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निराश करती राजनीति

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान हो जाने के बाद अब सारी लड़ाई राजस्थान और दिल्ली में केंद्रित हो गई है। इन दोनों राज्यों में मतदान की घड़ी करीब आने के साथ ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बढ़त हासिल करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान और दिल्ली उन राज्यों में शामिल हैं जहां मुकाबला मुख्य रूप स

सरकार की मंशा निजी स्कूलों पर नियंत्रण रखने की होती हैः जिश्नू दास

कांस्टियूशन क्लब में व्याख्यान देते जिश्नू दास (बीच में), पार्थ जे शाह (एकदम बाएं) व गीता गांधी किंगडन(एक दम दाएं)

वर्ल्ड बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री व हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्कॉलर जिश्नू दास ने कहा है कि सरकार व सरकारी एजेंसियों की मंशा प्राइवेट स्कूलों पर रोक लगाने और उनपर नियंत्रण रखने की होती है। उन्होंने कहा है कि सरकार व इसके प्रतिनिधियों द्वारा स्कूलों पर तमाम प्रकार के आरोप लगाए जाते हैं जिनमें प्राइवेट स्कूल समाज में असमानता पैदा करते हैं, अभिभावक अपने बच्चों के लिए

मर्ज बढ़ता गया, ज्यों ज्यों दवा की...

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वैश्विक गांव में तब्दील हो चुकी दुनिया के तमाम देश जहां वस्तुओं, सेवाओं व खाद्यान्नों की विनिमय प्रक्रिया को अपनाकर देश को प्रगति व देशवासियों को समृद्धि की ओर अग्रसर करने में जुटे हैं वहीं, आश्चर्यजनक रूप से हमारे देश के कुछ राजनैतिक दलों और उनके समर्थकों का अब भी मानना है कि बाजार का नियमन कर कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। कम से कम पश्चिम

घर बचाने की लड़ाई में

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यह जानते हुए भी कि अपना भारत महान ऐसा देश है, जहां इंसानों और इंसानियत की कदर कम होती है, हैरान हुई पिछले सप्‍ताह जब बुलडोजर चले कैंपा कोला बिल्डिंग के दरवाजों पर। हैरान हुई अधिकारियों और पुलिस वालों की बेरहमी को देखकर, और शायद सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी हैरान हुए होंगे, वरना न रुकवाते लोगों को बेघर करने की यह बर्बर कार्रवाई। <

कहां गए वो नारे???

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कृषि नीति की नाकामी

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टमाटर और प्याज समेत खाद्य पदार्थो की बेतहासा बढ़ती कीमतों को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं, परंतु लोग भूल रहे हैं कि कुल मिलाकर कृषि उत्पादों का आयात-निर्यात उपभोक्ताओं के हित में है। देश में खाद्य तेल और दाल की उत्पादन लागत ज्यादा आती है। इनका भारी मात्र में आयात हो रहा है, जिनके कारण इनके दाम नियंत्रण में हैं। यदि हम विश्व बाजार से जुड़ते हैं तो हमे

सिर्फ ठोस योजनाएं बताएं

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विधानसभा चुनावों के लिए घोषणापत्र आने का सिलसिला शुरू हो गया है। हमारे देश में हाल के वर्षों में चुनावों का चरित्र तो बदला है, पर घोषणापत्रों की भाषा नहीं बदली। आज भी उनमें हवाई बातें ज्यादा मिलती हैं। भारी-भरकम शब्दों की कलाकारी के जरिए वादे किए जाते हैं।

एक शिक्षक होने के लिए

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राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा निर्धारित योग्यता के अनुसार, वर्तमान में शिक्षक बनने के इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों को न केवल डिप्लोमाधारी होना चाहिए बल्कि शिक्षण पात्रता परीक्षा (टीईटी) में भी उत्तीर्ण होना चाहिए। पहली से पांचवी कक्षा में अध्यापन के लिए अभ्यर्थी को सीनियर सेकेंडरी स्तर पर 50% अंक के साथ प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा और शिक्षक पात्रत