सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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7 अप्रैल को शिक्षा बचाओ ‘सेव एजुकेशन’ अभियान के समर्थन में देश भर के निजी स्कूल दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए। भारत के 70 वर्षोँ के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। ये स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में ‘लाइसेंस परमिट राज’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और शैक्षिक संस्थानोँ के लिए स्वायत्तता और सम्मान की मांग कर रहे थे। यहाँ पहुंचने वाले लगभग 65,000 प्रतिनिधियोँ में से अधिकतर प्रिंसिपल, शिक्षक, कम फीस लेने वाले स्कूलोँ में अपने बच्चोँ को पढ़ाने वाले माता-पिता थे। लेकिन इनके अलावा यहाँ अल्पसंख्यक संस्थान जैसे कि कैथलिक स्कूलोँ के प्रतिनिधि

साल 1989 में अमिताभ बच्चन की एक फिल्म आई थी- 'तूफान'। इस फिल्म में एक गाना था- 'आया आया तूफान, भागा भागा शैतान'। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने 'तूफान' का किरदार अदा किया था। बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की उपेक्षा की आँधी ने इस 'तूफान' को ऐसा उड़ाया कि निर्माता मनमोहन देसाई की जिंदगी में भूचाल आ गया। लेकिन इस दिनों असल तूफान का बड़ा हल्ला है। पिछले दिनों कई राज्यों में छोटा-बड़ा तूफान आया। कहीं पेड़ गिरे, कहीं ओले पड़े। गाने के हिसाब से चलें तो शैतानों का नामों निशान मिट जाना चाहिए, लेकिन ऐसा होगा नहीं। शैतान अब बहुत शातिर हो गए हैं। पांच बरस गायब रहते

कहते है आईटी और आईआइएम में दाखिला लेना आसान है बनिस्पत अच्छे नर्सरी स्कूलों के। क्योंकि आईआईटी और आईआईएम में दाखिले के लिए इम्तिहान छात्र देते है और निजी स्कूलों में उनके अभिभावक। किस्मत और आपकी जेब इसका फैसला करतीहै कि आपका बच्चा फलां स्कूल में जाने लायक है भी या नही। कितने सूटकेस में पैसा और सिफारिशी पत्र आपने सलंग्न किये है दाखिला इसपर निर्भर करता है। इतने जतन प्रयत्न के बाद अगर दाखिल मिल जाये तो अभिभावक की स्थिति एक बंधक की भांति हो जाती है जो स्कूलो के सही गलत सब नियम मानने को मजबूर हो जाते हैं। हर साल कितनी फीस बढ़ेगी, किताबे कहाँ से

सीमापार से खबर अच्छी आई है। बांग्लादेश सरकार ने देश में सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था को खत्म करने का फैसला किया है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 11 अप्रैल को संसद में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को खत्म करने का ऐलान किया । बांग्लादेश में आरक्षण नीति के खिलाफ हजारों छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। ढाका यूनिवर्सिटी से आरक्षण व्यवस्था को लेकर आंदोलन शुरू हुआ और धीरे धीरे पूरे बांग्लादेश में फैल गया। प्रदर्शकारियों का पुलिस से टकराव भी हुआ जिसमें 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। सरकार को छात्रों की मांगों के आगे झुकना पड़ा और

मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का गोपाल कृष्ण गोखले की कोशिश को भले ही ब्रिटिश विधान परिषद ने 18 मार्च 1910 को खारिज कर दिया, लेकिन इसके ठीक 99 साल बाद इतिहास बदला गया। आजाद भारत की संसद ने शिक्षा के अधिकार को संवैधानिक दर्जा देकर स्वतंत्रता सेनानियों के सपने को तो पूरा किया ही, भारतीय भविष्य को बेहतर मानव संसाधन के तौर पर विकसित करने की दिशा में नई राह ही खोल दी। जैसा कि अक्सर होता है, कानूनों के अपने पेंच और प्रावधान भी कई बार अपने मूल उद्देश्यों की राह में रोड़े बनने लगते हैं, शिक्षा का अधिकार कानून भी इसी राह पर चल पड़ा है। इसका असर यह हुआ है

मौजूदा समय में भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में नीतियां बनाने, नियमन (रेग्युलेशन) करने और सेवा प्रदान (सर्विस डिलिवरी) करने जैसे सारे सरकारी कामों की जिम्मेदारी एक ही संस्था के जिम्मे है। हालांकि, जरूरत इन सारे कामों को तीन अलग अलग हिस्सों में बांटने की है और इन तीनोँ के बीच संबंधों में वैसी ही स्पष्ट दूरी होनी चाहिए जैसे कि वित्त, टेलीकॉम और विद्युत क्षेत्र में है। ऐसा करने से नीति निर्धारण और नियमन दोनों के श्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त क्षमता बढ़ेगी जो कि फिलहाल सेवा प्रदान करने की जिम्मेदारी के कारण अवरुद्ध हो जाती है। जिम्मेदारियों को

भारत में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ से आने वाले “कोटेड पेपर” पर नई एंटी-डंपिंग जाँच शुरू होने के बारे में बातें चल रही हैं। दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया को इस जाँच से छूट दी गई है। दरअस्ल, ये देश ही ज़ीरो कस्टम ड्यूटी स्टेटस के चलते भारत में सस्ते आयात के लिए ज़िम्मेदार हैं, जैसा कि बल्लारपुर इंडस्ट्रीज़ लि. (बीआईएलटी) के अध्यक्ष ने कंपनी की 2016 और 2017 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा है। इस जाँच के चलते कोटेड पेपर के साथ फ़्लेक्सिबल पैकेजिंग, हल्के कोटेड पेपेर और ब्रोशर-पेम्फ़्लेट में इस्तेमाल होने वाले कोटेड पेपेर पर और ज़्यादा शुल्क

- 20-22 अप्रैल 2018 तक उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट में चलेगा वर्कशॉप
- पब्लिक पॉलिसी पर आधारित वर्कशॉप में शामिल होने के लिए 31 मार्च तक किया जा सकेगा आवेदन

सेंटर फार सिविल सोसायटी एटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप।

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