स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।

पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें।

अधिक जानकारी के लिये देखें: http://swaminomics.org

आम बनिया आम आदमी नहीं

bania.jpg

सरकार द्वारा बहु-ब्रांड खुदरा में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति के खिलाफ बीते हफ्ते पांच करोड़ दुकानदारों और व्यापारियों ने बंद का आह्वान किया। असलियत में यह साबित करता है कि छोटे व्यापारियों का वह दावा कितना खोखला है, जिसमें वे खुद को असंगठित क्षेत्र का कमजोर प्रतिनिधि बताते हैं। हड़ताल पर गए पांच करोड़ ये व्यापारी देश के समूचे संगठित क्षेत्र के कामगारों (3 करो

तब भी जीत सकती है टीम अन्ना

team-anna.jpg

टीम अन्ना की छवि धूमिल हो रही है। ऐसा किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल और भूषणों के गैर-गांधीवादी व्यवहार के कारण हुआ है। कांग्रेस व अन्य पार्टियों के नेता इस बात पर चुटकी ले सकते हैं, लेकिन उन्हें यह मुगालता कतई नहीं पालना चाहिए कि भ्रष्टाचार को लेकर जनता का गुस्सा राई भर भी कम पड़ा है। अन्ना हजारे द्वारा आम जन के इस गुस्से को बखूबी उभारकर एक दिशा दे दी गई है, लेकिन इसकी ताकत जनलो

खनन रॉयल्टी से जनजातियों को मिलेगा अधिक फायदा

mining_pic.jpg

आखिरकार जमीन और जंगल के अन्यायपूर्ण राष्ट्रीयकरण की नीतियों में आंशिक सुधार का रास्ता तैयार हो रहा है। मंत्रियों के एक समूह ने एक खनन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसमें यह व्यवस्था की गयी है कि स्थानीय समूहों (आदिवासियों या ग्रामीणों) को कोयले के खनन से होने वाले लाभ में 26 फीसदी हिस्सेदारी दी जाएगी और अन्य खनिजों के खनन के मामले में राज्य सरकार को पिछले साल दी गई रायल्टी के बराबर राशि ग्रामीणों को भी दी जाएगी।

गरीबी पर मध्यवर्ग का ढोंग

poverty.jpg

गरीबी रेखा के हालिया विवाद से दो चीजें साबित होती हैं। पहली, संख्याओं को अलग-अलग तरीके से रखकर आंकड़ों का भ्रम पैदा किया जा सकता है। दूसरी, भारतीय मध्यवर्ग में दोहरे चरित्र और गरीबी को झुठलाने की बीमारी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर योजना आयोग के हलफनामे के बाद मीडिया में भूचाल आ गया। ये कोई नए आंकड़े नहीं थे, बल्कि विश्लेषक इनसे पहले से परिचित थे। इसमें शहरों में रोजाना 32 रुपये कमाने वाले को गरीबी रेखा के ऊपर माना गया। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह आंकड़ा 26 रुपये रखा गया है। मीडिया और मध्यवर्ग चीख-चीखकर यह सवाल पूछने लगे कि कैसे कोई इतने कम पैसों में गुजारा कर सकता है। कई रिपोर्टों का हवाला दिया गया, जिनके मुताबिक पटरी पर रेहड़ी लगाने वाले भी रोजाना बस किराए में ही 32 रुपये खर्च कर देते हैं।

गिरावट से उपजा निवेश का मौक़ा

nivesh.jpg

बेफिक्र हो जाइए। अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग घटने के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था दोहरी मंदी (डबल-डिप रिसेशन) में फंसने नहीं जा रही है। हालांकि ग्लोबल इकनॉमी की रफ्तार सुस्त हो रही है। मुमकिन है कि लंबे समय तक आर्थिक रफ्तार सुस्त रहे। अक्सर जब वित्तीय संकट से मंदी शुरू होती है तो ऐसा होता है। ऐसे में शेयर बाजार में गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका है। यह मंदी के निचले स्तरों तक नहीं जाएगा।

2 अगस्त को तकनीकी डिफॉल्ट से बचने के लिए अमेरिकी नेताओं के बीच वक्त रहते कर्ज सीमा बढ़ाने पर सहमति बन गई थी। आलोचकों का कहना था कि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नेताओं के बीच इस मामले पर टकराव 'राजनीतिक ठहराव' की निशानी है, जिसके भविष्य में गंभीर नतीजे हो सकते हैं। हालांकि यह सियासी ड्रामा ज्यादा था। इसी तरह का राजनीतिक तमाशा 1995 में भी हुआ था।

भ्रष्टाचार को गिरफ्तार करो, उसके विरोधकर्ताओं को नहीं

giraft.jpg

64 वर्ष पूर्व कांग्रेस पार्टी ने स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था जिसने अंग्रेजो के निर्दयी एवं दमनकारी शासन का पर्दाफाश किया. उसने हाल मे अपने साथ भी कुछ ऐसा ही किया. अन्ना हजारे के अनशन के दौरान कांग्रेस पार्टी ने जो-जो किया उस से उसने ये सिद्ध कर दिया है की वो खुद भी कितनी निर्दयी ,बेवकूफ एवं दमनकारी है. अन्ना हजारे को जेल में डालकर, उन्होंने ऐसे जन समर्थन की लहर पैदा कर दी है जिसने इस आंदोलन में हुयी पिछली गलतियों को छिपा दिया है.

आर्थिक चमत्कार के 20 वर्ष

chmatkar.jpg

आज से 20 वर्ष पूर्व 21 जून 1991 को नरसिम्हा राव ने एक ऐसे कमजोर और अल्पसंख्यक सरकार की बागडोर संभाली थी, जो गंभीर आर्थिक संकट से घिरी थी। इसके बावजूद उन्होंने आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसने न सिर्फ भारत को बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित किया। भारत 1991 में इतना गरीब था और यहां की शासन व्यवस्था इतनी बदहाल थी कि यह विदेशी सहायता के लिए आवश्यक शर्तों को भी पूरा नहीं कर पा रहा था। आज भारत एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए अमेरिका का भी सहयोग मिल रहा है और यह जल्द ही आर्थिक विकास की गति में चीन को भी पीछे छोड़ देगा।

आने वाले समय में चीन को पछाड़ देगा भारत

india-dashak.jpg

पिछले कई दशकों तक भारत भुखमरी, फॉरेन एड और घूसखोरी में दुनिया में नंबर वन रहा, लेकिन साल 2000 से शुरू हुआ नया दशक हर दौड़ में पिछड़ने वाले इस देश के संभावित महाशक्ति में बदलने का गवाह बना। 21वीं सदी का एक और दशक पूरा करने पर यानी 2020 में भारत का स्वरूप क्या होगा, इस बारे में पेश हैं 8 संभावनाएं।

लोकपाल काफी नहीं, बुनियादी सुधारों की है जरूरत

fundamental.jpg

कुछ साल पहले मैंने इसी कॉलम में इस बात पर बड़ा आश्चर्य जताया था कि कैसे अमरिका के शीर्ष उद्योगपतियों को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार कर लिया जाता है और उन्हें सजा भी मिल जाती है, लेकिन भारत में ऐसे ही अपराधों में शामिल व्यवसायी आसानी से बच जाते हैं। भारत में दरअसल भ्रष्ट राजनेताओं ने पुलिस और न्यायिक व्यवस्था को इस तरह से अपंग बना दिया है कि तमाम स्तर की सुनवाइयों के बाद भी उन्हें दोषी साबित नहीं किया जा सकता। जाहिर है कि इस तरह का सड़ा हुआ सिस्टम धूर्त उद्योगपतियों को भी गिरफ्तार नहीं होने देगा, क्योंकि किसी भी तरह का घपला इन दोनों की मिलीभगत से ही अंजाम दिया जाता है। ऐसे में जब हमारा सिस्टम इन धूर्त राजनेताओं पर कार्रवाई करेगा, तब ही भ्रष्ट उद्योगपतियों को भी गिरफ्तार किया जा सकेगा।

गरीब राज्यों को मिल रहा है बेहतर जनसांख्यिकी लाभांश

rajya.jpg

देश में गरीब राज्यों को बेहतर जनसांख्यिकी लाभांश (डेमोग्राफिक डिविडेंड) मिल रहा है। इस बार की जनगणना में देश की जनसंख्या वृद्धि दर में कुछ कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2001 की जनगणना में जहां जनसंख्या वृद्धि दर 21.54 फीसदी दर्ज की गई थी, वहां इस बार की जनगणना में यह दर 17.64 फीसदी दर्ज की गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि 0-6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या में 3.08 फीसदी की कमी आई है।

बच्चों की संख्या में कमी होने से किसी भी क्षेत्र को जनसांख्यिकी लाभांश हासिल होता है, जिसके कारण आने वाले दशक में उन क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय में काफी वृद्धि होगी। छह वर्ष तक के बच्चों की संख्या में सर्वाधिक 4.1 फीसदी की कमी उत्तर प्रदेश में हुई। बच्चों की संख्या में राजस्थान में 3.5 फीसदी, मध्य प्रदेश में 3.4 फीसदी, छत्तीसगढ में 3.1 फीसदी और बिहार में 2.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।