भारत में स्कूल वाउचर

नागरिकों की ताकत

प्रगतिशील राज्य सरकारों ने अपने राज्यों की विशेष समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए नए समाधान हेतु स्कूल चयन के विचार को अपनाना शुरू कर दिया है। इन राज्यों में शिक्षा पद्धति के क्षेत्र में गुणवत्ता एवं सुविधाएं विकसित करने एवं गरीबों को सशक्त करने के लिए अनेक प्रकार की मार्गदर्शक योजनाओं का खाका तैयार किया गया है।

राजस्थान
राजस्थान सरकार ने दो याजनाओं की घोषणा की है जो स्कूल वाउचर का प्रयोग करती हैं—ज्ञानोदय 6 से 12 की कक्षाओं के लिए और शिक्षक का अपना विधालय 1 से 5 कक्षा तक के लिए।

ज्ञानोदय योजना:- यह योजना ''सरकारी-निजी साझेदारी'' पर आधारित है, इसका उद्देश्य बीओओ (निर्माण, संचालन और मालिकाना हक) के आधार पर छठी से बारहवीं कक्षा तक के नए स्कूल खोलना है। पहली चरण के तहत अधिक से अधिक पांच ऐसे स्कूल हर जिले में स्थापित किए जाएंगे। इन स्कूलों की 50 फीसदी सीटों को राज्य सरकार स्कूल वाउचर के माध्यम से वित्तीय सहयोग देंगी। यह योजना अपनेआप में निगरानी एवं मूल्यांकन प्रणाली और लड़कियों एवं निर्धन बच्चों को प्राथमिकता देती है।

शिक्षक का अपना विधालय :- इस योजना के तहत प्रशिक्षित बेराजगार शिक्षकों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया है। इसका लक्ष्य है प्राथमिक विद्यालयों की गुणवत्ता में बढ़ोतरी लाना । इन शिक्षकों को सरकारी एकल शिक्षक प्राथमिक विद्यालयों को अपनाने एवं पिछड़े राज्यों एवं गावों में नये सरकारी-निजी साझेदारी वाले स्कूल खोलने की छूट देती है, तीन किलोमिटर के इलाके में रहनेवाले बच्चे इन स्कलों में सरकार द्वारा अनुमोदित वाउचर के माध्यम से प्रवेश पा सकें। ऐसे छात्र स्कूलों में कुल छात्रों की संख्या के 50 फीसदी होंगे।

ज्ञानोदय और शिक्षक का अपना विद्यालय योजनाओं के परिप्रेक्ष्य में स्कूल चयन अभियान ने राजस्थान शिक्षा विभाग के लिए 30 जुलाई, 2008 को शिक्षा वाउचर पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। स्कूल चयन अभियान अपना शोध कार्य का परिणाम राजस्थान के साथ बाटेंगा और योजनाओं को लागू करने के लिए दो नए तकनिकी विशेषज्ञ मुहैया कराएगा।

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा तक के गरीब बच्चों को कान्वेंट एवं मोंटेसरी स्कूल में पढ़ने का मौका प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु तैयारियां जोरों पर हैं, राज्य के पिछड़े इलाकों के अभिभावकों को शिक्षा वाउचर मुहैया कराने के लिए, जिसमें बच्चों के संपूर्ण शिक्षा खर्च जैसे शिक्षा शुल्क, लेखन सामग्री और अन्य सम्बधित खर्च सम्मिलित होंगे। निजी स्कूल बच्चों पर खर्च किए गए शिक्षा खर्च की क्षतिपूर्ति तभी कर सकते हैं जब अभिभावक अपने बच्चों की प्राप्त शिक्षा की गुणवत्ता से संतुष्ट है। पहले चरण में यह योजना उन क्षेत्रों में ही कार्यान्वित की जाएगी जहां की कुल जनसंख्या 300 हो और वहीं एक किलोमिटर के क्षेत्र मे कोई प्राथमिक विद्यालय न हो।

उत्तराखंड
पहल— पीपीपी  (नीजि सार्वजनिक साझेदारी) एक परिवर्तनशील शुरूआत है जो 6 से 14 साल के बच्चों को शिक्षा वाउचर मुहैया करा रही है जिनमें फटे पुराने रद्दी कागज चुनने वाले, मेहत्तार, सपेरा, अनाथ बच्चे शामिल हैं। जो राज्य के वंचित शहरी झुग्गी-झोंपड़ियों में रहनेवाले क्षेत्र के हों। जिसकी चुनाव योग्यता का मापदंड यह हो कि बच्चा किसी स्कूल में दाखिला प्राप्त न हो या एक साल से स्कूल छोड़ दिया हो तथा एक किलोमीटर के परिधि में कोई सरकारी स्कूल या शिक्षा गारंटी योजना न चलाई जा रही हो।

रांची
रांची के झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र में रहने वाले जरूरतमंद बच्चों की पहचान हमारे सहयोगी संगठनों में एक, प्रतिज्ञा ने वित्तीय कोष खड़ा किया है। और 40 बच्चों को शिक्षा वाउचर द्वारा बजट निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए वित्तीय पोषण दे रहा है। ये बच्चे झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले हैं जिन्हें बजट प्राथमिक स्कूल या इन इलाकों में कोई सरकारी स्कूल प्राप्त नहीं है।

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