साप्ताहिक न्यूज़लेटर
04 जुन 2010

उदारवाद के विभिन्न पथ - ब्रायन डोहार्ती

इंसान के रहने और परस्पर संबंध के लिहाज से मोर्चे और प्रयोग, दोनों ही मूल्यवान तरीके हैं। इससे मिलने वाली प्रौद्योगिकी और प्रोत्साहन के साथ ही इससे उपजने वाली संभावनाएं संस्कृति और धारणाओं में बड़े पैमाने पर बदलाव लाती हैं। पैट्री बड़ी चतुरता के साथ स्वतंत्रतावाद के लिए प्रौद्योगिकी की सीमाओं की बात करते हैं। यह कि हम विभिन्न स्थानों और समय के साथ हलचल करने वाले हाड़-मांस के इंसान हैं, केवल अंकीय विचार नहीं। और जो हमारे नियंत्रण से बाहर है उसे उन्हें केवल साइबर स्पेस में नहीं छिपाया जा सकता। फिर भी, उदाहरण के लिए, वर्ल्ड वाइड वेब हमें पैट्री की स्थिति की कई विडंबनाओं में एक तो बता ही देता है। एक महत्वपूर्ण परिवर्तन, जो प्रौद्योगिकी की देन है, जिसने 'लोक अभियान' के पुराने तौर-तरीकों को-विचारों का प्रसार, नजरिये में बदलाव-ज्यादा आसान और मनोरंजक बना दिया है।

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उदारवादी चिंतक फ्रेडरिक ऑगस्ट हायक

अध्ययन का जो विषय आज ऑस्ट्रियन अर्थशास्त्र के नाम से जाना जाता है, हायक उसके श्रेष्ठ अधिवक्ता थे. असल में ऑस्ट्रियन स्कूल के वही एकमात्र सदस्य थे, जिनका जन्म भी ऑस्ट्रिया में हुआ और वे पले-बढ़े भी वहीं पर. पहले विश्वयुद्ध के बाद विएना की यूनिवर्सिटी से हायक ने विधि और राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की. बाद में, कुछ अन्य अर्थशास्त्रियों जैसे गॉटफ्राएड हैबर्लर, फ्रिट्ज मैचलप और मॉर्गन्स्टर्न के साथ मिलकर लुडविग वॉन मीज़ीस की निजि सेमिनार में शामिल हुए जो कीन्स के “कैम्ब्रिज सर्कस” के आस्ट्रियाई संस्करण के समक्ष था, 1927 में हायक ऑस्ट्रियन इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस साइकल रिसर्च के निदेशक बने. 1930 के शुरुआती समय में लियोनेल रॉबिन्स के आमंत्रण पर हायक लंडन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की फैकल्टी में शामिल हो गए, जहां वे 18 साल रहे. 1938 में वे ब्रिटिश नागरिक बन गए. 1920 से लेकर 1930 तक हायक ने ज्यादातर ऑस्ट्रिया के कार्य-चक्र (बिज़नेस-साइकल्स), पूंजी सिद्धांत (कैपिटल थ्योरी) और आर्थिक सिद्धांत (मॉनेटरी थ्योरी) पर ही काम किया.

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उदारवादी चिंतक ए. डी. श्रॉफ

Dr B R Ambedkar1936 में उन्होंने प्रमुख उद्योगपतियो और व्यापारियों के मतों को नेहरू के समाजवादी विचारों के विरूद्ध गतिशीलता प्रदान की। वे 1938 में बनाई गई राष्ट्रीय योजना समिति के सदस्य थे। बाद में, 1944 में उन्होंने प्रमुख उद्योगपतियों के साथ मिलकर बॉम्बे प्लान लिखा। वे योजना में उसी हद तक यकीन करते थे जब तक वह वैयक्तिक पहल का दम नहीं घोंटती हो। साथ ही उन्होंने व्यापार और उद्योग को अपने कार्य के प्रति और अधिक जिम्मेदार होने के लिए प्रेरित किया तथा वे उद्योगपितयों के लिए आचार संहिता विकसित करने में सहायक बने।

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