सार्वजनिक नीति - कानून और न्यायपालिका - लेख

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सांसदों के आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई के बारे में सुप्रीम कोर्ट का यह कहना सैद्धांतिक तौर पर सही है कि ऐसा करने से एक अलग श्रेणी बन जाएगी, लेकिन अगर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई की जरूरत महसूस की जा रही है तो फिर ऐसा ही सांसदों के मामले में क्यों नहीं सोचा जा सकता? चूंकि फिलहाल यह प्रश्न अनुत्तरित है और सुप्रीम कोर्ट राजनीति के अपराधीकरण पर लगाम लगाने के लिए संसद सदस्यों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए तैयार नहीं इसलिए अब देखना यह होगा कि मोदी सरकार इस सिलसिले में राज्यों से विचार-
रोशनी के लिए विभिन्न उत्पाद बनाने वालों के लिए तैयार की गई "कैंडलमेकर्स पिटिशन" (याचिका) संरक्षणवाद पर एक ख्यात व्यंग्य है। फ्रांसीसी अर्थशास्त्री फ्रैडरिक बास्तियात द्वारा लिखित और प्रकाशित यह व्यंग्य 1845 में उनकी रचना इकानॉमिक सोफिज़्म का ही हिस्सा था। यह एक तरह से, एडम स्मिथ द्वारा शुरू की गई मुक्त बाजार बनाम वाणिज्यवाद (वणिकवाद) की बहस का विस्तार था।
 
बास्तियात ने इसके जरिये सरकार द्वारा कुटीर उद्योग को प्रतिस्पर्धा से बचाने के
इसी साल के फरवरी के महीने ने अपने आपको चार माह के अंदर उस समय फिर से दोहरा दिया जब प्रकाशक ब्लैकस्वान ने अपने यहां से प्रकाशित कुछ पुस्तकों को बाजार से वापस मंगाकर उनकी 'पुनर्समीक्षा' करने की घोषणा की। फरवरी में कुछ ऐसा ही पेंग्विन बुक्स ने उस समय किया था जब 'शिक्षा बचाओ आंदोलन संस्थान' के प्रमुख दीनानाथ बत्र ने अमेरिकी स्कॉलर वेंडी डोनीगर की पुस्तक 'दि हिंदूज: एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री' के कुछ अंशों को अत्यंत आपत्तिजनक मानते हुए कोर्ट में एक मामला दायर किया था। इस बार बत्र ने शेखर बंदोपाध्याय की पुस्तक 'फ्रॉम प्लासी टू पार्टिशन, ए हिस्ट्री
मोदी सरकार के मंत्री जितेन्द्र सिंह ने अनुच्छेद 370 की प्रासंगिकता पर एक बार पुन: बहस की शुरुआत कर दी है। इस पर स्वस्थ बहस का स्वागत करने के बजाय उमर अब्दुल्ला ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यह ठीक नहीं है। किसी विषय पर स्वस्थ बहस लोकशाही की सबसे बड़ी ताकत होती है और संविधान के अनुच्छेद 370 सहित ऐसा कोई भी विषय नहीं है जिसको बहस की स्वस्थ परंपरा से वंचित रखा जाना चाहिए। उमर अब्दुल्ला जैसे कुछ लोग अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर की ब्रह्मनाल के रूप में निरूपित करते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसे अलगाववाद का मुख्य कारक मानते हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट का सातवां संस्करण जैसे जैसे अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, इस खेल का रोमांच और खेल प्रेमियों के बीच उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। हालांकि बीच बीच में आईपीएल के पिछले संस्करण के दौरान की "स्पॉट फिक्सिंग" की घटना से संबंधित खुलासे से मन में कड़वाहट घुल जाती है। फिर अचानक से क्रिकेट के इस प्रारुप पर प्रतिबंध लगाने की मांग शुरू हो जाती है। नाराज लोग विशेषकर खेल विश्लेषक हर तरह की सट्टेबाजी पर रोक लगाने और फिक्सरों और सट्टेबाजों को जेल में डालने की मांग करने लगते हैं। 
देश का राजनीतिक नेतृत्व आदर्शों की दुहाई देता फिरता है लेकिन अपनी सुविधाओं का मोह नहीं छोड़ पाता। आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में बताया गया है कि 22 ऐसे पूर्व मंत्री हैं, जिनका अभी भी सरकारी बंगले पर कब्जा है। इनमें से पांच मंत्री ऐसे हैं, जिन्होंने सितंबर 2012 में ही अपना पद छोड़ दिया था। बंगले पर कब्जा जमाने वालों में कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी और डीएमके के नेता शामिल हैं। हां, इनमें से लालू यादव के अनुरोध पर सरकार ने उन्हें एक साल तक मंत्री वाले बंगले में रहने की इजाजत दे दी है। लेकिन और लोगों ने अनुमति लेने की जरूरत नहीं समझी है
भारत की आर्थिक विकास दर 9 फीसदी सालाना से घटकर 4.5 फीसदी हो जाने की एक बड़ी वजह यह है कि इन्क्लूसिव ग्रोथ के नाम पर न्यायपालिका और विधायिका ने पूरी तरह जायज कारोबार को भी बेहद मुश्किल बना दिया है। अभी एक नई कोयला खदान शुरू करने में 12 साल लग जाते हैं। यह इन्क्लूसिव ग्रोथ नहीं है। इसे ठहराव या गतिहीनता कहते हैं। नए भूमि अधिग्रहण कानून का मकसद है किसानों से जल्दी और विधिसम्मत तरीके से जमीन लेना।
 
लेकिन औद्योगिक नीति और उत्पादन विभाग
देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रेहड़ी पटरी व्यवसायी और फेरीवाले समाज में हमेशा से हाशिए पर रहे हैं। शासन और प्रशासन द्वारा हमेशा से उन्हें शहर की समस्या में ईजाफा करने वाले और लॉ एंड आर्डर के लिए खतरा माना जाता रहा है। हालांकि सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस), नासवी व सेवा जैसे गैर सरकारी संगठन देशव्यापी अभियान चलाकर छोटे दुकानदारों और फेरीवालों की समस्याओं को दूर करने के लिए उचित संवैधानिक उपाय की लंबे समय से मांग करते रहे हैं। इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए पिछले दिनों लोकसभा से प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड

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