सार्वजनिक नीति - आजीविका जीविका

जीविका

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी ऐसे नियामक अवरोधों को दूर करने के लिए काम करता है जिनसे अनौपचारिक क्षेत्र में विकास और उद्यमी अवसर सीमित हो जाते हैं। अपने पुरस्कार प्राप्त ''कानून, स्वतन्त्रता और आजीविका'' अभियान के माधयम से यह केन्द्र अपना ध्यान इस बात पर केन्द्रित करता है ताकि परमिट प्रक्रियाओं को घटाया और सरल बनाया जाए जिनसे छोटे उद्यमियों, दुकानदारों, फेरी वालों और रिक्शा चलाने वालों को अपने व्यवसाय को स्थापित करने और आगे बढ़ाने से रोका जाता है। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी अपने प्रवर्तक और स्थापक कार्यक्रम जैसे जीविका, ऐशिया आजीविका प्रलेखी वार्षिक त्यौहार के माधयम से छोटे उद्यमियों को पेश आने वाली बाधाओं के प्रति जागरूकता का निर्माण कर रहा है|

अधिक जानकारी के लिये देखें: http://jeevika.org

जीविका : एशिया लाइवलीहुड डाक्युमेंट्री फेस्टिवल

जीविका एशिया लाइवलीहुड डाक्युमेंट्री फेस्टिवल के बारे में अधिक जानकारी के लिये यहाँ देखें। 

जीविका एशिया डाॅक्युमेंट्री फेस्टिवल की शुरुआत 2003 में हुई। इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी गरीबों के सामने जीविकोपार्जन के लिए मौजूद चुनौतियों को कैमरे में कैद कर जनता, मीडिया, न्यायापालिका और सबसे महत्वपूर्ण नीति निर्माताओं के सामने लाना है।

वर्षों से जीविका छोटे उद्यमियों, स्वरोजगार में लगे लोगों- रिक्शा चालकों, पटरी व्यापारियों, सेक्स वर्करों, बाल मजदूरों, किसानों और वनवासियों की आवाज बना हुआ है।

उद्देश्य

  • एशिया भर के ग्रामीण और शहरी गरीबों के जीविकोपार्जन की चुनौतियों का दस्तावेजीकरण।
  • ईमानदारीपूर्वक जीविकोपार्जन के रास्ते में आने वाली नीतियों और सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक पद्यतियों पर प्रकाश डालना और उसकी पहचान करना।
  • नीति निर्माताओं से नीतियों में बदलाव और सामाज के नेताओं से उन पद्धतियों में बदलाव के लिए कहना, जिनका गरीबों की जिंदगी पर कोई खास असर नहीं पड़ता है।

जीविका और उसके बाद

  • जीविका प्राप्त प्रविष्टियों में से चुने गए एक या अधिक निर्देशकों को नीतिगत वकालत के लिए सहायता प्रदान करता है।
  • सीसीएस विजेता फिल्मों की प्रतियां एशिया भर के शैक्षणिक संस्थाओं और विकास संस्थाओं के बीच बांटती है।
  • जीविका के वृत्तचित्रों को कई शहरों जैसे अहमदाबाद, बंगलुरू, चेन्नई, कोलकाता, मुंबई और लॉस एंजेलिस में दिखाया जा चुका है।

द लॉ, लिबर्टी और लाइवलीहुड कैम्पेन की स्थापना उस सिद्धांत के आधार पर की गई है जिसमें जीवन की गुणवत्ता आंतरिक रूप से जीविकोपार्जन और आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़े होने की बात कही गई है।

इसीलिए यह केंद्र जन नीति से जुड़े कदमों को बढ़ावा देता है ताकि स्वतंत्र उद्यमिता के रास्ते को आसान बनाया जा सके और एक ईमानदार जीविकोपार्जन की ओर बढ़ने के लिए शोध, एडवोकेसी और अन्य गतिविधियां जन बहस का हिस्सा बन सके।

सीसीएस और सेंटर फॉर पब्लिक पोलिसी रिसर्च ने अनौपचारिक सेक्टरों में प्रवेश के स्तर की बाधाओं और जीविकोपार्जन के नियमों के दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से जीविकोपार्जन नियामक अध्ययन करवाया। इसे भारत के 63 शहरों में करवाया गया। इसका उद्देश्य रिक्शा चालकों, मोबाइल और स्टेशनरी के दुकानदारों, पटरी व्यापारियों, कसाइयों के कामकाज की शुरुआत करने से जुड़े नियमों को सामने लाना और इसका दस्तावेजीकरण करना था ताकि भारत की जनता का ध्यान मौजूदा मुद्दों की ओर खींचा जा सके। इस संबंध में इकट्ठा किए गए आंकड़े वेबसाइट www.livelihoodfreedom.in से लिए जा सकते हैं।

‘‘मैं खुश हूं कि जीविका जीविकोपार्जन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर फिल्म बनाने के लिए फिल्म निर्माताओं को प्रोत्साहित करना
जारी रखे हुए है। यह दस्तावेजीकरण के संघर्ष, जागरूकता बढ़ाने और सबसे बड़ी बात नीतिगत सुधार में सहायता करता है।
’’

- नंदिता दास

 

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी
ए-69 हौजख़ास, नई दिल्ली 110 016, ईंडिया
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