बैगन के बहाने उठे सवाल...
बीटी बैगन की खेती के मसले पर काफी बवाल हुआ. इस मसले पर हितों के जबरदस्त टकराव के बाद सरकार ने फिलहाल इसकी खेती की अनुमति देने के फैसले को टाल दिया है और कहा है कि हम इस पर शोध करेंगे. इस बहस के दौरान कई सवाल उठे. कुछ के जवाब खोजने की बात हुई, कुछ मसले अनसुलझे रहे और कुछ बातें साफ तौर पर ऐसी थी जो पता थी कि कौन क्या कहने वाला है. बैसीलस थुरिनजिएन्सिस (बीटी) नामक बैfक्टरिया के कीटरोधी गुणों से युक्त बैगन की अनुवांशिक रूप से बदली गई (जीएम) प्रजाति को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद हैं. भारत की बड़ी बीज निर्माता कंपनी ने अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी मॉनसेंटो के साथ मिल कर बीटी बैगन को भारतीय बाजार में लाने की योजना बनाई थी. पर्यावरण कार्यकर्ता चूहों पर किए गए प्रयोगों के आधार पर दावा करते हैं कि बीटी शरीर के लिए नुकसानदायक है. भारत में यह पहला मौका नही है जब पर्यावरणविद और मॉनसेंटो आमने-सामने खड़े हुए हैं. कपास के मामले में यह कुश्ती हम देख चुके हैं. बैगन का भुर्ता बन चुका लेकिन इसके आगे भी कई सवाल है जिनके जवाब खोजने की जरूरत है. जैसे भारत खाद्य सुरक्षा मसले को किस तरह सुलझा रहा है?
- हम मसलों को विचारधारा के आधार पर हल करना चाहते हैं या व्यावहारिकता के आधार पर?
- इस मसले पर आप सरकार की भूमिका को किस रूप मे देखते हैं?
- इस मामले पर आपकी क्या राय है?
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