मैं पैंसिल! मेरा परिवार वृक्ष!!

मैं लैड पेंसिल हूँ- साधारण लकडी की पैंसिल, जिसे सभी पढ़ने-लिखने वाले लड़के, लड़कियॉ और बड़े जानते हैं।

लिखना मेरी प्रवृत्ति और पेशा दोनों है। कुल मिला कर मै यहीं करती हूं।

आप हैरान हो सकते है कि मै अपनी वंशावली क्यों लिख रही हूं। अच्छा! आरंभ से ही, मेरी कहानी बड़ी रोचक है। और दूसरा, मै एक रहस्य हूं- वृक्ष से कहीं ज्यादा, सूर्यास्त से अधिक और यहां तक की बिजली की चमक से भी कहीं ज्यादा। लेकिन, दुखद यह है कि जो लोग मुझे इस्तेमाल करते हैं वे मुझे ऐसा समझ लेते है जैसे मै सिर्फ एक घटना हूं या ऐसे कि मेरी कोई पृष्ठभूमि नहीं हो। उनकी यह उपेक्षित मनोवृत्ति मेरे महत्व को घटा कर मुझे बहुत ही साधारण बना देती है। इस तरह की भूलें बहुत ही गंभीर हैं इस तरह मानव जाति ज्यादा समय तक बगैर संकट के आगे नही बढ़ सकती। बुद्धिजीवी जी.के.केस्टेरटोन की टिप्पणी है हम लोग बर्बाद हो रहे हैं करिश्मे की चाहत में, न की करिश्माओं की चाह में'।

मै, पैंसिल, यद्यपि साधारण दिखती हूं, लेकिन आपको हैरत में डालने और अपने प्रति आपका सम्मान बढ़ाने के लिए मै एक दावा को सही सिद्ध करने की कोशिश कर रही हूं। वस्तुत: यदि आप न्यून को समझ सकते हैं, वह किसी के बारे मे कहने के लिए बहुत ज्यादा है- यदि आप मेरी चमत्कारिकता से परिचित हो जाएगें जिसकी मै प्रतीक हूं, आप स्वतंत्रता की रक्षा करने में सहायता कर सकते हैं। जिसे मानव जाति बहुत ही दुख के साथ खोती जा रही है। मेरे पास आप सबको सिखाने के लिए बहुत ही गहरा सबक है। और यह सबक एक ऑटोमोबाइल या एक विमान और एक बर्तन धोने की यांत्रिक मशीन से ज्यादा अच्छे से सिखा सकती हूं- अच्छा, क्योंकि मैं देखने में इतनी साधारण हूं!

साधारण ! यद्यपि इस पृथ्वी पर रहने वाला एक व्यक्ति भी नहीं जानता कि मुझे कैसे बनाया जाता है। ये बहुत अजीब मालूम पडता है, नही? विशेषकर तब जब यह पता चलता है कि अमेरिका में प्रतिवर्ष मेरे दस से पंद्रह खरब प्रकार उत्पादित होते हैं।
मुझे उठाएं और अच्छी तरह से देखें। आप क्या देखते है? आंखों को ज्यादा कुछ नहीं मिलता। मुझमें कुछ लकड़ी, लैकर पेड़ का तरल पदार्थ, ग्रेफाइट लैड, थोड़ी धातु और छपाई और रबड़ के टुकडे हैं।

अनगिनत पूर्ववर्तियां

जैसे आप के लिए अपने वंशबेल को पीछे बहुत दूर तक खोज निकालना मुश्किल है, उसी तरह मेरे लिए भी अपने सभी पूर्ववर्तियों के नाम और उनकी व्याख्या असंभव है। लेकिन मैं उनमें से अधिकतर के बारे में बताऊँगी ताकि आप मेरी पृष्ठभूमि की समृद्धि और जटिलता से प्रभावित हो सकें।

मेरी वंशबेल वास्तव में एक वृक्ष से ही आरंभ होती है, उस देवदार वृक्ष से जो ऊत्तरी कैलीफोर्निया और ऑरेगन मे होता है। अब विचार करें सभी आरों और ट्रकों, रस्सों और उन अनगिनत औजारों कि जो देवदार की उपज और उसकी कुन्दों की रेलवे पटरियों के किनारे तक ढुलाई में इस्तेमाल होते हैं। उन सभी लोगों और अनगिनत कौशलों की जो इसके निर्माण में इस्तेमाल होते हैं। कच्ची धातुओं की खुदाई, स्टील का निर्माण, कुल्हाड़ी, आरे और मशीन के रूप में इसको परिष्कृत करना; सन को उपजाना और इसे भारी और मजबूत रस्से के रूप में बनाने की पूरी प्रक्रिया, बिस्तर और खाने के कमरे के साथ निवास स्थान का प्रबंध, पकाने के बर्तन और खाने को एकत्र करना। क्यों, अनकहे हजारों लोगों का प्रत्येक कॉफी के उस कप में हाथ होता है जिसे लोग पीते हैं।

लकडी के लठ्ठे को कैलिर्फोनिया के सैनलिन्ड्रो के कारखाने में जहाजों द्वारा पहुँचाया जाता है। क्या आप उन व्यक्तियों की कल्पना कर सकते हैं जो मालगाड़ी के डिब्बे और रेल एंव रेलवे इंजन का निर्माण करते हैं, पूरी संचार व्यवस्था को स्थापित करने वाले भी इससे जुडे़ रहते हैं। ये सभी मेरे पूर्ववर्तियों में आते है।

सैनलिडरो के कारखाने के कामों पर विचार करें। लकडी के लठ्ठों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। मेरी लंबाई की लम्बी पट्टी जो चौथाई इंच से कम मोटी होती है, इन्हें भट्टों मे सुखाया जाता है, और फिर इन्हें सुंदर बनाने के लिए हल्के रंगों से रंगा जाता हैं, बिल्कुल उसी तरह जैसे महिलाएं अपने चेहरे कि सज्जा करती हैं। लोग चाहते है कि मै सुन्दर दिखूँ ना कि विवर्ण सफेद। पट्टी को चिकना कर दोबारा भट्टी में सुखाया जाता है। रोगन एंव लट्ठे बनाने के लिए ऊर्जा, बिजली एवं प्रकाश की आपूर्ति, मशीन, बैल्ट एवं कारखाने की अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए कितने कौशलों की आवष्यकता हुई? कारखाने में झाडू लगाने वाले मेरे पूर्ववर्तियों में से हैं? बिलकुल एवं इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने कारखाने में बिजली आपूर्ति करने वाले पैसिफिक गैस एवं इलैक्ट्रिक कंपनी के डैम के लिए कंकरीट एकत्र किया।

उन वर्तमान एवं दूरवर्ती पूर्ववर्तियों की अनदेखी मत कीजिए जिनका देश भर में मेरी लकड़ी की पट्टियों को ढो कर पहुँचाने में हाथ है।

पेंसिल फैक्ट्री के र्निमाण एवं मशीनरी में एक बार 40 लाख डालर खर्च होते हैं। इस पूँजी का संचय मेरे मितव्ययी और बचत करने वाले माता पिता द्वारा किया जाता है- प्रत्येक पट्टी को एक जटिल मशीन से आठ नालियों वाला बनाया जाता है और इस पर सरेस लगाया जाता है फिर उसके ऊपर दूसरी पट्टी लगाई जाती है, इसे लैड सैंडविच कहा जाता है। सात भाइयों एवं मुझे इस लकड़ी के तैयार सैंडविच से मशान से तराश कर काटा जाता है। मेरा लैड़ अपने आप में काफी जटिल होता हैं। और कोई और लैड़ इसमें नहीं मिलाया जाता।
ग्रेफाइट की खुदाई शिलॉन में होती है। उन खान मजदूरों और उनके द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले उपकरणों, ग्रेफाइट को जहाज में ले जाने वाले पेपरों को बनाने वाले एवं जो रस्सी बनाते है जिससे पेपरों को बांधा जाता है और उन जहाजों को बनाने वालों के बारे में सोचिए और उनके बारे में जो उसे जहाज में चढाते है। यहॉ तक की बिजली घरों में काम करने वाले मेरे जन्म में पूरे समय सहयोग देते हैं और बन्दरगाह पायलट भी।

ग्रेफाइट को मिसीसिपी की चिकनी मिट्टी में मिश्रित किया जाता है। जिसमें परिष्कृत करने की प्रक्रिया में अमोनियम हाइड्रोआक्साइड का इस्तेमाल होता है। इसके बाद इसमें जिन रसायनों का इस्तेमाल होता है वे पशुओं की चर्बी को सल्फयूरिक एसिड के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप प्राप्त किए गए होते हैं।

कई मशीनी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद अन्तत: मिश्रण ऐसा दिखता है जैसे सॉसेज ग्राइंडर से निकला हो।  इसे आकार में काटा, सुखाया और कई घटों के लिए 1850 डिग्री फारैनहाइट पर पकाया जाता है। लैड को चिकना और मजबूत बनाने के लिए इसके साथ एक खास मिश्रण का इस्तेमाल होता है जिसमें मैक्सिको का मोम, पैराफीन वैक्स, और हाइड्रोनेटेड प्राकृतिक वसा शामिल होते हैं।

इन सबके बाद इस पर 6 तह मोटी वार्निश लगाई जाती है। आपको पता है इसमें कौन-कौन से तत्व शामिल होते है? कौन सोचेगा कि अरंडी के बीज उगाने वाले, और अरंडी के तेल परिषोधन में लगे लोग इसका हिस्सा हैं? यहाँ तक कि वार्निश को सुन्दर पीला बनाने की प्रक्रिया में एक से ज्यादा लोगों का कौशल शामिल होता है।

अब इस पर छपाई को देखें। वह एक फिल्म होती है जिसे काला र्काबन को राल के साथ मिश्रित कर गर्म कर के तैयार की जाती है। अब राल कैसे बनाते हैं और काला कार्बन कैसे बनता है? मेरे सामी की सभी धातुंए पीतल की होती है। उन सबके बारे में सोचिए जो जस्तों और तांबों को खान से निकालते हैं। साथ ही उनके कौशल के बारे में जो इन प्राकृतिक उत्पादों से ताँबें का चमकीला चादर तैयार करते है।

मेरी सामी के उपर जो काले छल्ले होते है वह काला निकेल होता है। काला निकेल क्या है और यह कैसे लगाया जाता है? मेरी सामी के केन्द्र में निकेल क्यों नही होता है, इसकी पूरी कहानी की व्याख्या में कई पन्ने लग जाएंगें ।

अब मेरे मुकुट की महिमा, व्यापार की भाषा में यह  डाटा' के रूप में इस्तेमाल होता हैं, वह हिस्सा जिसका इस्तेमाल व्यक्ति अपनी गलातियों को मिटाने के लिए करता है। एक तत्व जिसे 'फैक्टीस' कहा जाता है, मिटाने का काम करता है। एक रबड़ जैसा उत्पाद होता है जो ईस्ट इंडीज से प्राप्त टोरिया के तेल को सल्फर क्लोराइड के साथ प्रतिक्रिया कराकर बनाया जाता है। आम धारणा के प्रतिकूल रबड़ का उद्देश्य सिर्फ बांधने का होता है। फिर इसके टिकाऊपन और इसकी गति बढाने में ढेरो एजेंट का इस्तेमाल होता है। इटली से कूरून पत्थर आता हैं; रोगन जो 'डाट' को इसका रंग देता है वो कैडमियम सल्फाइड होता है।

कोई नहीं जानता

कोई भी मेरे पहले की इस धारणा को चुनौती नहीं देना चाहेगा कि इस पृथ्वी पर कोई नहीं जानता कि मुझे कैसे बनाया जाता है।

वास्तव में, मेरी उत्पति में लाखों लोगों का हाथ होता है, यहां तक कि उनमें से भी कोई दूसरे बहुतों को नहीं जानता। अब आप कह सकते हैं कि दूर ब्राजील में सरस फल चुनने वाले और कहीं और अनाज का उत्पादन करने वालों के साथ मै अपनी उत्पति में बहुत दूर तक जा कर 'संबंध स्थापित करती हूं, कि यह आत्यंतिक स्थिति है। लेकिन मुझे अपने दावे पर ड़टे रहना चाहिए। पेंसिल कंपनी के अघ्यक्ष सहित इन लाखों लोगों में कोई एक अकेला वयक्ति नही है जो मेरी उत्पति में बहुत छोटे सहयोग से ज्यादा कुछ देता है। अपनी विशेषज्ञता का बहुत ही छोटा हिस्सा। विशेषज्ञता की दृष्टि से शिलॉन में ग्रेफाइट के खान मजदूर और ऑरेगन के लठ्ठे ढोने वालों के बीच अन्तर उनकी विशेषज्ञता के प्रकार में हैं। न ही खान मजदूर, ना ही लठ्ठे ढोने वाले मजदूर को इससे अलग किया जा सकता है, इनसे कुछ ज्यादा, फैक्ट्री में काम करने वाले केमिस्ट या मिट्टी के तेल क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर पैट्रोलियम के आनुषंगिक हो सकते है?

यहॉ एक विस्मयकारी तथ्य यह है कि न तो तेल क्षेत्र का मजदूर न ही केमिस्ट, न तो चिकनी मिट्टी या ग्रेफाइट खान मजदूर, न ही जहाज, न ही ट्र्क बनाने वाला, न ही मुझमे इस्तेमाल होने वाले धातुओं के लिए मशीन चलाने वाला व्यक्ति, न ही कंपनी का अघ्यक्ष अपना कोई एक भी कार्य इसलिए करता है क्योंकि वह मुझे चाहता है। प्रत्येक शायद मुझे पहली कक्षा में चाहने वाले बच्चों से भी कम चाहता है। वास्तव में इस बड़ी संख्या में से कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने न पहले कभी पैंसिल देखी है, न ही यह जानते हैं कि इसका इस्तेमाल कैसे होता है। उनकी प्रेरणा मेरे बजाय कुछ और है । ये लाखों लोग यह देखते है कि वे अपनी छोटी विशे्षज्ञता के बदले अपनी जरूरत के सामान और सेवाओं को प्राप्त कर सकते हैं। मै इन समानों की सूची में नही भी हो सकती हूं।

कोई नियंता नही

अब भी एक विस्मसकारी तथ्य है। यहां कोई योजनाकार नहीं है। कोई किसी को आदेश नहीं दे रहा, न ही इन अनगिनत कार्यो के लिए बलपूर्वक कोई निर्देश जारी किया जा रहा हैं, जिसके परिणामस्वरूप मेरा अस्तित्व है। इस तरह का कोई व्यक्ति खोजा नहीं जा सकता। इसके बावजूद मेरे लिए होने वाले कार्यो में कई अदृश्य हाथ हैं। यही वह रहस्य है जिसकी मैने पहले चर्चा की थी।

यह कहा जाता हे कि 'सिर्फ ईश्वर ही वृक्ष बना सकता है'। हम इससे सहमत क्यों होते हैं? ऐसा नहीं है क्योंकि हमलोग ऐसा महसूस करते हैं कि हम लोग इसे नहीं बना सकते? वास्तव में क्या हम वृक्ष का वर्णन भी कर सकते हैं? हम नहीं कर सकते, सिर्फ सतही रूप में छोडकर। हम कह सकते हैं, उदाहरण के लिए, कुछ निर्धारित आणविक व्यवस्था वृक्ष के रूप में दिखाई देती है। लेकिन व्यक्ति के दिमाग का कौन सा हिस्सा काम करता है जो अणुओं को लगातार होने वाले परिर्वतनों को रिकार्ड तक कर सकता है, ,साथ ही अकेला र्निर्देषित भी कर सकता है। इस तरह का करिश्मा पूरी तरह सोच से परे है।

मै पैसिल चमत्कारों का जटिल सम्मिश्रण हूं। जस्ता, तांबा, ग्रेफाइट इत्यादि। लेकिन इन चमत्कारों में प्रकृति में जो दिखाई देती है, उसके साथ कुछ असाधारण चमत्कार भी शामिल होते हैं: कौशलपूर्ण मानव ऊर्जा का संयोग: लाखों छोटी- छोटी विशेषज्ञताओं का स्वभाविक एवं सहज रूप से व्यक्ति की जरूरतों और इच्छाओं के अनरूप व्यवस्थित होना और तब जब कोई भी व्यक्ति इसका नियंता नहीं। जब यह कहा जाता है कि केवल ईश्वर ही वृक्ष बना सकता है, मै जोर डालता हूं कि र्सिफ भगवान मुझे बना सकता है। मेरे अस्तित्व के लिए व्यक्ति अब और ज्यादा लाखों छोटी- छोटी विशेषज्ञताओं को निर्देशित नहीं कर सकता, वह वृक्षों को बनाने के लिए सिर्फ अणुओं को एक साथ ला सकता है।

उपर मैने जो कुछ भी लिखा है उससे मेरा तात्पर्य है, ' यदि आप इन चमत्कारो से अवगत हों जाएगें जिसका मैने प्रतीकात्मक रूप में इस्तेमाल किया तो आप उस स्वतंत्रता को बचाने में सहायता कर सकते है जिसे व्यक्ति बहुत निराशा से खोता जा रहा है। जो व्यक्ति जागरूक है, उसके लिए: ये विशेषताएं स्वाभाविक, हां स्वाचालित तरीके से व्यक्ति की जरूरतो और मॉगों के प्रतिक्रियास्वरूप स्वयं अपने अपने आप व्यवस्थित हो जाती है-: वह है सरकारी या किसी अन्य बाधित नियंताओं की अनुपस्थिति में व्यक्ति स्वतंत्रता के असीम अवयव को प्राप्त कर सकता है: स्वतंत्र लोगो में एक विश्वास । इस विश्वास के बैगर स्वतंत्रता असंभव है।

एक बार रचनात्मक गतिविधियों पर सरकार का अधिपत्य हो जाए, उदाहरणार्थ; चिठियों के वितरण पर, अधिकतर व्यक्ति यह विश्वास करने लगना कि पत्रों का वितरण उन लोगों द्वारा प्रभावित ढंग से नहीं हो सकता जो स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं। और इसका कारण है: प्रत्येक व्यक्ति यह स्वीकार करता है कि वह स्वंय यह नहीं जानता कि पत्रों के वितरण के लिए सब कुछ कैसे करते हैं। वह यह मानता है कि कोई दूसरा व्यक्ति भी इसे नहीं कर सकता। यह धारणा सही है। किसी व्यक्ति को पत्र- वितरण के बारे में पर्याप्त विशेषज्ञता नहीं होती उसी तरह जैसे पैंसिल के निर्माण के बारे में नहीं जानते। अब, स्वतंत्र लोगों के विश्वास के अभाव में- इस अज्ञानता के कारण कि लाखों विशेषज्ञता स्वाभाविक और चमत्कारिक तरीके से मिलकर जरूरतों को पूरी करने में सहयोग करती हैं: व्यक्ति सहायता नही कर सकता बल्कि इस गलत निष्कर्ष पर पहुँचता है कि पत्रों का बंटवारा र्सिफ सरकारी 'नियंताओ' द्वारा ही हो सकता है।

ढेरों प्रमाण

यदि मै, पैंसिल अकेली ऐसी वस्तु हूं जो साक्ष्य दे सकती है कि इस बात पर कि पुरूष और महिलाएं यदि प्रयास करने के लिए स्वतंत्र हो तो क्या निष्पादित कर सकते हैं, तो थोड़ा भी विश्वास करने वालों के लिए पर्याप्त कारण है। हांलाकि ढेरों प्रमाण हैं: यह सब कुछ हमारे बारे में और प्रत्येक हाथ में है। पत्रों के वितरण का उदाहरण बहुत साधरण है। इसकी तुलना उदाहरण के लिए ऑटोमोबाइल, या हिसाब लगाने वाले इलेक्टॉनिक यंत्र, अनाज काटने और बर्तन साफ करने वाली मशीन, कपड़ा मिल या अन्य सैकडों हजारों चीजों से की जा सकती है। वितरण... प्रसारण? क्यों इन क्षेत्रों में जहॉ मनुष्य प्रयास करने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया गया, मनुष्य की आवाज एक सैंकेंड से कम में पूरे विश्व में पहुचाते हैं, वे किसी दृष्य घटना को घटित होने के समय ही व्यक्ति के घरों तक पूरी गति से पहुंचाते हैं। वे 150 सवारियों को सियेटल से बाल्टीमार तक चार घण्टें से कम मे पहुंचा देते हैं, वे गैस भी टैक्सास से जहॉ जरूरत है वहां तक या न्यूयार्क में अविश्वसनीय रूप से कम कीमत और बगैर सब्सिडी के वितरित करते हैं: वे प्रत्येक चार पाउड तेल फारस की खाड़ी से हमारी पूर्वी समूद्री बोर्ड तक जो पूरे विश्व की पहुंच मे है पहुंचाते हैं और यह सरकार द्वारा एक औंस के पत्र गलियों एंव सडकों में वितरित करने के लिए ली जाने वाली कीमत से कम होती है।

जो सबक मुझे देना है वह है: सभी सृजात्मक ऊर्जाओं को स्वतंत्र छोड दिया जाए । इस सबक के साथ समाज को र्सिफ शांतिपूर्वक काम करने के लिए संगठित किया जाए। समाज की कानून-व्यवस्था सारी बाधाएं हटाने के लिए, जितना बेहतर काम कर सकती है, करने दिया जाए। इन सृजनात्मक विशेषताओं का स्वत्रतांपूर्वक प्रवाह होने दें। विश्वास रखें कि स्वतंत्र पुरुष और महिलाएं उस अदृश्य कमान के लिए अपनी प्रतिक्रिया देगें।

यह विश्वास अनुमोदित होगा। मैं, पैंसिल दिखने में साधारण यद्यपि, मै अपनी उत्पति के चमत्कार को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करती हूँ कि यह एक व्यावहारिक यथार्थ है, उतना ही जितना यथार्थ सूर्य है, वर्षा है, देवदार वृक्ष है और अच्छी पृथ्वी है।

लेखक के बारे में
लियानोर्डो इ रीड (1898-1983) फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक एजुकेशन की स्थापना , 1946 में न्यूयार्क में की और जीवनपर्यंत इसके अध्यक्ष बने रहे। आई, पैंसिल उनका प्रसिद्ध लेख है और द फ्रीमैन में यह पहली बार दिसंबर 1958 में प्रकाशित हुआ।

लेखक: 
लियानोर्डो इ रीड
प्रकाशित: 
द फ्रीमैन - दिसंबर 1958
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