हाथों में काम की बजाए कटोरा...
दिल्ली के हर किसी ट्रैफिक सिग्नल पर यह रोज के नजारे हैं। बस या कार लाल बत्ती पर रुकती है तभी खिड़की के शीशे पर दस्तक होती है। कोई अपाहिज, दीन-हीन बुजुर्ग महिला या कोई फटेहाल बच्चा हाथ फैलाता नजर आ जाता है। बात चाहे दिल्ली गेट चौक, राजघाट, कड़कड़ी मोड़ या किसी भी व्यस्त चौराहे की क्यों न हो, वहां भिखारियों के हुजूम अक्सर दिखाई देते हैं. अगर सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो देश की राजधानी में 60,000 भिखारी सक्रिय हैं और इनमें से 90 फीसदी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, राजस्थान और बिहार सरीखे अन्य राज्यों से यहां आए हुए हैं।
सरकार कॉमनवेल्थ गेम्स-2010 से पहले इन्हें दिल्ली की सड़कों से हटाने में जुटी है और कानून का सहारा लेकर इन पर काबू करने की कोशिश कर रही है। दिल्ली सरकार ने इनसे निपटने के लिए मोबाइल कोर्ट का भी प्रावधान किया है लेकिन सुधार बहुत ज्यादा नहीं कहा जा सकता। देखा जाए तो भीख निरोधक कानून-1959 के तहत भीख मांगना कानूनी अपराध है। लेकिन रोजाना इस कानून का उल्लंघन होता देखा जा सकता है।
कई एजेंसियों के सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि भीख मांगने वाले इन लोगों में कई तो पढ़े-लिखे युवा भी हैं, जो कि रोजाना कम से कम 100 रु. तो कमा ही रहे हैं। अगस्त माह में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा था कि वह देश की राजधानी में भिखारियों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए कारगर कदम उठाए। कोर्ट ने इसके लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार से बात करके कोई हल निकालने के लिए भी कहा था। लेकिन इस दिशा में बहुत ठोस कुछ होता नजर नहीं आया।
बेशक सरकार अब विश्व के सबसे पुरानी सामाजिक बुराइयों मे एक से लड़ने के लिए मुस्तैदी दिखा रही हो, लेकिन अब भी सड़क किनारे भिखारियों की संख्या मे कोई कमी नजर नहीं दिखती। बल्कि समय के साथ यह और संगठित और फैलता हुआ एक व्यवसाय नजर आने लगा है। कुछ लोग धर्म के बहाने आम लोगों की जेब ढीली करने के प्रयासों में जुटे हैं।
पूरे माहौल को देखकर क्या आपको लगता है कि भीख मांगना आजीविका का एक साधन हो सकता है? क्या भीख मांगने की प्रवृत्ति समाज में अकर्मण्यता से उपजा अपराध है? क्या मानवता के नाते भिखारियों के प्रति समाज का कोई उत्तरदायित्व है? क्या सरकार भिखारियों के लिए कुछ कर सकती है, जैसे उन्हें उनकी शारिरिक क्षमता के अनुरूप कोई काम देने की योजना लागू कर सकती है?. आपकी नजर में इस समस्या से निपटने के क्या उपाय हो सकते हैं?
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