सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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11 जुलाई, 1987 में विश्व की जनसंख्या ने 5 अरब के आंकड़े को पार किया था। तब संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया। तब से इस विशेष दिन को हर साल एक याद और परिवार नियोजन का संकल्प लेने के दिन के रूप में याद किया जाने लगा। विभिन्न मंचों पर विशेषज्ञों, चिंतकों, नीति-निर्धारकों आदि के द्वारा बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी समस्या और इसकी भयावहता से लोगों को अवगत कराते हुए अपनी चिंताओं को प्रदर्शित करने का चलन शुरू हो गया। 'विश्व जनसंख्या दिवस' के आयोजनों के दौरान समाजशास्त्रियों के द्वारा विश्व भर में बढ़ती

विकृत और अक्षम प्रशासनिक तौर तरीकों वाली आरटीई हमारे बच्चों को शैक्षणिक भूखमरी का शिकार बना रही है

कहावत है कि नर्क का मार्ग अच्छी नीयत के साथ तैयार किया जाता है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि अच्छी नीयत के साथ लाया गया शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट) 2009 एक त्रासदीपूर्ण प्रयोग साबित हुआ है। 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित कराने के बहुप्रचारित उद्देश्योँ के विपरीत आरटीई ने लाखों बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित

मलेशिया की नवनिर्मित डा. महातिर बिन मोहम्मद सरकार ने देश में गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स अर्थात जीएसटी को समाप्त कर दिया है। ऐसा करके उन्होंने चुनाव पूर्व देश की जनता के साथ किए वादे को पूरा किया है। भारत के पूर्व मलेशिया ही वह आखिरी देश था जिसने अपने यहां जीएसटी लागू किया था। फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस नई कर प्रणाली को लागू होने के तीन वर्षों के भीतर ही समाप्त करने की जरूरत आन पड़ी? इसकी विवेचना कर रहे हैं वरिष्ठ टीवी पत्रकार नवीन पाल..    

मलेशिया

पिछले लगभग दो महीनों तक देश ताबड़तोड़ क्रिकेट के 20-ट्वेंटी फार्मेट वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के रंग में रंगा है। इस दौरान कई मैच रोमांच की चरम सीमा तक पहुंचे और खेल अंतिम गेंद तक पहुंचा। कई युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने और राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं को प्रभावित करने का मौका भी मिला। मैच दर मैच ऐसे ऐसे इनोवेटिव शॉट्स लगातार देखने को मिलें जो आमतौर पर कम ही देखने को मिलते हैं। गेंदबाजी, क्षेत्ररक्षण सहित सभी क्षेत्रों में खिलाड़ियों के अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिले। ऐसे ऐसे कैच भी पकड़े गए जिनकी कल्पना भी नहीं की

7 अप्रैल को शिक्षा बचाओ ‘सेव एजुकेशन’ अभियान के समर्थन में देश भर के निजी स्कूल दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा हुए। भारत के 70 वर्षोँ के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। ये स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में ‘लाइसेंस परमिट राज’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और शैक्षिक संस्थानोँ के लिए स्वायत्तता और सम्मान की मांग कर रहे थे। यहाँ पहुंचने वाले लगभग 65,000 प्रतिनिधियोँ में से अधिकतर प्रिंसिपल, शिक्षक, कम फीस लेने वाले स्कूलोँ में अपने बच्चोँ को पढ़ाने वाले माता-पिता थे। लेकिन इनके अलावा यहाँ अल्पसंख्यक संस्थान जैसे कि कैथलिक स्कूलोँ के प्रतिनिधि

साल 1989 में अमिताभ बच्चन की एक फिल्म आई थी- 'तूफान'। इस फिल्म में एक गाना था- 'आया आया तूफान, भागा भागा शैतान'। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने 'तूफान' का किरदार अदा किया था। बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की उपेक्षा की आँधी ने इस 'तूफान' को ऐसा उड़ाया कि निर्माता मनमोहन देसाई की जिंदगी में भूचाल आ गया। लेकिन इस दिनों असल तूफान का बड़ा हल्ला है। पिछले दिनों कई राज्यों में छोटा-बड़ा तूफान आया। कहीं पेड़ गिरे, कहीं ओले पड़े। गाने के हिसाब से चलें तो शैतानों का नामों निशान मिट जाना चाहिए, लेकिन ऐसा होगा नहीं। शैतान अब बहुत शातिर हो गए हैं। पांच बरस गायब रहते

कहते है आईटी और आईआइएम में दाखिला लेना आसान है बनिस्पत अच्छे नर्सरी स्कूलों के। क्योंकि आईआईटी और आईआईएम में दाखिले के लिए इम्तिहान छात्र देते है और निजी स्कूलों में उनके अभिभावक। किस्मत और आपकी जेब इसका फैसला करतीहै कि आपका बच्चा फलां स्कूल में जाने लायक है भी या नही। कितने सूटकेस में पैसा और सिफारिशी पत्र आपने सलंग्न किये है दाखिला इसपर निर्भर करता है। इतने जतन प्रयत्न के बाद अगर दाखिल मिल जाये तो अभिभावक की स्थिति एक बंधक की भांति हो जाती है जो स्कूलो के सही गलत सब नियम मानने को मजबूर हो जाते हैं। हर साल कितनी फीस बढ़ेगी, किताबे कहाँ से

सीमापार से खबर अच्छी आई है। बांग्लादेश सरकार ने देश में सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था को खत्म करने का फैसला किया है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 11 अप्रैल को संसद में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को खत्म करने का ऐलान किया । बांग्लादेश में आरक्षण नीति के खिलाफ हजारों छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। ढाका यूनिवर्सिटी से आरक्षण व्यवस्था को लेकर आंदोलन शुरू हुआ और धीरे धीरे पूरे बांग्लादेश में फैल गया। प्रदर्शकारियों का पुलिस से टकराव भी हुआ जिसमें 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। सरकार को छात्रों की मांगों के आगे झुकना पड़ा और

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