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छोटी-सी घटना पर इतना हंगामा

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लगभग एक साल पहले पाकिस्तानी सैनिक नियंत्रण रेखा के इस तरफ आकर हमारे सैनिकों के सिर काट ले गए थे। हमारी सरकार ने पहले इस पर विरोध जताया, फिर चुप्पी साध ली। चीनी सैनिकों ने दौलत बेग ओल्डी में आकर अपना शिविर लगा दिया, लेकिन तब हमारे विदेश मंत्री ने यह कहकर बात टाल दी थी कि इसे एक खूबसूरत चेहरे पर छोटी-सी फुंसी के रूप में देखा जाना चाहिए। यानी चीन के

पुलिस के हाथ का चाबुक है धारा 377

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17 दिसंबर के अंक में प्रकाशित अपने लेख में फौजिया रियाज ने मांग की है कि धारा 377 को खत्म कर देना चाहिए। होमोसेक्सुअलिटी पर सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद देशभर में इसको लेकर बहस छिड़ी हुई है। मामला सेक्सुअलिटी से जुड़ा हो तो लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 377 में आपसी सहमति से बनाए जाने वाले समलैंगिक संबंध को

बेहतर हो कि आर्थिक सोच बदलें

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इसमें कोई शक नहीं कि आम आदमी पार्टी के आने से भारतीय राजनीति में उम्मीद जग गई है नए सिरे से राजनीतिक सवालों को देखने की। भ्रष्टाचार, परिवारवाद और झूठे वायदों ने राजनीतिक माहौल में जो निराशा फैलाई है देश भर में, वह थोड़ी कम हुई है। आप के नेता यह जानते हैं, सो हर तरह से दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अन्य राजनेताओं जैसे नहीं हैं। मतगणना के दिन आप

सम्राट के नए कपड़े

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खुद को बदलें राहुल और कांग्रेसी

 

एक कदम पीछे

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समलैंगिकों, किन्नरों और मुख्यधारा से अलग किसी भी सेक्शुअल प्राथमिकता वाले लोगों को लेकर सामाजिक बराबरी का नजरिया संसार के किसी भी देश, किसी भी सभ्यता में नहीं है। लेकिन उन्हें दंडनीय अपराधी मानने की धारणा अगर किसी बड़े लोकतांत्रिक समाज में आज भी जमी हुई है तो वह अपना भारत ही है। देश की सबसे ऊंची अदालत ने साधु-संतों और विभिन्न धार्मिक संगठनों की य

करोड़पति प्रत्याशियों को संदेह से क्यों देखते हैं

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देश के पांच राज्यों में लोकतंत्र का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान चुनावी रणभूमि में अपना भाग्य आजमाने वाले नेताओं ने नियमानुसार अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा भी दिया। समस्या यह है कि संपत्ति की जानकारी मिलते ही हंगामा शुरू हो जाता है कि फलां उम्मीदवार के पास इतनी संपत्ति है, कहां से उसके पास इतना पैसा आ गया?

"आप" का आभार

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चार राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे एक नई-बिलकुल नई इबारत लिख रहे हैं। इसलिए नहीं कि कांग्रेस दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में से कहीं भी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकी, बल्कि इसलिए कि देश की राजधानी में आम आदमी पार्टी के उभार ने देश को एक नया संदेश दिया है। बमुश्किल एक साल पुराने दल-आप-की दिल्ली में अप्रत्याशित और उल्लेखनीय जीत