शिक्षा का अधिकार कानून से दाखिले में छह गुना ज्यादा बच्चे प्राइवेट स्कूलों में

रायपुर. शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) की मदद से ज्यादातर बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने की योजना फेल साबित हुई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले साल दाखिले की प्रक्रिया बदली थी। इसके तहत पहले सरकारी स्कूलों में फिर अनुदान प्राप्त व आखिर में प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिया जाना था।

इसके बाद भी सरकारी स्कूलों से छह गुणा ज्यादा बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पहुंचे। एक बार फिर से नए सत्र के लिए दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 30 मई तक नोडल अफसरों के पास आवेदन किए जा सकते हैं। राजधानी में गरीब बच्चों के लिए आरक्षित 25 फीसदी सीटों के अनुसार करीब 6500 सीटें हैं।

इसमें नर्सरी में साढ़े चार हजार व पहली में दो हजार सीटें हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र में नर्सरी में 2700 और पहली में साढ़े छह सौ विद्यार्थियों के दाखिले हुए। सरकारी स्कूलों में नर्सरी नहीं होने की वजह से पूरे बच्चे प्राइवेट स्कूलों में गए।

जबकि पहली में डेढ़ सौ बच्चों को प्राइवेट स्कूल मिले। जबकि पांच सौ बच्चे ही सरकारी स्कूल पहुंच पाएं। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से एक बार फिर शिक्षा का अधिकार के तहत दाखिले की प्रक्रिया शुरू की गई है।

इस बार भी सरकारी स्कूलों में प्राइवेट की तुलना में ज्यादा दाखिले होंगे इसकी संभावना कम है।

छूट के लिए नर्सरी भेजा :
आरटीई के दाखिले को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया बदली थी। इसके तहत पहले सरकारी स्कूलों में, फिर अनुदान प्राप्त व आखिर में प्राइवेट स्कूलों में दाखिला होना था। पालकों को भी इसकी जानकारी थी। इस वजह से बच्चों को प्राइवेट स्कूल पहुंचाने के लिए कक्षा पहली की पात्रता रखने के बाद भी कई पालकों ने बच्चों को नर्सरी में भेजा। इस बार भी दाखिले के लिए कुछ ऐसी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

 

- साभारः दैनिक भास्कर
http://www.bhaskar.com/news/CHH-RAI-HMU-rte-law-is-not-effective-in-gove...