़ को देते हैं। लेगाटम इंस्टीच्यूट के एक ताजा सर्वे में भारतीय कारोबारियों में 81 फीसदी ने ये कहा कि उनकी कामयाबी में जुगाड़ ने मुख्य भूमिका निभाई।

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राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता् लगातार नए अधिकारों की बात करते हैं- काम का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और अब भोजन का अधिकार। "अधिकार" शब्द को तोड़-मरोड़कर इनटाइटलमेंट के पर्याय में इस्तेमाल किया जाने लगा है, लेकिन दोनों में काफी फर्क है।

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स्वामीनाथन अय्यर

एक आदर्श शहर के लिए क्या-क्या जरूरी सुविधाएं हो सकती हैं? 24 घंटे बिजली और पानी? स्वच्छ वातावरण, कार, साइकिल और पैदल चलने वालों के लिए पर्याप्त चौड़ी सड़कें? शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं, खेल के मैदान, संग्रहालय, आदि? राजनीतिक व्यवस्था में अधिक दिलचस्पी लेने वाले शहर के लिए एक मेयर या महापौर की भी आवश्यकता बता सकते हैं, जिसके पास कर लगाने और प्रशासन के सभी जरूरी अधिकार हों।

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हाल ही में अमेरिका के ओहायो प्रांत के गवर्नर स्ट्रीकलैंड ने नौकरियों के सृजन के लिए उन कंपनियों के लिए आउटसोर्स पर प्रतिबंध लगा दिया जिन्हें सरकारी फंड्स के जरिए मदद नहीं पहुंचाई जाती है। ओहायो के गवर्नर के इस फैसले का भारत में काफी विरोध हुआ। हालांकि इस हो हल्ले का कोई फायदा नहीं मिला। गौर करने वाली बात ये भी है कि अमेरिका और अमेरिकी राज्यों में हमारी देसी आईटी कंपनियों का निर्यात सीमित मात्रा में ही होता है।

हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि वे अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान इस फैसले पर अमेरिकी प्रशासन के साथ अपना एतराज दर्ज करवाएंगे। लेकिन ये एक कूटनीतिक खाना पूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं था।

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भोजन को मौलिक अधिकार के तौर पर देखने वाले एक्टिविस्ट्स (सक्रियतावादी), सरकार को ही सभी समस्याओं का निवारण करने वाला मानते हैं, क्षेत्र दर क्षेत्र सरकार की नाकामी को वह नजरअंदाज कर देते हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) एक सार्वजनिक घोटाला है। इन सक्रियतावादियों का कहना है कि अगर सभी राज्य तमिलनाडु की तरह सार्वजनिक वितरण प्रणाली विकसित कर लें तो यह बहुत बेहतरीन तरीके से काम करेगी। यह तो ऐसा ही कहना हुआ कि अगर सभी भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर की तरह खेलने लगें तो भारत क्रिकेट का वर्ल्ड चैंपियन बन जाएगा।

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स्वामीनाथन अय्यर

क्या आप भी यही सोंचते हैं कि जीडीपी की रिकॉर्ड ग्रोथ से दलितों का कुछ भी भला नहीं हुआ है? सेंटर फॉर एडवांस स्टडी ऑफ इंडिया के डायरेक्टर देवेश कपूर, सीबी प्रसाद, लैंट प्रिचेट और डी श्याम बाबू ने हाल ही में एक स्टडी की है। ‘रिथिंक इनइक्वालिटी: दलित्स इन यूपी इन मार्केट रिफॉर्म इरा’ नाम से किए गए इस अध्ययन के मुताबिक 1990 के बाद से उत्तर प्रदेश में दलित क्रांति का दौर सामने आता है। हालांकि यहां लंबे समय तक दलितों का दमन हुआ है।

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स्वामीनाथन अय्यर

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