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ध्यान हो तो धन भी सुंदर है। ध्यानी के पास धन होगा, तो जगत का हित ही होगा, कल्याण ही होगा। क्योंकि धन ऊर्जा है। धन शक्ति है। धन बहुत कुछ कर सकता है। मैं धन विरोधी नहीं हूं। मैं उन लोगों में नहीं, जो समझाते हैं कि धन से बचो। भागो धन से। वे कायरता की बातें करते हैं। मैं कहता हूं जियो धन में, लेकिन ध्यान का विस्मरण न हो। ध्यान भीतर रहे, धन बाहर। फिर कोई चिंता नहीं है। तब तुम कमल जैसे रहोगे, पानी में रहोगे और पानी तुम्हें छुएगा भी नहीं। ध्यान रहे, धन तुम्हारे जीवन का सर्वस्व न बन जाए। तुम धन को ही इकट्ठा करने में न लगे रहो। धन साधन है, साध्य न बन

जन्म 10 दिसंबर, 1878 – निधन 25 दिसंबर, 1972 मैं चाहता हूं कि भारत का माहौल उस डर से मुक्त हो, जैसा आजकल हो गया है, जहां उत्पादन या व्यापार के कठिन काम में जुटा हुआ ईमानदार व्यक्ति अधिकारियों, मंत्रियों और पार्टी के आकाओं के हाथों में ठगे जाने के भय से आजाद होकर अपना कारोबार कर सके। मैं ऐसा भारत चाहता हूं, जहां योग्यता और ऊर्जा को कार्य करने का स्कोप हासिल हो। साथ ही इसमें उन्हें किसी के आगे नाक न रगड़नी पड़े और अधिकारियों एवं मंत्रियों से विशेष वैयिक्तक अनुमति प्राप्त करने की जरूरत न हो। जहां उनके प्रयासों का मूल्यांकन भारत और विदेशों में खुले बाजार के द्वारा किया जाए।
व्यापार में कुछ खास नैतिक खतरे नही है। कोई भी काम जिसमें सही या गलत में चुनाव करना पड़े उसमें नैतिक खतरा होता ही है। व्यापारी भले ही अपने काम में ज्यादा नैतिक दुविधा का सामना करता है लेकिन यह किसी राजनेता या नौकरशाह की दुविधा से ज्यादा नही होता होगा।
 
सोने की तस्करी में जबर्दस्त इजाफा दर्ज किया जा रहा है। 2014-15 में अवैध ढंग से लाया जा रहा 1000 करोड़ रुपये मूल्य का (3500 किलोग्राम) सोना जब्त किया गया। दो साल पहले की तुलना में यह मात्रा लगभग दस गुनी है।
 

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