निजी संपत्ति अधिकारों की सामाजिक भूमिका

निजी संपत्ति अधिकार एक व्यक्ति का वो अधिकार है जिससे वह जैसे भी चाहे अपनी संपत्ति का इस्तेमाल कर सकता है, बशर्ते वह दूसरे व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी या बल का प्रयोग न करे। संपत्ति अधिकार के महत्व पर जोर देने वाले पहले अर्थशास्त्री आस्ट्रिया के कार्ल मैगर थे। 1971 में एक लेख में मैगर ने यह कहा कि अधिकतर सामान की उपलब्ध मात्रा प्रत्येक व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। संभावित रूप से एक उपभोक्ता की रुचि दूसरे प्रत्येक उपभोक्ता से अपर्याप्त सामानों को प्राप्त करने के लिए किए जाने वाले संघर्ष में भिन्न होती है:

रूचि में इस भिन्नता के साथ समाज के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि इन संबंधों के कारण सभी संभावित बल प्रयोग के कृत्यों के मद्देनजर सामानों की प्राप्ति में विभिन्न व्यक्तियों की रक्षा करे। इस तरीके से हम अपनी वर्तमान विधिक व्यवस्था के आर्थिक उदगम पर पहुंचते है, और विशेषकर स्वामित्व के कथित संरक्षण के आर्थिक उदगम पर, और विशेषकर स्वामित्व के कथित संरक्षण पर, जो संपत्ति का आधार है... संपत्ति की, इसलिए मानव अर्थशास्त्र के जैसा, यह स्वेच्छाचारी खोज नही बल्कि समस्या का सिर्फ व्यावहारिक संभावित समाधान है, यह वस्तुओं की प्रकृति में, जो आर्थिक सामानों की उपलब्ध मात्रा और जरूरतों की भिन्नता के आधार पर हम पर थोपा हुआ है।

तब निजी संपत्ति अधिकार एक सामाजिक संस्था है जो स्वतंत्र लोगों के समाज में शांति एंव अनुरूपता लाने के लिए काम करती है। वस्तुत: ये स्वतंत्र समाज की एक मुख्य नींव है। व्यक्ति को अपनी संपत्ति के इस्तेमाल की स्वतंत्रता के बगैर कोई व्यतिगत या राजनैतिक स्वतंत्रता संभव नहीं है। एक तरह की स्वतंत्रता सीमित करने से सभी स्वतंत्रता सीमित हो जाती हैं। लेकिन निजी संपत्ति अधिकार इससे कहीं ज्यादा है। 19वीं सदी के शुरू से लेकर मध्य तक एक अमेरिकी की आय विश्व में सबसे ज्यादा और सबसे तेजी से बढ़ रही थी। उनके इस बढ़ते हुए जीवन स्तर का मुख्य कारण उनका सुरक्षित निजी अधिकार था।

बार-बार यह सुझाव दिया जाता रहा है कि अमेरिकियों के इस तीव्र विकास का कारण उनके संपत्ति अधिकार नही बल्कि यह तथ्य है कि वह अन्य देशों की अपेक्षा तकनीकी रूप से ज्यादा विकसित हैं। लेकिन तकनीकी ज्ञान विभिन्न देशों के बीच आसानी से संचारित होते हैं।

उदाहरण के लिए बडे़ पैमाने पर कपड़ा उत्पादन के तकनीकी ज्ञान के प्रसार को रोकने में ब्रिटेन असफल रहा। 1789 में एक मैकेनिक सैमुएल स्लेटर इस तरह का तकनीकी ज्ञान अर्जित करने के बाद अमेरिका आकर बस गया । उसने ब्रिटेन की कई पद्धतियों का इस्तेमाल कर मोसेस ब्राउन और विलियम अल्वी की पूंजी से कपड़ों का उत्पादन आरंभ किया। 1810 में बोस्टन के एक व्यापारी फ्रांसिस लॉवेल ने ब्रिटेन की अपनी यात्रा के दौरान वहां के कपडे़ की मशीन को घ्यान से देखा। उसने मशीन के डिजाइन को याद कर लिया और अमेरिका लौटने पर मैकेनिक पॉल मूडी से यह मशीन बनवाई। मूडी ने इस डिजाइन को और परिष्कृत किया। 1813 में स्थापित यह बोस्टन मैनुफैक्चरिंग कंपनी अमेरिका की सबसे बडी कपड़ा उत्पादक कंपनी बनी। 1850 तक अमेरिका प्रमुख कपड़ा उत्पादक बन गया।

इसके अलावा, 19वीं सदी के स्टील उद्योग पर भी विचार किया जा सकता है। स्टील उत्पाद के लिए विकसित तकनीक अन्य देशों के उत्पादकों से भी गोपनीय नहीं रही। लेकिन स्टील उत्पादन अमेरिका में सबसे ज्यादा होने लगा। यहाँ विश्व के सभी भागों के कुल उत्पादन से भी ज्यादा स्टील बनने लगा। एक स्कॉटिश अप्रवासी एंड्रयू कार्निज ने नई तकनीक वाले संयंत्र स्थापित करने के लिए पुराने संयंत्रों को तोड़ दिया क्योंकि वह उन्हें पक्का भरोसा था कि ये सब उसकी संपत्ति है। 19 वीं सदी के अंत में कार्निज स्टील कंपनी विश्व की सबसे बडी कंपनी हो गई।

निवेश की प्रेरणा

सुरक्षित संपत्ति अधिकार और अनुबंध के कानूनों से अमेरिकावासियों को काम करने, सृजन और निवेश की प्रेरणा मिली। जोनाथन हा्रूगेश ने लिखा, ''लोग संपत्ति अधिकार प्राप्त करने के लिए बडे़ त्याग तक करने के इच्छुक थे। उपक्रमों में अलग-अलग देनदारियों के साथ शामिल होने, भूमि मुक्त कराने से लेकर स्टील कंपनी बनाने तक- संपत्ति स्वामित्व से व्यक्तिगत या पारिवारिक लाभ कमाने की आशा में।'' जैसा कि उन्होंने लिखा कि संविधान निर्माताओं ने निजी अनुबंधों को इतना महत्वपूर्ण समझा कि इन्हें राज्यों की विधायी शक्तियों से ज्यादा वरीयता दी गई। (यहां यह ध्यान देने योग्य है कि जब इसने इकरारनामे से स्वर्ण संबंधी सारे अनुबंधों को समाप्त कर दिया और संघीय सरकार को यह अधिकार दे दिया कि वह नागरिकों द्वारा सोने के सिक्कों या सोना चाँदी प्राप्त करने को गैर कानूनी ठहराए तो 1930 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया ।)

अमेरिका के सुरक्षित संपत्ति अधिकार ने अन्य अधिकतर देशों की अपेक्षा वहाँ ज्यादा सामाजिक स्थिरता दी है ।  अमेरिका में एक बड़ा गृह युध्द मुख्य रूप से दक्षिण के लोगों के इस प्रत्यक्षण के कारण हुआ कि काले दासों मे उन लोगों के संपत्ति अधिकार को खतरा हैं । निश्चित तौर पर ही, दक्षिण दासों के स्वामियों को यह अधिकार इसलिए था क्योंकि उन लोगो ने आत्म-स्वामित्व के अधिकारों के लिए अश्वेतों को कुचलने के काम में सरकारी ताकतों का इस्तेमाल किया।

कई देशों में ये राजनीतिक प्रक्रियाओं या क्रांति द्वारा सामाजिक परिवर्तन को बढावा देने के साधन बने। यद्यपि अमेरिका में हमेशा ऐसा कुछ संगठन में जैसे- 1840 के एसोशिएसनिस्ट, मार्क्सियन सोशलिस्ट, लैसालियन सोशलिस्ट और बेलम युग के बाद के अर्नाकिस्ट और 1905 के बाद के इंडस्ट्रियल वर्कर, लेकिन ये हमेशा हाशिए पर या गौण रहे।

प्रभावी मजदूर संघों, जैसे 19वीं एवं 20वीं सदी के नेशनल यूनियन लेबर, द नाइट्स ऑफ लेबर और अमेरिकन फेडरेशन ऑफ लेबर ने समान्यतया राजनीति के मौलिक सिद्धांतों को खारिज कर दिया। इन लोगों ने अपने सदस्यों के काम और वेतन की स्थिति में सुधार के लिए राजनैतिक उद्देश्यों वाली राजनैतिक पार्टी बनाने के बजाय आर्थिक एजेंट का चुनाव किया।

इसका मूल कारण यह था कि मजदूर अपनी संपत्ति के मालिक स्वयं थे और इनकी समाज एवं विद्यमान संपत्ति अधिकार को बनाए रखने में रुचि थी। अधिक संपत्ति संचित करने की उनकी अपेक्षाएं तर्कसंगत थी। अनुबंधो एवं निजी संपति अधिकारों में कटौती या इसे समाप्त करने की दलील देने वाले राजनैतिक एजेंडा को अधिकतर मजदूरों के हितों के खिलाफ देखा गया।

तरक्की कर रहे समाज में निजी संपत्ति अधिकार और अनुबंध के नियम जैसा हा्रूगेश कहते है, शांति एवं स्थिरता लाने वाला सामाजिक इकरारनामा होता है। 200 से ज्यादा वर्षों से अमेरिकी लोगों ने स्वतंत्रता का उपभोग इसलिए किया क्योंकि वहां निजी संपत्ति अधिकार एवं अनुबंध कानून थे।

संदर्भः-

  1. कार्ल मैगर, प्रिसिंपल ऑफ इकोनॉमिक्स जेम्स डिंगवाल और बर्ट एफ होसेलिट्ज, 1871 संस्करण का अनुवाद। (न्यूयॉर्क: न्यूय़ॉर्क यूनिवर्सिटी प्रेस,1981 ), पेज .97
  2. जोनाथन हा्रूगेश, अमेरिकन इकोनॉमिक्स हिस्ट्री, दूसरा संस्करण, (ग्लेन  वियू, आई0 एल0, स्कौट, फोर्समैन, एंड को, 1987 पी पी - 577 -.78)
लेखक : 
ज्यां स्माइले
प्रकाशित: 
द फ्रीमैन: आइडियाज ऑन लिबर्टा मई 1990
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