उदारवाद के विभिन्न पथ - ब्रायन डोहार्ती

पैट्री के तर्कों में निजी विचारों की खासी झलक है। मैं उनके लक्ष्य को साझा करता हूं, उनकी एक ज्यादा मुक्त समाज में रहने की कोशिश को भी। वे जिसे 'लोक अभियान (folk activism)' कहते हैं और जिसे निश्चित तौर पर उम्मीदहीन बताकर खारिज करते हैं-उसे मैं अपनाता हूं। मेरे पूरे पेशेवर कैरियर में मैंने पत्रकारिता की है, इसमें अधिकांश हिस्सा परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर आज़ादी का ही संदेश लिए रहा है।

पैट्री की ही तरह मैं भी कुछ छोटे समुदाय बनाने के तात्कालिक प्रयास करता रहा हूं। ऐसे समुदाय जो, ज्यादा आज़ादी और कम बाहरी नियंत्रण के कारण, विशिष्ट अमेरिकी जीवन से अलग होते हैं। कम से कम प्रयोगात्मक समुदाय/कला समारोह बर्निंग मैन के लिहाज से। इस साझा नजरिये और अनुभव से मैं इस बात को लेकर निश्चित (certain) हूं कि पैट्री सकारात्मक तौर पर सही है-केवल उन जगहों को छोड़कर जहां मुझे यकीन है कि वे गलत हैं।

इंसान के रहने और परस्पर संबंध के लिहाज से मोर्चे और प्रयोग, दोनों ही मूल्यवान तरीके हैं। इससे मिलने वाली प्रौद्योगिकी और प्रोत्साहन के साथ ही इससे उपजने वाली संभावनाएं संस्कृति और धारणाओं में बड़े पैमाने पर बदलाव लाती हैं। पैट्री बड़ी चतुरता के साथ स्वतंत्रतावाद के लिए प्रौद्योगिकी की सीमाओं की बात करते हैं। यह कि हम विभिन्न स्थानों और समय के साथ हलचल करने वाले हाड़-मांस के इंसान हैं, केवल अंकीय विचार नहीं। और जो हमारे नियंत्रण से बाहर है उसे उन्हें केवल साइबर स्पेस में नहीं छिपाया जा सकता।

फिर भी, उदाहरण के लिए, वर्ल्ड वाइड वेब हमें पैट्री की स्थिति की कई विडंबनाओं में एक तो बता ही देता है। एक महत्वपूर्ण परिवर्तन, जो प्रौद्योगिकी की देन है, जिसने 'लोक अभियान' के पुराने तौर-तरीकों को-विचारों का प्रसार, नजरिये में बदलाव-ज्यादा आसान और मनोरंजक बना दिया है।

इस तरह जब वह नकारात्मक बात करते हैं तो मुझे लगता है कि वे गलत हैं। 'लोक अभियान'-बातचीत, बहस और मतांतरण, जैसा कि वे इसे परिभाषित करते हैं-में निश्चित तौर पर ऐसी संभावनाएं हैं जो आज़ादी के समर्थकों को 'तंत्र में परिवर्तन के प्रोत्साहन' के तौर पर दिखाई दे सकती हैं। निस्संदेह यह लंबा, धीमा और अब तक नाकाम मेहनत भरा काम रहा है-अगर हमें जरुरत हर आज़ादी समर्थक की पूर्व मौजूद दिशा की है। लोकतंत्र हमें अब तक शून्य कर,पूरी तरह से अपकृत्य आधारित 'नियामक' सरकार, ड्रग्स का पूरी तरह से वैधकरण और प्रशुल्क के समापन का सुख भी नहीं दे सका है। हां हमें कम कर, ट्रक और एयरलाइंस के पुरातन नियमों से छुटकारा, कुछ राज्यों में मैरिजुआना को चिकित्सा आधार पर छूट, कई इलाकों में कम प्रशुल्क और एक व्यवस्थित सरकार जो कुछ मामलों में गतिरोध, संरक्षणवादी प्रतिक्रिया देती है।

मैं जानता हूं कि यह पर्याप्त नहीं है। पैट्री की तरह जागरुक और उत्सुक कार्यकर्ता के लिए अपनी मर्जी की जिंदगी जीने के लिहाज से असंतोषजनक ही कहा जाएगा। लेकिन मैं लंबी अवधि में इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हूं, कि यह पूरी तरह से असंभव और व्यर्थ है।

जब बात आज़ादी समर्थकों के किसी विशिष्ट तौर-तरीके पर हमले की आती है तो मैं ईमानदारी के साथ इसके विरोध में खड़ा होता हूं। मैं किसी भी ऐसे प्रयास के लिए नरम रवैया रखता हूं जिससे किसी को आज़ादी का समर्थक बनाने में मदद मिलती हो। जैसा कि मैं अपनी अमेरिकी आज़ादी समर्थक आंदोलन के युद्ध के बाद के इतिहास रेडिकल्स फॉर केपिटलिज्मः ए फ्रीव्हीलिंग हिस्टरी ऑफ द मॉडर्न अमेरिकन लिबरटेरियन मूवमेंट, 70 के दशक तक हर सक्रिय आज़ादी समर्थक का 'लोक अभियान' स्पष्टतया समाज की संस्थाओं और सरकार को एक आज़ादी समर्थक दिशा में ले जाना नहीं था-यानी सीधे तौर पर कहा जाए तो आज़ादी समर्थक समाज बनाने का इरादा नहीं। इसकी बजाय फाउंडेशन फॉर इकानॉमिक एजुकेशन, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन स्टडीज, नथानियल ब्रेंडेन इंस्टीट्यूट, फ्रीडम स्कूल सभी से बनाए गए समूहों का प्रयास था कि आर्थिक और दार्शनिक तर्क के जरिये लोगों को आज़ादी का समर्थक बना दिया जाए।

इस पूरे प्रयास के पीछे शायद लोकतंत्र को लेकर मौजूद एक कमजोर और अपरिपक्व लोकधारणा थी-कि आप अमेरिका में पर्याप्त संख्या में आज़ादी समर्थक तैयार कीजिए, अमेरिका की राजनीतिक संस्थाएं ज्यादा आज़ादी की समर्थक हो जाएंगी। लेकिन शुरुआती दौर के अधिकांश अमेरिकी आज़ादी समर्थक समझते थे कि राजनीतिज्ञ लोगों की धारणाओं के सुस्त प्रतीक होंगे और यह भी सांस्कृतिक और बौद्धिक लड़ाई लंबी चलेगी-पैट्री की उम्मीदों से भी ज्यादा लंबी, इसमें कोई शक नहीं।

वर्तमान सरकार और वर्तमान चुनावी तंत्र कठिनता और बुरे प्रोत्साहनों के बाद भी मुझे लगता है कि यह संभव है-वाकई, वास्तविकता में-आज की तुलना में 10 गुना ज्यादा आज़ादी के ऐसे समर्थकों वाले अमेरिका में यह संभव है जो आज की परेशानियों की तुलना में कठोर आज़ादी समर्थक मानवीय नजरिये के कारगर होने में विश्वास रखते हों। इस लिहाज से, मैं फ्री स्टेट प्रोजेक्ट के चतुर राजनीतिक प्रयास की तारीफ करता हूं-छोटी सी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आज़ादी समर्थकों की संख्या की ताकत को झोंक देना, हालांकि मैं पैट्री की इस आशंका से सहमत हूं कि आखिरकार आज अमेरिका का कोई प्रांत आज़ादी समर्थन की राह में कितने आगे तक जा सकता है।

समुद्र में रहने (seasteading) के विचार पर रीज़न के लिए आगामी लेख पर काम के दौरान मैं पैट्री के खास तरीकों के बारे में सोच रहा था। मुझे एक रोचक बात मिली कि भले ही अधिकांश लोगों की रुचि समुद्र में रहने के विषय पर विचार-विमर्श, बातचीत, ब्लॉगिंग, मॉडल बनाने, समर्थन और इससे संबंधित कान्फ्रेंस में भाग लेने में हो, लेकिन वास्तविकता में वहां शुरुआती प्रयोग के महत्वपूर्ण काल में रहने में अधिकांश लोगों की रुचि बहुत ही कम है।

पैट्री अपनी जरुरत अपने सपने के लिए लोगों से कुछ ज्यादा की ही अपेक्षा कर रहे हैं। लोगों को अपने रहन-सहन में बदलाव के साथ ही रहने की पुरानी जगह से हटाकर अनजान और प्रतिकूल माहौल में बसाना कोई आसान काम नहीं। वह मुक्त समाज शब्द का प्रयोग करते हैं, निजी आज़ादी का नहीं। वह वैरागी नहीं बनना चाहते-कर लादने वाले और उनके लिए नियम बनाने वालों से भागने के तौर-तरीके लोगों को पहले से ही मालूम हैं, मुझे यकीन है कि पैट्री को भी इस बात का पता है। अगर आप इंसानों का साथ या परिवार चाहते हैं तो फिर इसमें ज्यादा मजा नहीं है।

मौखिक और लिखित तर्कों के जरिये अपने आस-पास के लोगों और पूरी दुनिया के लोगों को ज्यादा स्वतंत्र होने की बात समझाने का लोग क्यों प्रयास करते हैं, पैट्री इस बात के लिए आधुनिक विकासवादी जीव वैज्ञानिक खुलासा दे सकते हैं। इस बात का भी क्यों पैट्री के अप्रिय, तैरते प्लेटफॉर्म के अपने देश के निर्माण के मुश्किल लेकिन फायदेमंद सक्रियता से क्यों परहेज किया जाता है।

लेकिन मेरी राय में इस बात का खुलासा आज़ादी के समर्थकों के पुराने पसंदीदा सामाजिक विज्ञान अर्थशास्त्र में मिल सकता है। लोक अभियान की राह पर चलने में काफी कम प्रयास, कम निजी खर्च की दरकार होती है। दशकों से आज़ादी के समर्थक लोगों को जो कहते हैं उस पर खर्चने, वास्तविक आज़ादी समर्थक संस्थान बनाने, उन तमाम सामाजिक जरुरतों को पूरा करने जिसकी हम सरकार से उम्मीद करते हैं, लोगों को कहने नहीं यह कर दिखाने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं कि निरंकुश निजी आज़ादी वास्तव में साकार हो सकती है। और दशकों से आज़ादी के समर्थकों ने लिखने, बोलने और सोचने को ज्यादा अनुकूल रास्ता माना है, एक ऐसा रास्ता जिसकी लागत पर नियंत्रण करना ज्यादा आसान है।

यह सच है, कम से कम अगर आप माध्यम को परिणाम से अलग कर लेते हैं तो। यानी, अगर स्वतंत्र दुनिया को हासिल करने के लिए जरुरी है कि आप यह सोचें कि आपका किया गया काम उचित था, तो यह प्रयासों को व्यर्थ गंवाना ही है।

लेकिन मुझे आशंका सी ही रहती है कि आज़ादी के समर्थकों का कामकाज अधिकतर तो उपभोग व्यय (consumption expense) ही है-और यह एक अच्छी बात भी है, क्योंकि जैसा कि इस समूची बहस के अंतर में छिपा है, अंतिम लक्ष्य हासिल करना किसी एक कार्यकर्ता के बूते की बात नहीं है। यहां तक कि समुद्र में रहने (seasteading) के लिए भी जरुरी है कि दूसरे लोगों की बहुत ज्यादा सक्रिय भागीदारी मांगता है, हालांकि लोक अभियान के 'हर किसी को आज़ादी समर्थक' बनाने के लोकतंत्र के वैकल्पिक प्रयास से कम।

आखिरकार सामाजिक दुनिया अंततः हमारा ही काम नहीं है, मान-मनुहार और हिंसा को छोड़कर। उस कालहीन और भीषण दुविधा के लिए पैट्री के पास निश्चित तौर पर काफी बुद्धिमानी भरा और सनकी रास्ता है-एक वास्तविक नई सामाजिक दुनिया का गठन। जिसमें कुछ और नहीं बस खुद ही चुने हुए कामरेड हों। यह देखना होगा कि क्या इससे वे सारी समस्याएं हल हो जाएंगी जिन्हें वे समूचे राजनीतिक माहौल का परिणाम मानते हैं। सबसे अधिक तो यह कि क्या राष्ट्रों से भरी दुनिया महासागर में छोटे-छोटे समूहों को अपने स्वतंत्र समुदाय बनाने की इजाजत देगी?

पैट्री की बौद्धिक स्थिति-कि विशिष्ट राजनीतिक और बौद्धिक संदर्भ में 'लोक अभियान' उम्मीदहीन है-की विडंबना यह है कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे सही हैं या नहीं। फर्क इस बात से पड़ता है कि क्या वह, हमारी इस दुनिया में एक व्यावहारिक समुद्री रहवास (seastead) बना सकते हैं?

स्वतंत्रतावाद का यह मूल संदेश है कि अधिकांश लोग गलत हैं-यह कि कानून बनाने और सत्ता पर एकाधिकार वाली व्यवस्थित सरकार सभी महत्वपूर्ण सामाजिक काम करने के लिए अनिवार्य नहीं है। आज़ादी के समर्थकों को लगता है कि वे खुद अपने बूते पर सब कर सकते हैं। अपने बूते सब करने की कम्प्यूटर की संस्कृति और बर्निंग मैन, जिसमें पैट्री ने मसाला लगा दिया है, ने उसे एक सच बात को लेकर आश्वस्त कर दिया हैः हम सब कर सकते हैं, अगर हम कुशल हैं, बहादुर है, हम जमीन से उठकर अपनी संस्कृति जैसा कुछ बना सकते हैं तो। आज़ादी के समर्थकों को समझाने के लिहाज से यह महत्वपूर्ण बात होगी कि पैट्री के सकारात्मक संदेश के सच का मतलब यह नहीं है कि पुराने जमाने का लोक अभियान मूलतः उतना मूल्यहीन है जितना कि वे बताते हैं।

2007 में मैंने राइट हियर एट केटो अनबाउंड में कुछ लिखा था जो आज भी औचित्यपूर्ण है, इसलिए मैं अपनी बात को दोहराना चाहूंगाः 'मैं नहीं जानता कि आज़ादी के लिए सबसे अच्छी और प्रभावी रणनीति क्या होगी। मेरी राय में काफी कुछ ऐसा भी करना फायदेमंद होगा जो शायद सर्वश्रेष्ठ से कुछ कम हो या सबसे प्रभावी नहीं हो। हर विशिष्ट आज़ादी के समर्थक का रुझान और धारणाएं भी सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शन में काम आएंगी-फिर भले ही वह सबसे प्रभावी न हो!'

मैं समुद्र में रहने के प्रयास (seasteading) को शुभकामनाएं देना चाहूंगा। जिसका मतलब यह उम्मीद कि पैट्री का 'लोक अभियान' लोगों को इतना समझा दे कि वे इसे करने का प्रयास करें। और उम्मीद है कि एक दिन मैं समुद्र में रहने के पैट्री के काम के पूरा होने के जश्न में भाग लूंगाः उन तमाम रास्तों में से एक जो एक ज्यादा स्वतंत्र सामाजिक व्यवस्था बनाने में मदद करते हैं।


ब्रायन डोहार्ती पत्रिका रीजन के सीनियर एडिटर, रेडिकल्स फॉर केपिटलिज्मः ए हिस्टरी ऑफ द मॉडर्न अमेरिकन लिबरटेरियन मूवमेंट के लेखक हैं और उन्होंने हाल ही में गन कंट्रोल ऑन ट्रायल लिखी है। 1994 से 2003 तक उन्होंने रीजन के लिए एसोसिएट एडिटर और रिपोर्टर के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्होंने विकलांगता कानून के साथ अमेरिकी से लेकर प्रदूषण-कर्ज कारोबार (pollution-credit trading) और इंडिपेंडेंट रॉक सीन पर लिखा। डोहार्ती के लेख द वॉशिंगटन पोस्ट, द लॉसएंजिल्स टाइम्स, मदर जोंस, स्पिन, नेशनल रिव्यू, द वीकली स्टैंडर्ड, द सेनफ्रांसिस्को क्रॉनिकल, सक और दर्जनों अन्य पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वे 1999 में कम्पीटिटिव एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट में पर्यावरण पत्रकारिता में वारेन ब्रुक्स फेलो थे। 1993-94 के दौरान उन्होंने केटो की पत्रिका रेग्यूलेशन में प्रबंध संपादक की भूमिका निभाई। डोहार्ती ने यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा से पत्रकारिता में स्नातक उपाधि हासिल की थी।