कहाँ है विजन?
ममता बनर्जी की नजर भले ही कोलकाता की 'राइटर्स बिल्डिंग' पर रही हो पर रेलमंत्री के तौर पर उन्होने अपना जो 'विजन' सामने रखा उससे कम से कम ऐसा लगा था कि वह रेलवे के बारे में बहुत ही संजीदगी से सोचती हैं। दिसंबर 2009 में जारी “विजन 2020 डॉक्यूमेंट” को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कई प्रावधान किए हैं लेकिन रेल बजट में कहीं-कहीं गुंजाइश रह गई है।
कहा जा सकता है कि इस बार रेल मंत्री के पास एक मौका था, लोकलुभावन से हटकर रेल को विकास के पथ पर कदम ताल मिलाने का मौका देने का क्योंकि अगले साल जब बजट पेश किया जाएगा तो उस समय उनके सामने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव मुंह बाए खड़े होंगे और सत्ता पाना उनकी प्राथमिकताओं में सर्वोपरि होगा।
रेलवे जैसे मंत्रालय के लिए ऐसा करने के मुकाबले कहना आसान है। रेलवे को एक नया और उज्जवल भविष्य देने की बनर्जी की अभिलाषा पर संदेह नहीं होना चाहिए। लेकिन हर कोई जानना चाहता है कि क्या वह सच में ऐसा कर पाएंगी? यह बंगाल में मतदाताओं की सोच को भी प्रभावित करेगा।
व्यय के संशोधित अनुमानों और सात महीने पहले जारी किए गए बजट अनुमानों के बीच काफी अंतर होने के कारण पता चलता है कि बनर्जी दीर्घावधि के बारे में अधिक सोच रही हैं। न तो मालभाड़े और न ही यात्री किराये में कोई बदलाव किया गया है। बजट भाषण के कार्रवाई भाग में उन्होंने ज्यादातर ऐसी रेलगाड़ियों को शुरू करने का श्रेय लिया है जिनकी घोषणा पिछले बजट में हो चुकी थी।
वर्ष 2008-09 के दौरान यात्री सेवाओं के मद में होने वाला घाटा 14,000 करोड़ रुपये के भारी स्तर को छू गया था। उस समय वेतन आयोग की सिफारिशों से पड़ने वाला प्रभाव अज्ञात नहीं था। परिचालन अनुपात 2 प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ 94.7 प्रतिशत के निराशाजनक स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में इस बात पर भरोसा करने की कम ही वजह बचती है कि आगामी वर्ष (2010-11) के दौरान 2 प्रतिशत से अधिक का सुधार करने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
भारतीय रेल का क्षमता से अधिक दोहन किया जा रहा है। पूंजी उपयोगिता के अधिकतम स्तर को हासिल करने के लिए संगठन की तारीफ हुई है। नई लाइन, लोकोमोटिव या कोचों को एक पल में नहीं जोड़ा जा सकता है। मौजूदा दशाओं को देखते हुए माल यातायात तेज करने की क्षमता कमजोर पड़ने के लिए बाध्य है। सार्वजनिक-निजी साझेदारी के लिए रेलवे की ओर से किए गए प्रस्ताव की प्रशंसा होनी चाहिए। लेकिन पीपीपी परियोजनाओं में निवेश के लिए रेलवे का हिस्सा कहां से आएगा।
बनर्जी ने कारोबारी मॉडल के लिए एक अलग संरचना का वादा किया है ताकि परिचालन और प्रबंधन बाधित न हो। अगर रेलवे की जमीन या छत पर मालिकाना हक एक परिसंपत्ति है तो रेलवे की जिम्मेदारी है कि उनसे अधिकतम प्रतिफल हासिल किया जाए, न कि उन्हें अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए उपलब्ध करा दिया जाए। लेकिन देखना यह है कि अपनी सारी कवायद के बीच रेल मंत्री अपने विजन 2020 की सीधे-सीधे सुध आखिर लेती कब हैं।
रेल बजट 2010-11: खास बातें
- निजी-सार्वजनिक भागीदारी के तहत 6 नए पेयजल संयंत्र लगाए जाएंगे।
- महिला यात्रियों की सुरक्षा में इजाफा होगा।
- रेलवे सुरक्षा बल में पूर्व सैनिकों की भर्ती की जाएगी।
- कैंसर रोगियों को एसी-3 में मुफ्त यात्रा।
- रेलवे की कॉर्पोरेट-सामाजिक जिम्मेदारी के तहत लाइसेंसधारी कुलियों के लिए बीमा सुविधा।
- लगभग 80,000 महिला कर्मचारियों के बच्चों के लिए शिक्षा सुविधाओं में विकास होगा।
- आइआइटी और रक्षा शोध एवं विकास संगठन संग मिलकर रेलवे शोध केंद्र की स्थापना।
- नीति निर्माण में कर्मचारी संगठनों को शामिल किया जाएगा।
- हाई स्पीड पैसेंजर कॉरिडोर के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल अथॉरिटी का गठन।
- रेलवे-परियोजना में जिस परिवार की जमीन ली जाएगी, उस परिवार के एक सदस्य को रोजगार। जमीन को जबरन कदापि नहीं लिया जाएगा।
- पूर्वोत्तर में विकास के लिए अलग मास्टर प्लान।
- तेज गाड़ियों के लिए डेडीकेटेड पैसेंजर कॉरिडोर।
- मोबाइल ई-टिकटिंग की व्यवस्था होगी।
- रेलवे एंप्लॉइज के लिए विशेष योजनाएं।
- कॉमनवेल्थ गेम्स के मद्देनजर स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी।
- डबल डेकर ट्रेनें चलाई जाएंगी।
- खिलाड़ियों को नौकरी की सुविधाएं उपलब्ध करवाएगी रेलवे।
- दस साल के भीतर सभी रेल कर्मचारियों को आवास की सुविधा का लक्ष्य।
- एसी सर्विस चार्ज 20-40 रु. तक कम होगा।
- 54 नई रेलगाड़ियां नए वित्त वर्ष (2010-2011) में शुरू होंगी।
- 10 नई दुरंतो ट्रेनें चलाई जाएंगी।
- मुंबई में 101 लोकल ट्रेनें चलाई जाएंगी।
'विजन डाक्यूमेंट 2020' की मुख्य बातें
दिसंबर 2009 में संसद में पेश किए गए अपने इस दस्तावेज में ममता ने कुछ महत्वपूर्ण बातों पर खास तौर पर जोर दिया था-
- अगले दस सालों में नेटवर्क विस्तार
- क्षमता का सृजन
- रोजगार के अवसर बढ़ाना
- पर्यावरण पर ध्यान देना
- उच्च विकास दर हासिल करना
- नेटवर्क का विस्तार करना
- बेहतर और प्रभावी प्रशासन के लिए संगठनात्मक सुधार पर भी जोर दिया है
- अत्याधुनिक टेक्नालाजी के इस्तेमाल के जरिए भारतीय रेल को विश्वस्तरीय बनाना
- देश के अग्रणी तकनीकी संस्थानों की मदद लेना
- रेलवे को आगे ले जाने के लिए साहसिक और अभिनव उपाय
- राजस्व बढ़ाने के लिए जहां वह माल-भाड़ा सेवाओं को पुन: ईजाद करना
- रेलवे की पार्सल सेवाओं का एक अलग व्यवस्था के रूप में विकास
- रेलवे को खाली पड़ी भूमि का व्यावसायिक उपयोग
- विज्ञापन के जरिए राजस्व एकत्र करना
- विदेशी निवेश के महत्व नजरअंदाज न करना
- 'एक्सीलेरेटेड रेल डेवेलपमेंट फंड' स्थापित करना
- रेलवे के विकास के लिए निजी भागीदारी को बढ़ावा देना
- रेल कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने पर खास ध्यान देना
