साप्ताहिक न्यूज़लेटर
21 मई 2010

खपत समानता का नकारात्मक पहलू - जॉन वी.सी. नेय

पिछली दो सदियों में ज्यादा समानता की आकांक्षा दरअसल पूरी दुनिया में लोकतंत्र के प्रसार और लोकतांत्रिक प्रवृत्ति का ही परिणाम है। तोकेविले (tocqueville) पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने इस बात को पहचाना कि लोकतांत्रिक अमेरिका के लिए समानता का भाव कितनी अहम बात है। उन्होंने कहा था, अमेरिकी 'स्वतंत्रता में असमानता से ज्यादा गुलामी में समान रहेंगे।' लेकिन विडंबना ही कही जाएगी इस औद्योगिक युग में जिस आर्थिक विकास ने खपत में भौतिक समानता को बढ़ावा दिया है और इस विकास के साथ मिली संपूर्ण कल्याण और तुलनात्मक समानता की उम्मीद, वही आर्थिक विकास असमानता के अनुभव को और बुरी स्थिति तक ले जाएगा, फिर आंकड़े भले ही कुछ भी दर्शा रहे हों। और यह इसकी वजह है प्रतिष्ठा और हैसियत का सामान।

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उदारवादी चिंतक चार्ल्स डी मॉन्टेस्क्यू

मॉन्टेस्क्यू के स्वतंत्र विचारों में सबसे रोचक बात यह थी कि उन्होंने राजनीतिक आज़ादी पर सबसे अधिक जोर दिया. बहुत से लोग “कानून की आत्मा” नामक निबंध को राजनीतिक आज़ादी का आरंभिक बिंदु मानते हैं. अमेरिकी संविधान मे नियंत्रण और सामंजस्य पर मॉन्टेस्क्यू का सीधा प्रभाव दिखाई देता है. जैफरसन जिनकी पुस्तक का नाम “आज़ादी की घोषणा” है, हैमिलन और मेडिसन आदि मॉन्टेस्क्यू के विचारों से परिचित और प्रभावित थे.

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उदारवादी चिंतक हृदयनाथ एन. कुंजरू

वे उदार राजनीति में, संयुक्त प्रांतों और दिल्ली में सक्रिय रहे और संविधान सभा के एक सदस्य थे। उन्होंने सरकार द्वारा बनाए गई विभिन्न आयोगों में अपनी सेवाएं प्रदान कीं और वे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के पक्षधर थे। उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर की स्थापना की।

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आज़ादी वीड़ियो - द थर्ड व्हील (भाग दो)

The Third Wheel

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