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मधुमक्खी का छत्ताः एक अत्यंत प्रासंगिक कहानी

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एक बार की बात है। एक चमकदार और रंगीन फूलों से भरे घास के मैदान और उद्यानों के बीचोबीच स्थित एक पुराने पेड़ पर मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता स्थित था। छत्ते में एक रानी मधुमक्खी थी, जिसे कुछ वरिष्ठ मधुमक्खियों के साथ छत्ते के संचालन के लिए चुना गया था। सामूहिक रूप से चयनित इस व्यवस्था को सरकार कहा जाता था। श्रमिक मधुमक्खियों को विश

तेज आर्थिक विकास का सबसे ज्यादा फायदा समाज के कमजोर तबकों को हुआ है

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दलितों-मुसलमानों के घर तक पहुंची ग्रोथ
 
 

निराश करती राजनीति

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान हो जाने के बाद अब सारी लड़ाई राजस्थान और दिल्ली में केंद्रित हो गई है। इन दोनों राज्यों में मतदान की घड़ी करीब आने के साथ ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बढ़त हासिल करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान और दिल्ली उन राज्यों में शामिल हैं जहां मुकाबला मुख्य रूप स

सरकार की मंशा निजी स्कूलों पर नियंत्रण रखने की होती हैः जिश्नू दास

कांस्टियूशन क्लब में व्याख्यान देते जिश्नू दास (बीच में), पार्थ जे शाह (एकदम बाएं) व गीता गांधी किंगडन(एक दम दाएं)

वर्ल्ड बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री व हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्कॉलर जिश्नू दास ने कहा है कि सरकार व सरकारी एजेंसियों की मंशा प्राइवेट स्कूलों पर रोक लगाने और उनपर नियंत्रण रखने की होती है। उन्होंने कहा है कि सरकार व इसके प्रतिनिधियों द्वारा स्कूलों पर तमाम प्रकार के आरोप लगाए जाते हैं जिनमें प्राइवेट स्कूल समाज में असमानता पैदा करते हैं, अभिभावक अपने बच्चों के लिए

मर्ज बढ़ता गया, ज्यों ज्यों दवा की...

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वैश्विक गांव में तब्दील हो चुकी दुनिया के तमाम देश जहां वस्तुओं, सेवाओं व खाद्यान्नों की विनिमय प्रक्रिया को अपनाकर देश को प्रगति व देशवासियों को समृद्धि की ओर अग्रसर करने में जुटे हैं वहीं, आश्चर्यजनक रूप से हमारे देश के कुछ राजनैतिक दलों और उनके समर्थकों का अब भी मानना है कि बाजार का नियमन कर कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। कम से कम पश्चिम

घर बचाने की लड़ाई में

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यह जानते हुए भी कि अपना भारत महान ऐसा देश है, जहां इंसानों और इंसानियत की कदर कम होती है, हैरान हुई पिछले सप्‍ताह जब बुलडोजर चले कैंपा कोला बिल्डिंग के दरवाजों पर। हैरान हुई अधिकारियों और पुलिस वालों की बेरहमी को देखकर, और शायद सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी हैरान हुए होंगे, वरना न रुकवाते लोगों को बेघर करने की यह बर्बर कार्रवाई। <

कहां गए वो नारे???

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कृषि नीति की नाकामी

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टमाटर और प्याज समेत खाद्य पदार्थो की बेतहासा बढ़ती कीमतों को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं, परंतु लोग भूल रहे हैं कि कुल मिलाकर कृषि उत्पादों का आयात-निर्यात उपभोक्ताओं के हित में है। देश में खाद्य तेल और दाल की उत्पादन लागत ज्यादा आती है। इनका भारी मात्र में आयात हो रहा है, जिनके कारण इनके दाम नियंत्रण में हैं। यदि हम विश्व बाजार से जुड़ते हैं तो हमे