मुक्त व्यापार = शांति
“संरक्षणवाद का दर्शन युद्ध का दृष्टिकोण है.”- लुडविग वॉन मिसेस
अब प्रमाण सामने है. संरक्षणवाद युद्ध की दिशा में एक कदम है. यह सोच न केवल “व्यापार युद्ध”, जहां सरकारें अपनी ही जनता के खिलाफ युद्ध का बिगुल बजा देती हैं, बल्कि यह एक ऐसे वास्तविक युद्ध का कारण है जिसमें लोग मारे जाते हैं. इतना ही नहीं, यह एक तरह से “व्यापार संबंधी आत्महत्या” के समान है) यह लंबे समय से ज्ञात है कि गैर-लोकतांत्रिक देशों की तुलना में लोकतांत्रिक देशों के एक दूसरे के खिलाफ वेतन-मजदूरी संघर्ष में लिप्त होने की आशंका कम रहेगी. इसलिए इसे “लोकतांत्रिक शांति” के रूप में जाना जाता है.
शोध दर्शाते हैं कि व्यापार में शांति की स्थापना के लिए उत्प्रेरक की भूमिका निभाने की क्षमता होती है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एरिक गार्टज़्के ने अपने शोध में बताया है, “शांति को प्रोत्साहित करने के मामले में लोकतंत्र की तुलना में आर्थिक आज़ादी बहुत ज्यादा ताकतवर है, 50 गुना ज्यादा ताकतवर.”
दरअसल, एसयूएनवाई बिंघाम्टॉन और रटगर्स विश्वविद्यादलयों के प्रो. सोलोमन डब्ल्यू. पॉलचेक और कार्लोस सैग्लाइ ने दो देशों के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर आधारित अपने शोध में स्पष्ट किया है, “चूंकि दो गैर-लोकतांत्रिक देशों की अपेक्षा में दो लोकतांत्रिक देशों के बीच ज्यादा व्यापार होता है इसलिए तुलनात्मक रूप से दो लोकतांत्रिक देश आपस में ज्यादा सहयोग करते हैं और इस प्रकार ये देश ‘लोकतांत्रिक शांति’ की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए ‘आपस में कभी-कभार ही कोई संघर्ष’ करते हैं.”
व्यापार शांति की ओर ले जाता है; व्यापार अवरोध, संरक्षणवाद, और आर्थिक राष्ट्रवाद युद्ध की दिशा में ले जाते हैं. (शोध आधारित अधिक प्रमाणों के लिए वेबसाइट देखें- http://freedomtotrade.org/)
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शामिल हो जाइये हजारों लोगों के साथ, जिनमें 1,000 से ज्यादा अर्थशास्त्री भी शामिल हैं ऑर जिन्होंने मुक्त व्यापार के लिए एक याचिका (पिटिशन) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह याचिका http://freedomtotrade.org/petition पर मौजूद है. हमारा मल्टीमीडिया पेज आप http://www.youtube.com/Freedom2Trade पर देख सकते हैं.
FreedomToTrade.org अभियान में 48 देशों के 76 थिंक टैंक शामिल है जो दुनिया में नए व्यापार अवरोधों का प्रतिकार करते हैं और मौजूदा व्यापार बाधाओं को खत्म करते हुए मुक्त व्यापार की पैरवी करते हैं.
“व्यापार का स्वाभाविक प्रभाव है शांति. दो देश जो एक दूसरे से भिन्न होते हैं वे परस्पर एक दूसरे पर निर्भर हो जाते हैं; क्योंकि एक देश की रुचि अगर माल की खरीद में है तो दूसरे की दिलचस्पी बिक्री में और ऐसे में उनका तालमेल आपसी जरूरतों के मद्देनजर ही बनता है.” - चार्ल्स रुई डि सेकंड, बेरॉन डि मॉटेस्क्वी
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