आचार्य एन.जी. रंगा

व्यक्तित्व एवं कृतित्व

[जन्म 1900 – निधन 1995]

वे उन चंद नेताओं में सें थे जिन्हे कृषि की समस्याओं का गहन ज्ञान था। साथ ही उन्होंने किसानों की प्रोपराइटरशिप के अधिकार के लिए दो दशकों तक कार्य किया। उन्होंने कांग्रेस में महत्वपूर्ण स्थान पद प्राप्त किए लेकिन सहकारी कृषि पर नेहरु के साथ विवाद होने के कारण उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। राजाजी और अन्य ने नेहरू के प्रस्ताव का विरोध किया था। नेहरू सोवियत संघ में हो रही सामूहिक खेती के पक्ष में थे और रंगा किसानों की प्रोपराइटरशिप और कृषि को भारत के बुनियादी उद्योग के रूप में मान्यता के पक्षधर थे। उन्होंने कृषिकर लोक पार्टी के नाम से किसानों की पार्टी की स्थापना की। जिसका बाद में स्वतंत्र पार्टी में विलय हो गया जिसके वे संस्थापक सदस्य और अध्यक्ष थे।

साभार: इंडियन लिबरल ग्रुप