जमीन की बजाए कमरों के आधार पर स्कूलों को मिलेगी मान्यताः सिसोदिया

- पॉलिसी रिव्यू कमेटी का गठन कर बजट प्राइवेट स्कूलों के समक्ष उत्पन्न होने वाली कई समस्याओं का करेंगे समाधान
- दिल्ली के निजी स्कूलों ने अव्यवहारिक ‘लैंड नॉर्म्स’ के कारण पैदा हुई समस्याओं से उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कराया था अवगत

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने माना है कि स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए निश्चित क्षेत्रफल वाले जमीन की अनिवार्यता अनेक समस्याओं का कारण बन रही है। उन्होंने स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए जमीन की बजाए कमरों की उपलब्धता को प्राथमिकता देने की बात से सहमति जताई है। इस फैसले से राजधानी के लगभग 1400 स्कूलों तुरंत प्रभाव से राहत मिलने की संभावना है। इसके साथ ही उन्होंने निजी स्कूलों की समस्याओं के समाधान के लिए एक पॉलिसी रिव्यू कमेटी बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों के संचालक सदस्य और शिक्षा के क्षेत्र में रूचि रखने वाले लोगों की सदस्यता वाली रिव्यू कमेटी के साथ काम करने में कोई बुराई नहीं है।

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बुधवार को नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलाएंस (नीसा), दिल्ली इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलाएंस (दीसा) व कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ पब्लिक स्कूल्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन स्कूलों की मान्यता के लिए आवश्यक कई अव्यवहारिक नियमों के कारण पैदा हो रही परेशानियों से सरकार को अवगत कराने के उद्देश्य से किया गया था।

ऐवान-ए-ग़ालिब सभागार में आयोजित 'स्टेट कॉन्फ्रेंस फॉर बजट प्राइवेट स्कूल्स' को संबोधित करते हुए श्री सिसोदिया ने कहा कि यदि किसी स्कूल के पास मात्र 12 कमरे हैं स्कूल संचालक एक-एक सेक्शन के साथ 10वीं तक स्कूल चलाना चाहता है तो उसे इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने स्कूल संचालकों और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक लोगों की सदस्यता वाली एक पॉलिसी रिव्यू कमेटी के गठन के विचार पर भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए सरकार और लोगों के बीच कम से कम लेयर्स होना अच्छी बात है।

इस दौरान दिल्ली में स्कूलों की मान्यता के लिए आवश्यक ‘लैंड नॉर्म्स’ के अव्यवहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और समस्या के समाधान सुझाए गए। नीसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि बजट प्राइवेट स्कूलों के लिए अलग प्रावधान होना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बजट प्राइवेट स्कूलों के हितों की हमेशा अनदेखी होती है इसलिए इनकी आवाज को नीति निर्धारकों तक पहुंचाने के लिए अलग से पॉलिसी रिव्यू कमेटी के गठन की आवश्यकता है।

कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ पब्लिक स्कूल्स के चेयरमैन आर.के. शर्मा ने कहा कि बजट प्राइवेट स्कूल उन जगहों पर भी गुणवत्तायुक्त शिक्षा पहुंचाने में सफल रहे हैं जहां सरकार नहीं पहुंच सकी है। दिल्ली में जमीन की भारी कमी है जिससे पर्याप्त संख्या में नए स्कूलों की स्थापना अत्यंत मुश्किल है इसलिए आवश्यक है कि मौजूदा स्कूलों को अपग्रेड किया जाए। स्कूल खोलने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए। दीसा के राजेश मल्होत्रा ने कहा कि बजट स्कूल समाज के वंचित तबके को अंत्यंत ही कम फीस पर गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करते हैं लेकिन ऐसे स्कूलों से भी वाणिज्यिक दर पर करों की वसूली की जाती है। एक तरफ तो हमें गैरलाभकारी सेक्टर बताया जाता है लेकिन हमारे से बिजली, पानी व संपत्ति कर वाणिज्यिक दर पर वसूले जाते हैं। उन्होंने कहा कि बजट स्कूलों के लिए करों के लिए अलग स्लैब बनाए जाने की आवश्यकता है।

इस मौके पर गोवा, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा सहित कई राज्यों के स्कूल संगठनों के प्रतिनिधि व 500 से अधिक स्कूल संचालक मौजूद रहें। सम्मेलन को मुख्य रूप से चंद्रकांत सिंह, आलोक शर्मा, मदन मोहन, कुलदीप शर्मा आदि ने दिल्ली के स्कूलों की समस्याओं की ओर ध्यानाकर्षण कराया। कार्यक्रम का संचालन नीसा सेक्रेटेरिएट के अमित चंद्र ने किया।

- आजादी.मी

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