स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।

पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें।

अधिक जानकारी के लिये देखें: http://swaminomics.org

9 नवंबर को पूर्वी व पश्चिमी जर्मनी को बांटने वाली बर्लिन की दीवार को वहां के नागरिकों के द्वारा ढहाए जाने की घटना के 27 वर्ष पूरे हो गए। वर्ष 1989 में इसी दिन दो भागों में बंटा जर्मनी देश फिर से एक हो गया था। मार्क्सवादियों द्वारा साम्यवाद के जरिए स्वर्ग हासिल करने और पूंजीवादियों के चंगुल से श्रमिकों को आजादी दिलाने का सब्ज़बाग लोगों को ज्यादा दिनों तक फुसलाकर रखने में सफल नहीं रहा। बंदूक की नोंक पर थोपी गई स्वर्ग की इस परिकल्पना से ऊबरते हुए नागरिकों ने जो भी औजार दिखा उसी से न केवल दीवार ढहाई बल्कि साम्यवाद की नींव भी हिलाकर रख दी। प्रस्तु

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

देश 67वें गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जी जान से जुटा हुआ है। यह वह मौका है जब हम दुनिया को अपनी ताकत, विभिन्नता में एकता और आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक प्रचुरता आदि से अवगत कराते हैं। हम यह प्रदर्शित करते हैं कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से देश व देशवासियों ने क्या क्या अर्जित किए हैं। निसंदेह आजादी के बाद से देश ने काफी प्रगति की है और दुनियाभर में अपनी मेधा और फौजी ताकत से काफी सम्मान बटोरा है। लेकिन कुछ प्रश्न अब भी उतने ही प्रासंगिक हैं जो छह दशक पहले थे। 10 अगस्त 2003 को अंग्रेजी दैनिक 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' में स्वामीनाथन एस.

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

Pages