साप्ताहिक न्यूज़लेटर
02 अप्रैल 2010

आज़ादी की अवधारणाए

'आज़ादी' शब्द को लेकर एक आम मिथक है, एक ऐसा मिथक जिसको वामपंथियों ने ही नहीं, दक्षिणपंथियों ने ही नहीं, अनुदार, परिवर्तनवादी, आधुनिक उदारवादी और परंपरागत उदारवादी सभी ने खूब हवा दी। इस मिथक की शुरुआत एक विशिष्टता से होती हैः आज़ादी के दो मूल रुप होते हैं- नकारात्मक और सकारात्मक।

और पढ़ें [+]

उदारवादी चिंतक गोपाल कृष्ण गोखले

saमहादेव गोविंद रानाडे के शिष्य गोपाल कृष्ण गोखले को वित्तीय मामलों की अद्वितीय समझ और उस पर अधिकारपूर्वक बहस करने की क्षमता से उन्हें भारत का ग्लेडस्टोन कहा जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सबसे प्रसिद्ध नरमपंथी थे। चरित्र निर्माण की आवश्यकता से पूर्णत: सहमत होकर उन्होंने 1905 में सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी की स्थापना की ताकि नौजवानों को सार्वजनिक जीवन के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।

और पढ़ें [+]

आधुनिक बनाम पाश्चात्य - गुरचरण दास

'आधुनिक' और 'पाश्चात्य' के बीच भेद जानने की असमर्थता ही हमारे दुख का कारण है। सभी बुद्धिजीवी तथा सभ्य मनुष्यों की आलोचनात्मक सोच केवल पश्चिम की पूंजी नहीं है बल्कि सर्वव्यापक है तब हमें उस पर इतना दुखी नहीं होना पड़ेगा। हमें अपनी शक्ति को अच्छे कामों के लिए बचाकर रखना चाहिए न कि उसे स्वदेशी, हिंदुत्व, भारतीय भाषा पर विवाद, अमेरिका पर टिप्पणी, विदेशी पूंजी निवेशकों पर कटाक्ष आदि बेकार के मुद्दों पर बरबाद करना चाहिए।

और पढ़ें [+]

कलाकार और राजनीति...

यह एक उच्चकोटि का राजनैतिक तमाशा ही है। बेशक, मीडिया अपने हित साध रही है, मोदी अपने राज्य के लिए महानायक का प्रयोग कर रहे हैं, महानायक अपने किन्हीं हितों के चलते इस ओर बढ़े हैं और कांग्रेस की प्रतिक्रिया राजनीति से प्रेरित है, लेकिन यह प्रश्न तो पैदा होता ही है कि अमिताभ का, बाल ठाकरे और नरेंद्र मोदी सरीखे लोग जोकि सभ्य समाज के खिलाफ बात करने वाले हैं, दामन थामना उचित है?

और पढ़ें [+]

आज़ादी का हिस्सा बनें

आप अपने लेख, पुस्तकें, विषय आधारित दिलचस्प और सूचनापरक तस्वीरें, चित्र और अपनी पुस्तकें एवं सुझाव हमें भेज सकते हैं। जिनका चयन करने के बाद हमें उन्हें अपनी वेबसाइट पर डालेंगे। इसके अलावा आप हमारे ब्लॉग के लिए भी प्रासंगिक विषयों पर लिख सकते हैं।

हमें आप azadi@ccs.in पर ई-मेल कर सकते हैं।