हेनरी जॉर्ज

व्यक्तित्व एवं कृतित्व

[जन्म 2 सितम्बर 1839 निधन 29 अक्टुबर 1897]

हेनरी जॉर्ज ने गरीबी के बारे में बात की तब वह अच्छी तरह जानते थे कि वह किस बारे में बात कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपना अधिकांश जीवन गरीबी में बिताया था। अपने समय के महत्वपूर्ण अर्थशास्त्री होने के पहले उन्होंने बहुत कम तनख्वाह पर नाविक और बाद में एक चित्रकार के सहायक के रूप में काम किया। 1879 में जॉर्ज ने शिक्षित अर्थशास्त्री के रूप में अपनी पहली पुस्तक ''प्रगति और गरीबी'' (Progress and Poverty) लिखी जो उस समय खूब बिकी। इस पुस्तक का अनुवाद विश्व की अधिकांश भाषाओं में हुआ। इस किताब ने संपूर्ण पृथ्वी पर समाज सुधार के कार्यो में उत्प्रेरक का काम किया।

इस किताब का केन्द्रीय भाव यह था कि सभी प्रकार के कर निर्धारण प्रगति का गला घोटने की ओर अग्रसर होते है और गरीबों के अधिकारों को नुकसान पहॅुचाते है। उच्च आयकर उदाहरण के लिए बेरोजगारी पैदा करता है। अतः एकल कर के रूप में सिर्फ भूमि कर ही लिया जाना चाहिए। भूमि संपत्ति रूप में रिकार्डियन अर्थशास्त्र की आत्मा है और साधारण संपत्ति नहीं, ऐसा जॉर्ज ने तर्क दिया। मात्रा की दृष्टि से भूमि सीमित है इस वजह से इसका मनमाना किराया वसूल किया जाता है। भू-स्वामी लोगों का शोषण करते हैं जो एकाधिकार की भावना पैदा करता है। संक्षेप में वर्तमान में यही गरीबी का मुख्य कारण है अतः इस पर पूरी शिद्दत के साथ कर निर्धारित होना चाहिए।

जॉर्ज जबरदस्त समाज सुधारक थे। जॉर्ज में और उस समय के समाजवादियों और मार्क्सवादियों के विचारों में बहुत कम समानताएं थी। जॉर्ज अच्छी तरह मानते था कि मुक्त बाजार लोगों को गरीबी से उपर उठाने का सबसे अच्छा रास्ता है।

''रक्षा और स्वतंत्र व्यापार'' (1886) नामक पुस्तक में उनके मुक्त सिद्वांत, मुक्त व्यापार की रक्षा के लिए आत्मा के समान लगते है। नकली जंजीरो और एकाधिकार से बाजार को स्वतंत्र करवाया जा सकता है यदि कोई ''एकल कर'' प्रस्तावित हो। उनका मानना था कि भूमि कर तटस्थ होने के साथ-साथ बाजार के लिए उपयोगी भी होगा। बहुत से अर्थशास्त्री इस विचार को आज भी टेढ़ी नजर से देखते है। अविकसित भूमि पर ऊंचे कर देश में भूमि की उपलब्धता को खत्म कर सकते है। निश्चित रूप से यह अन्य करों से कम नुकसानदायक होगा।

जॉर्ज की सामाजिक उत्थान की इच्छा उन्हें महत्वपूर्ण उदारवादी सुधारक बनाती है और जो लेसी फेयर (मुक्त मुद्रा) और उदारवादी विचारधारा से मेल खाती है। यह विचारधारा उन्हें उन अन्य समाज सुधारकों से अलग करती है जो आज़ादी का बलिदान ''दखलअंदाज कल्याणकारी राज्य'' की वेदी पर स्वाहा करने को तैयार थे।

हेनरी जॉर्ज की रचनाएं:

हेनरी जॉर्ज की संपूर्ण रचनाओं की जानकारी www.schalkenbach.org पर उपलब्ध है।