सवालों के घेरे में पद्म पुरस्कार...
पद्म पुरस्कारों के बारे में हम यह जानते और मानते हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत का नाम रोशन करने, देश के विकास में उल्लेखनीय योगदान या किसी भी क्षेत्र में देश को विशेष पहचान दिलाने पर प्रदान किए जाते हैं. ये पुरस्कार पाने वाले नागरिक जीवन में श्रेष्ठ आचरण और अपने काम में श्रेष्ठता प्रदर्शित करने की मिसाल माने जाते हैं. संक्षेप में, पद्म पुरस्कार प्राप्त विभूतियों को भारतीय नागरिक आदर्श मानते हैं. लेकिन पहले की तरह इस बार भी कुछ पद्म पुरस्कार संदेह के दायरे में हैं और देश के विभिन्न विचार समूह इन्हें कुछ लोगों को दिए जाने के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं.
इस बार नागरिक सम्मान पद्मश्री जब फिल्म अभिनेता सैफ अली खान को दिया गया तो काफी जगह से विरोध के स्वर मुखर होने लगे। हर बार की तरह इस बार भी इस पुरस्कार को दिए जाने की प्रासंगिकता पर फिर से प्रश्न उठाए गए और सैफ को इस पुरस्कार से नवाजे जाने के कारण भी पूछे गए।
इसी तरह प्रवासी भारतीय संत चटवाल को पुरस्कार दिया जाने पर हो-हल्ला हुआ। लेकिन सरकार ने यह कहकर इस विवाद को शांत करने की कोशिश की संत चटवाल के खिलाफ चल रह मामले बंद होने के बाद ही उन्हें यह पुरस्कार दिए जाने का फैसला लिया गया। सरकार ने यह भी कहा कि चटवाल हमेशा भारत और अमेरिका के बीच बेहतर संबंधों के लिए प्रयासरत रहे हैं.
क्या हम यह कह सकते हैं कि ये पुरस्कार अपनी उस आत्मा को खो बैठे हैं जिनके मद्देनजर इन्हें शुरू किया गया था? पुरस्कारों को जिस सोच के साथ शुरू किया गया था, आज यह उस सोच के विपरीत कहीं कुछ लोगों को तुष्ट करने का माध्यम तो नहीं बन गए हैं?
- इन पुरस्कारों को लेकर आपका क्या सोचना है?
- क्या आपको नहीं लगता कभी राष्ट्र का गौरव समझने वाले यह पुरस्कार आज बंदरबांट बनकर रह गए हैं?
