स्कूल चयन राष्ट्रीय सम्मेलन - बेहतर शिक्षा के लिए नीतिगत उपाय
तारीख: 16 दिसम्बर 2009
समय: 9:00 बजे सुबह से 8:00 बजे शाम तक
स्थान: इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली
स्कूल चयन राष्ट्रीय सम्मेलन के विचार का जन्म देश में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नित नए बदलावों से हुआ है। हाल ही में भारतीय संसद ने शिक्षा के अधिकार (आरटीई) का कानून पारित किया जोकि कई तरह की उम्मीदें लिए हुए है, लेकिन कई तरह की चुनौतियां भी हमारे सामने पेश करता है। सम्मेलन का मुख्य फोकस शिक्षा के अधिकार के मुख्य प्रावधानों के क्रियान्वयन और भारत की प्रारंभिक शिक्षा के भविष्य पर इनके संभावित प्रभावों पर रहेगा। सम्मेलन को तीन सत्रों में विभाजित किया गया है, जिसके मुख्य बिंदु, 25 फीसदी सरकार प्रायोजित सीटें, स्कूलों के पंजीकरण/मान्यता देने की पद्धति और सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार हैं।
निजी स्कूल और गरीबः आरटीई की धारा 12
शिक्षा के अधिकार कानून की धारा 12 – कमजोर तबके और गैर लाभान्वित समूहों के बच्चों के लिए सरकारी-सहायता प्राप्त, निजी गैर सहायता प्राप्त और विशेष स्कूलों में सीटों में 25 फीसदी का आरक्षण – सामाजिक समावेश संबंधी सरकारी दृष्टकोण के ही संकेत देती है। निजी स्कूलों में कमजोर तबके के बच्चों को अध्ययन का मौका दिलाकर समाज के इस तबके को शैक्षणिक समानता के अगुआ के तौर पर खड़ा किया जाएगा। सम्मेलन के पहले सत्र में धारा 12 के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। इस सत्र के प्रवक्ता इस प्रावधान के श्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए अपने विचार पेश करेंगे। भारत और दुनिया के अन्य कोनों में चल रही इसी तरह की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
मान्यता देने की व्यवस्थाः सकारात्मक नियमन
शिक्षा के अधिकार कानून की धारा 19 के तहत दिए गए प्रावधान उन स्कूलों पर कड़ा जुर्माना लगाते हैं जो तीन साल के भीतर मान्यता हासिल नहीं कर पाते हैं। शहरी क्षेत्रों में ऐसे स्कूलों की संख्या में इजाफा हो रहा है जिन्हें बहुत कम संसाधन वाले लोग पास-पड़ोस में ही चलाते हैं, और इनमें बहुत ही कमजोर तबके के बच्चे शिक्षा हासिल करते हैं। ये निजी बजट (सस्ते) स्कूल जो बहुत ही मामूली फीस (लगभग 400 रु. प्रतिमाह) के साथ आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। झुग्गी-बस्तियों के गरीब अभिभावकों में इस तरह के स्कूलों की लोकप्रियता में इजाफा हो रहा है जिससे समाज के कमजोर तबके में इसकी स्वीकार्यता और विश्वनीयता की पुष्टि भी होती है। हालांकि, ये मान्यता हासिल करने के मानदंडों को पूरा नहीं कर पाते हैं, जैसे खेल का बड़ा मैदान, भूमि संबंधी जरूरतें, अध्यापकों के लिए न्यूनतम योग्यता या वेतन की तय शर्तें। जिसके चलते कई निजी बजट स्कूल गैर मान्यताप्राप्त हैं। शहरों के आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में इनकी लोकप्रियता के चलते, इनके बंद होने से कई बच्चे गुणवत्तापरक शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। इस सत्र में नवीन उपायों को तलाशा जाएगा, जैसे- इन स्कूलों को सकारात्मक नियमन के जरिये कानून के अधिकार क्षेत्र में लाया जाए।
स्वायत्तताः सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाना
शिक्षा के अधिकार कानून की धारा 21 और 22 स्कूल प्रबंधन समितियों के गठन को अनिवार्य बना देती हैं जिसमें अभिभावक, अध्यापक और सरकारी प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए। स्कूल प्रबंधन समिति के कार्यों में स्कूल विकास योजना तैयार करना और स्कूल को मिलने वाले अनुदानों के सही प्रयोग की निगरानी करना भी शामिल है। इसलिए स्कूल प्रबंधन समिति के गठन का उद्देश्य स्कूल से जुड़ी गतिविधियों में स्थानीय समुदाय को भी शामिल करना है, इसी तरह के प्रयास गांव शिक्षा समिति के जरिये भी किए गए हैं, जिन्हें बेशक मामूली ही सही लेकिन सफलता मिली है। यह जरूरी है कि हम इस बात का आंकलन करें कि किस प्रकार स्कूल प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाकर देश भर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में उनकी सहभागिता तय की जा सकती है। इस सत्र में जिम्मेदारियों के विकेंद्रीकरण, स्थानीय साझेदारी में इजाफा और अधिक स्वायत्तता के जरिये सरकारी स्कूलों को और अधिक मजबूत बनाने के प्रारूपों (मॉडल) पर विचार किया जाएगा।
स्टुडेंट फर्स्ट! डायलॉग सीरीज़
गुणवत्तापरक शिक्षा पर स्टुडेंट फर्स्ट! डायलॉग सीरीज़ एक मासिक पब्लिक सेमिनार है जोकि उन मुद्दों पर बहस और चर्चा के लिए मंच उपलब्ध कराता है, जिनका सामना स्कूली शिक्षा को करना पड़ रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर के साथ साझेदारी में स्कूल चयन अभियान का यह छठा डायलॉग (संवाद) है। पिछले डायलॉग में नीति अनुसंधानकर्ताओं, नीति निर्माताओं, प्रैक्टिशनर, अभिभावकों, दबाव समूहों और बच्चों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। दिसबंर 2009 की डायलॉग सीरीज़ 2010 में भारत के शिक्षा क्षेत्र के सामने चुनौतियों को लेकर राष्ट्र की तैयारियों का आंकलन करेगी। यह विषय अपने क्षेत्र के दिग्गजों, विशेषज्ञों और विचारकों को एक साथ लाएगा और इसके जरिये कारगर और एक बेहतरीन संवाद को अंजाम दिया जा सकेगा।
अधिक जानकारी के लिये यहाँ क्लिक करें।
