कैसी है यह राजनीति...
आज दुनिया तेजी से सिकुड़ती जा रही है, और देश-प्रदेश की सीमाओं को विकास की राह में बाधा के रूप में नहीं खड़ा नहीं कया जा सकता. विश्व की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में भारत का शुमार हो रहा है, उसे भविष्य की महाशक्ति के तौर पर भी देखा जा रहा है। लेकिन इस सब के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपनी पुरातन सोच से नहीं निकल पाए हैं और आज भी देश को भाषा के नाम पर राजनीति करते हुए देश को बांटने का नजरिया पाले हुए हैं।
बात करें मुंबई में शिव सेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के रवैये की, जो देश की वाणिज्यिक राजधानी को सिर्फ एक ही भाषा या एक ही राज्य के मूल निवासियों के करने में लगी है। भारतीय गणराज्य और उसके संविधान की आत्मा के विरुद्ध कुछ लोग अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं.
मुंबई को लेकर मीडिया में हो रही बयानबाजी विकास के पथ पर बढ़ते भारत या मुंबई के भविष्य के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
- क्या इस तरह के बयानों से मुंबई लोगों के हितों की रक्षा की जा सकती है?
- भाषायी और क्षेत्रीयतावादी आधार पर की जाने वाली इस राजनीति के बारे में आप क्या सोचते हैं?
