सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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मुझे इस बात की खुशी है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आम लोगों में बहस हो रही है। मौजूदा दौर में भ्रष्टाचार की स्थिति को और अच्छी तरह से समझने के लिए मैंने तीन स्मॉल और मिडकैप कम्पनियों के प्रमुखों के साथ भोजन के दौरान चर्चा की।

उनकी फौरी प्रतिक्रिया यही थी कि हालात तेजी से बिगड़े हैं। ज्यादा गहराई से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि राज्य और जिला स्तर पर निचले स्तर पर भ्रष्टाचार की समस्या काफी बढ़ गई है। एक कारोबारी ने कहा कि निचले स्तर के इंस्पेक्टर्स और अधिकारियों से काम करवाने में इतनी ज्यादा अड़चनें आ रहीं थीं और इतनी खीझ हो रही थी कि

भ्रष्टाचार की दुर्गंध बहुत तेजी से फैलती है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की बेटी कनिमोझी पर सीबीआई द्वारा जल्द ही केस दायर करने की खबर के साथ ही लगता है कि अब शिकंजा कसा जाने लगा है। डीएमके की पीआर मशीन 13 अप्रैल को तमिलनाडु में होने वाले चुनाव से पहले ‘ईमानदार झूठ’ का प्रसार करने के लिए कमर कस चुकी है।

डीएमके और एआईएडीएमके दोनों को तकरीबन एक तिहाई मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है। डीएमके की जूनियर पार्टनर कांग्रेस का नियंत्रण लगभग 12 से 15 फीसदी वोटों पर है और एआईएडीएमके के सहयोगी विजयकांत की मुट्ठी में लगभग 9 फीसदी वोट हैं। एआईएडीएमके

बड़ी आपदाएं निरंतर आती रहती हैं। एशिया के आर्थिक संकट ने एशिया की चमत्कारिक अर्थव्यवस्था को तहस नहस कर दिया। 2007-09 की महामंदी ने वॉल स्ट्रीट के पांच शीर्ष निवेश बैंकों, सबसे बड़े बैंक (सिटी बैंक), सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी (एआईजी), सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी (जनरल मोटर्स) और सबसे बड़ी बंधक एवं बीमा कंपनी (फैनी मे और फ्रेडी मैक) को दीवालियेपन / राहत की कगार पर पहुंचा दिया। कैरिबियन सागर में हुई बीपी दुर्घटना दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरण त्रासदी मानी जाती है। कुछ लोगों को डर है कि ग्लोबल वार्मिंग अब तक का सबसे बड़ा मानवनिर्मित संकट होगा।

असल में बाजार को एक नैतिक मूल्य की जरुरत होती है,  अगर उसे सही मायने में खुली बाजार व्यवस्था बननी है। खुली बाजार व्यवस्था हकीकत में नैतिक मूल्यों को और प्रोत्साहन देती है। लेकिन उसमें नैतिकता की कोई गारंटी नहीं होती। आज के सांस्कृतिक परिवेश में जिस तरह की चीजें सामने आ रही है, उसमें खुली बाजार व्यवस्था नैतिकता को लेकर कई जोखिमों को और बढ़ा देती है।

एक राजनेता होने के नाते, एक अर्थशास्त्री के मुकाबले मैं शायद इस सवाल का जवाब देने के लिए बेहतर साबित नहीं हो सकूं। एक राजनेता के तौर पर हजारों अमेरिकियों के साथ आजादी, नैतिकिता जैसे मु्द्दे

इस बात का जवाब पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस तरह के बाजार की बात कर रहे हैं और नैतिकता से हमारा मतलब क्या है। आज के जमाने में जिस खुले बाजार की बात हो रही है, उसे सही अर्थ में बंद बाजार व्यवस्था कहना मुनासिब होगा.. वह असल में एक ऐसी बाजार व्यवस्था है, जो लोगों को आगे बढने से रोकती है। हमारी वित्तीय और कॉरपोरेट व्यवस्था एक आदर्श व्यवस्था, आदर्श प्रतिस्पर्धा और संपूर्ण जानकारी के मामले में काफी पीछे रह जाती है।

1948 में प्रिंस्टन में कॉलेज के शुरुआती दिनों में मैंने एक किताब पढ़ी थी। इकॉनोमिक्स- एन एंट्रोडक्शन एनालिसिस। उस

इस बात को लेकर बहुत की कम रजामंदी है कि आखिर नैतिक क्या है और किस चीज से नैतिकता का पतन होता है। धर्म में यकीन रखने वाला आदमी नैतिकता को भगवान से जोड़कर देखता है। एक समाजवादी के लिए नैतिकता का मतलब दौलत को सबमें बांटना हो सकता है। एक उदारवादी के लिए नैतिकता का मतलब धार्मिक होने के साथ-साथ आय में समानता की बात हो सकती है.. लेकिन आजादी उसकी प्राथमिकता में सबसे पर होता है। मैं नैतिकता के इसी खांके को मानती हूं।

नैतिकता की इस विचारधारा के मुताबिक व्यक्ति की आजादी सबसे बड़ा लक्ष्य है। और किसी व्यक्ति के चरित्र की सबसे बडी परीक्षा तब होती है, जब

हमसे से अधिकतर एक उपभोक्ता हैं, जो बाजार में अपने लिए बेस्ट डील की तलाश करता है। हममे से अधिकतर नैतिक भी हैं, जो समाज और समुदाय के लिए अपनी तरफ से अच्छा करने की कोशिश करता है। लेकिन दुर्भाग्य से बाजार की जरुरतें हमारी अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से टकरा जाती हैं। तो हम इस टकराव को कैसे झेलें। हम अक्सर इसे नजरअंदाज कर जाते हैं। एक उपभोक्ता के तौर पर हम वे फैसले लेने चाहिए, जिनकी छाप हमारी नैतिकता पर नहीं दिखाई दे। इस तरह हम अपनी मनपसंद उत्पाद और सेवाओं तथा आदर्श के बीच में किसी एक का असहज चुनाव करने से बच सकते हैं।

उदाहरण के लिए जो उत्पाद हम

नैतिकता के मामले में खुली बाजार व्यवस्था एम्प्लीफायर की तरह है।हमारे पास ज्यादा दौलत और संसाधन देकर वह हमारे उन गुणों का और ज्यादा विकास करती है, जो पहले से ही हमारे पास हैं। इसका कुल मिलाकर जो नतीजा सामने आता है, वह मोटे तौर पर सकारात्मक होता है। अधिकतर लोग अपने लिए, अपने परिवार के लिए, अपने दोस्तों के लिए अच्छी जिंदगी चाहते हैं और यह सकारात्मक नैतिकता का ही नतीजा है। बाजार समाज के अलग-अलग तबके के बहुत ज्यादा लोगों के लिए इंसानी जरुरतों की तमाम चीजें हासिल करने का एक मौका देता है, मुमकिन बनाता है।

खुली बाजार व्यवस्था के दूसरे पहलू हमारे

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