स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।

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भारतीय ग्लेशियरों पर आईपीसीसी के दावों की कलई खुली - स्वामीनाथन एस. अंकलेसरिया अय्यर

क्लाइमेटगेट-1 ने यह खुलासा किया था कि ईस्ट एंजेलिया यूनिवर्सिटी में ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ जंग छेड़ने वाले जलवायु वैज्ञानिकों ने किस तरह से अपने खिलाफ जाने वाले आंकड़ों क

जानलेवा समाजवाद - स्वामीनाथन एस. अंकलेसरिया अय्यर

दुनिया जबकि साम्यवाद के पतन की 20वीं वर्षगांठ मना रही है, कई विश्लेषकों को याद होगा कि कैसे सोवियत नीतियों की नाकामी ने सरकार को उत्पादन पर ज्यादा अधिकार दे दिया था और साम्राज

सेंसरशिप से जलवायु परिवर्तन पर सच्चाई खतरे में

सेंसरशिप को हमेशा ही कथित रूप से जनता की भलाई में लागू किया जाता है ताकि लोगों की सोच को बेफजूल के विचारों से प्रभावित होने से बचाया जा सके। वास्तविकता में तो सेंसरशिप विरोधियों

20 साल बादः क्यों ढही बर्लिन की दीवार - स्वामीनाथन एस. अय्यर

हम साम्यवाद के धराशायी होने की बीसवीं सालगिरह की ओर अग्रसर हैं.

वित्तीय संकट के साथ आई मंदी की मार दूर तक

अंतरराष्ट्रीय मंदी की समाप्ति की घोषणा के लिए कॉरपोरेट जगत बेताब नजर आ रहा है। दुनिया भर के शेयर बाजारों ने तेज छलांग भी लगानी शुरू कर दी है। बावजूद इन अच्छी खबरों के अंतरराष्ट्रीय मुदा कोष ने निराशावादी भविष्यवाणी की है। 1929 की महामंदी के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जीडीपी के सा

पेशेवर एंव कारोबारी सेवाओं के निर्यात में बढ़ोतरी

भारत के निर्यात में जनवरी-फरवरी में 22 फीसदी कमजोरी दर्ज की गई है और यह कमी लगातार बढ़ती जा रही है। सुखद बात यह है कि भारत के सॉफ्टवेयर एवं आईटी आधारित सेवाओं के निर्यात में लचीलापन बना हुआ है, हालांकि इस पर भी नया खतरा मंडरा रहा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मंदी की वजह से सबसे अधिक प्रभा

विकास जारी रखने की उम्मीद करें, सुधार की नहीं

कांग्रेस की चुनावी सफलता के बाद शेयर बाजार में करीब 20 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। बाजार को पहले वाम मोर्च के दखल का जो डर था, वह कांग्रेस की बड़ी जीत से दूर हो गया। यहां एक बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि कांग्रेस अपनी जीत को चाल बनाए रखने का जनादेश मानती है, सुधार का नहीं। अंतरराष्ट्रीय मंदी के बावजू

सुधारों के बलबूते सेंसेक्स @20,000!

नई दिल्ली : आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान जताया गया है कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था अक्टूबर महीने तक सुधरने लगती है, तो भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.75 फीसदी तक पहुंच सकती है और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो भी इसमें 6.25 फीसदी की वृद्धि तो दर्ज की ही जाएगी।

न्यूक्लियर डील पर करात को अपनी गलती मान लेनी चाहिए

जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भारत-अमेरिका परमाणु करार को आगे बढ़ाने की बात की तो कई विश्लेषकों को यह लगा कि बुश अमेरिकी परमाणु उपकरण निर्माताओं के लिए कई अरब डॉलर के ऑर्डर का रास्ता साफ करने में जुटे हैं। कई भारतीय वैज्ञानिकों ने इस करार का विरोध इसलिए किया था क्योंकि