भारत की पहली स्कूल वाउचर योजना

दिल्ली वाउचर योजना

दिल्ली वाउचर योजना की शुरूआत 28 मार्च 2007 में हुई जो वाउचर द्वारा शैक्षणिक चयन उपलब्ध कराने का एक जीता जागता उदाहरण है। स्कूल चयन अभियान (स्कूल च्वायस कैंपेन) के तहत दिल्ली के 68 वार्डों के 408 छात्रों को हर साल 3600 रु. उपलब्ध कराया गया है। वाउचर के लिए आवेदन करते समय बच्चे छठी कक्षा में पढ़ रहे थे या सरकारी स्कूलों की छोटी कक्षा में पढ़ रहे थे। इस वाउचर को 26 जुलाई को दिल्ली के मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, शिक्षा मंत्री अरविन्दर सिंह लवली और स्कूल चयन के एंबेसेडर गुरचरण दास, नफीसा अली और टी.के. मैथ्यू ने प्रदान किया। वाउचर कम से कम तीन साल के लिए दिया जाएगा। अगर फंड उपलब्ध हो तो स्कूल चयन अभियान इन्हें आगे भी सहयोग करता रहेगा।

दिल्ली वाउचर योजना

लाभान्वित छात्रों के चुनाव के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी प्रणाली के तहत एक लाख छात्रों के आवेदनों की सार्वजनिक लॉटरी निकाली, इसमें से क्षेत्रीय वार्ड परिषद के सदस्यों ने लाटरी के माध्यम में प्रत्येक वार्ड से छह छात्रों का चयन किया। जिसने लॉटरी नहीं जीती उसने अपना आवेदन अपने सम्बधित वार्ड परिषद के सदस्य को सौपा, जिसमें सरकार से ''स्कूल वाउचर'' की मांग की गई। ढाई लाख से भी ज्यादा अभिभावकों ने ये आवेदन जमा किए!

408 वाउचर छात्रों का सपना साकार हुआ। आखिरकार उन्हें अपनी इच्छा के स्कूल में पढ़ने का मौका मिला। दिल्ली स्कूल वाउचर योजना को धन्यवाद! भारत का हर बच्चा शिक्षा चयन के अधिकार का पात्र है!

चयन करने वाले एंबेसेडर

जेरी राव अजय शाह

प्राफेसर पी.वी. इंद्रसन

माधव चवाण टी.के. मैथ्यू
जेरी राव अजय शाह प्रो पी.वी. इंद्रसन माधव चवाण टी.के. मैथ्यू

 

''शिक्षा का अधिकार, संविधान में निहित होने और पारित होने के बावजूद एक सब्जबाग-सा बनकर रह गया है। स्कूल वाउचर शिक्षा के अधिकार को पारित करने के लिए बढ़ावा देता है और साथ ही साथ अभिभावकों को अपनी इच्छा के मुताबिक शिक्षा के सही वातावरण में अपने बच्चों को ढालने का मौका देता है''।

स्कूल चयन अभियान
उपलब्धियां:

  1. जन अभियान के जरिये 1,20,42,000 लोगों से सीधे संपर्क किया गया।
  2. 743 प्रखंड स्तर पर एवं 129 जिला स्तर पर स्थानीय लोगों की आम सभाएं आयोजित ‌की गईं।
  3. 415 नुक्कड़ नाटक, लोक गीत एवं लोक नृत्यों का प्रर्दशन हुआ।
  4. विभिन्न जिलों में 251 रैलियों का आयोजन किया, जिसमें अभिभावकों, बच्चों, गैर सरकारी संगठन के प्रधान और पंचायत के प्रतिनिधियों को शरीक किया गया।
  5. स्कूल चयन अभियान के राष्ट्रीय गठबंधनः राज्य गठबंधनों, गैर सरकारी संगठनों एवं स्कूल चयन के कार्यकर्त्तागण।
  6. विभिन्न सेमिनार, कार्यशाला एवं शोध प्रकाशन।
  7. पंचायतों, जिला परिषदों, पंचायत समितियों, एमएलए /एमएलसी एवं लोकसभा के सदस्यों को 3168 ज्ञापन सौंपे गए।
  8. बड़े पैमाने पर प्रख्यात समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में प्रकाशन और दूरदर्शन के चैनल पर प्रसारण हुआ।

"सेंटर फॉर सिविल सोसाईटी शिक्षा के क्षेत्र में नीतिगत सुधारों को निर्देशित करने में अहम भूमिका निभा रही है। मैं विशेष रूप से उनकी अवधारणा ''छात्रों को फण्ड दें, स्कूलों को नहीं'', की प्रशंसा करता हूँ, जो भारत के बच्चों की गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए महान सम्भावनाएं समेटे हुए है।'' 

-अरविन्दर सिंह लवली, दिल्ली के शिक्षा मंत्री

 

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