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27 जुलाई 2011   

मुनाफाखोरी का उपचार है आधुनिक रीटेल

Retailयह भारत के उपभोक्ताओं और किसानों के लिए खुशखबरी है कि सरकार विदेशी सुपरमार्केट की तर्ज पर बहुराष्ट्रीय रिटेल चेन स्टोर खोलकर किसानों के लिए बेहतर वितरण प्रणाली शुरू करने की योजना बना रही है। इस प्रकार के स्टोर तमाम विकसित देशों में मौजूद हैं, किंतु भारत में अब तक इनकी अनुमति नहीं दी गई है। चीन समेत एशिया के तमाम देश आधुनिक श्रृंखला के माध्यम से लाभ उठा रहे हैं। केवल भारतीय उपमहाद्वीप के देश पुराने जमाने के किराना स्टोर और अकुशल मंडियों के कारण पिछड़ गए हैं।

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साम्यवाद नहीं, सामाजिक लोकतंत्र

Democracyब्रेझनेव के उत्तराधिकारी गोर्बाचेव को विरासत में एक डूबती हुई अर्थव्यवस्था मिली और ब्रिटेन की तरह ही उनके लिए भी साम्राज्यवादी अभियानों का वित्तीय बोझ उठा पाना नामुमकिन हो गया। गोर्बाचेव ने पूर्वी यूरोप के साम्यवादी नेताओं से कहा कि वो अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए सोवियत हस्तक्षेप पर निर्भर रहना बंद करें। इस संदेश के छह महीने के अंदर ही पूर्वी यूरोप में साम्यवादी शासन व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गयीं और इसके कुछ ही दिनों बाद दुनिया का सबसे बड़ा साम्यवादी शक्ति केंद्र भी ध्वस्त हो गया।

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असंगठित क्षेत्र को अभी भी सुधारों का इंतज़ार

Unorganized sectorआज के समय में, एक फैक्ट्री या कॉल सेंटर स्थापित करने के लिए कोई सरकारी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है. पर यदि कोई व्यक्ति एक सड़क फेरीवाला, साइकिल रिक्शावाला, रेलवे कुली बनना चाहता है या चाय की दुकान लगाना चाहता है तो उसे लाइसेंस की ज़रुरत होती है. निचले स्तर के कामों के लिए जहां बहुत कम निवेश और कौशल की ज़रुरत होती है, वहाँ आज भी लाइसेंस अनिवार्य बने हुए हैं.

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नकद सब्सिडी होगी एक अच्छी शुरुआत

Cash Subsidyकैश सब्सिडी की योजना के तहत जो लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं, उनके बैंक खातों में एटीएम और मोबाइल बैंकिंग के जरिये सब्सिडी की जगह नकद पैसा सीधे भेजा जाएगा. सरकार हर साल ईंधन तथा उर्वरक सब्सिडी के रूप में 73,637 करोड़ रुपए खर्च करती है, पर इस राशि का एक बड़ा हिस्सा सही लोगो तक नहीं पहुंच पाता है। सरकार ने कैश सब्सिडी को सीधे विशेष पहचान पत्र यानी यूआईडी से जोड़ने का ऐलान किया है. उसका मानना है कि यूआईडी कार्ड अगर गरीब को मिल जाता है तो उसकी सब्सिडी कोई और छीन नहीं सकता।

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नौकरशाही में सुधार से भ्रष्टाचार का इलाज

Corruptionहम एक ऐसी विचित्र स्थिति में फंस गए जहां आपको ज़मीन तब तक नहीं मिल सकती जब तक कि आपके पास सर्टिफिकेट ना हो औऱ सर्टिफिकेट तब तक नहीं मिल सकता जब तक कि आपके पास ज़मीन नहीं हो। आगे क्या? आप क्या करेंगे, अगर आपके पास ज़मीन नहीं है तो शायद घूस देकर सर्टिफिकेट प्राप्त किया जा सकता है और दूसरा, आने वाले लोकपाल के पास यह कहते हुए एक केस दर्ज कराया जा सकता है कि उन्हें समय पर सर्टिफिकेट नहीं मिला और इस तरह यह आशा की जा सकती है कि गरीब को इस तरीके से न्याय मिलेगा।

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आगाज अच्छा है पर सफर अधूरा

Startingबदलाव की बयार का एक और उदाहरण है दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री यानी डिक्की का गठन। 2005 में गठित हुआ यह संगठन पिछले कुछ समय में काफी तेजी से काम कर रहा है। इस संगठन के 1000 से भी अधिक सदस्य हैं। फिलहाल इस मामले में 400 उद्यमियों के साथ महाराष्ट्र सबसे आगे चल रहा है। इसके बाद 200 उद्यमियों के साथ गुजरात का नंबर आता है। उद्योग संगठन अपने सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए सरकार के पास लॉबिंग करते हैं।

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मंदिर की संपत्ति किसी और की नहीं

Templeकहा जाता है कि ट्रावनकोर राजाओं ने ब्रिटिश शासकों से बचाने के लिए विशाल खजाना इस मंदिर के तहखाने में छुपा कर रखा था। यह धन अकाल जैसी आपदा के समय खर्च करने के लिए था। इस संपत्ति को लेकर जिज्ञासा तो है ही, साथ ही सवाल इस धन के उपयोग का भी है। बहुत सारे लोगो का ये कहना है कि यह धन देश का है और इस को देश के कल्याण और विकास में खर्च किया जाना चाहए पर देखा जाये तो ये धन भगवान पद्मनाभ का है तो फिर इसका राष्ट्रीयकारण क्यों किया जाना चाहिए?

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