कारसनदास मूलजी

व्यक्तित्व एवं कृतित्व

[जन्म 1832 – निधन 1871]

कारसनदास का सार्वजनिक जीवन मात्र 17 साल का होते हुए भी उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन एक शिक्षाविद् के रूप में शुरू किया। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के प्रोत्साहन और लोगों के ज्ञान के लिए संस्थाओं की फंडिंग में अहम भूमिका अदा की। एक पत्रकार जिसने अपनी कलम का इस्तेमाल चाबुक की तरह किया, उन्होंने गुजराती वैष्णव संप्रदाय पर निशाना साधा जोकि तब तक खुद को कानून समझा करता था। उन्होंने उनके व्यभिचार को उजागर किया और असंख्य असहाय महिलाएं उनकी शुक्रगुजार हुईं। वे विधवा पुनर्विवाह और लड़कियों की शिक्षा के पक्षधर थे।

साभार: इंडियन लिबरल ग्रुप