सार्वजनिक नीति - कानून और न्यायपालिका - लेख

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समूह ने जेनेटीकली मॉडीफाइड (जीएम) फसलों के फील्ड ट्रायल पर 10 साल की पाबंदी लगाने का सुझाव दिया है। इससे निकट भविष्य में उनकी फसल उगाए जाने की संभावना पर रोक लग जाएगी। कांसार्टियम इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन्स के महासचिव चेंगल रेड्डी ने इसका यह कहकर विरोध किया है कि यह किसानों के हितों के खिलाफ है जिन्हें ज्यादा पैदावार देनेवाली और कम कीटनाशकों का उपयोग करनेवाली जीएम फसलों की जरूरत है। भारतीय उपभोक्ताओं को भी ज्यादा उत्पादन और कीटनाशकों के कम इस्तेमाल से
सेक्शन 66ए को रद्द करने के बाबत सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद से दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा श्रेया सिंघल काफी चर्चा में हैं। यूथ और नेटीजन्स के बीच श्रेया इतनी पॉपुलर हो गई हैं कि दो दिनों से ट्वीटर पर लगातार ट्रेंड कर रही हैं। हालांकि श्रेया खुद ट्वीटर पर नहीं हैं। फेसबुक पर भी श्रेया के कई फैंस क्लब और ग्रूप बन गए हैं। आजादी.मी ने श्रेया सिंघल की इस कामयाबी पर मुबारकबाद दिए और औपचारिक बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश 
 
 
मानविधकारों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट ने यह बहुत ही लैंडमार्क निर्णय दिया है। 107 पेजों में दिए गए इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) असंवैधानिक है। न्यायालय ने कहा कि इस धारा में ऎसे संदेशों या अभिव्यक्ति को आपराधिक बताया गया है जिनका कोई दायरा ही निश्चित नहीं किया जा सकता है।
 
जिनकी कोई सीमा ही नहीं है। किसी को नाराज करने वाले संदेश भेजना,
सरकार में आरक्षण और शिक्षण संस्थाओं, नौकरी में आरक्षण दो अलग अलग मुद्दे हैं। पंचायत में अथवा संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए जो आरक्षण दिया गया है तथा इस दिशा में जो प्रयास किए जा रहे हैं वो उचित हैं। वह इसलिए कि सरकार का तो काम ही होता है कि वह लोगों का प्रतिनिधित्व करे। इसलिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अगर लिंग, समुदाय या क्षेत्र आधारित आरक्षण दिया जाता है तो उसे गलत नहीं कहा जा सकता। पर यही बात नौकरी या शिक्षण संस्थाओं में दिए जाने वाले आरक्षण के बारे में नहीं कही जा सकती।
- जिस विषय पर संसद में बहस होनी चाहिए उस विषय पर सड़क पर हो रहा संघर्षः गुरचरन दास
 
- सरकार ऐसी व्यवस्था सुनिश्चत करे जहां भू स्वामी और खरीददार आपस में सौदा कर सकें: पार्थ जे शाह
 
 
नई दिल्ली स्थित कांस्टिट्यूशन क्लब में गुरूवार को 'लैंड एक्वीजिशन बिल एंड
विपक्ष के विरोध के बावजूद नया भूमि अधिग्रहण बिल कुछ संशोधनों के बाद लोकसभा में पास करा लिया गया। अब बिल उच्च सदन अर्थात राज्यसभा के पाले मे हैं। केंद्र सरकार के लोकसभा में बहुमत और राज्यसभा में अल्पमत में होने के कारण असल चुनौती बिल को इस उच्च सदन से पारित कराना है। हालांकि सीबीआई द्वारा अप्रत्याशित तरीके से पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को बतौर आरोपी समन जारी करने से विपक्षी दलों को ये आरोप लगाने का मौका मिल गया है कि सरकार उसपर दबाव बनाने का काम कर रही है।
 
राजस्थान हाइकोर्ट ने रेहड़ी पटरी विक्रेताओं को बड़ी राहत प्रदान की है। गुरुवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए हाइकोर्ट की जयपुर बेंच ने शहर से रेहड़ी पटरी विक्रेताओं को हटाने और उनके सामानों की जब्ती पर रोक लगा दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को शीघ्र अतिशीघ्र राजस्थान स्ट्रीट वेंडर ऐक्ट 2012 को लागू करने का भी आदेश जारी किया है।  
 
विदित हो कि वर्ष 2012 में प्रवासी दिवस के मौके पर सैकड़ों रेहड़ी पटरी वालों को उनके ठीए से
धन, धन होता है। यह काला और सफेद नहीं होता। धन को काले और सफेद (कानूनी और गैर कानूनी) में विभाजित करना ही असल समस्या है। जैसे ही सरकार अथवा कोई सरकारी संस्था धन को काले या सफेद में वर्गीकृत करती है, उक्त धन अपना नैसर्गिक गुण अर्थात और धन पैदा करने की क्षमता समाप्त कर देता है। किसी देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान, मौजूदा धन की सहायता से और धन पैदा न कर पाने की क्षमता पहुंचाती है। आगे बढ़ने से पहले हमें गैरकानूनी अर्थात काले धन की उत्पत्ति को समझना होगा। मोटे तौर पर काले धन का मुख्य कारण सरकार द्वारा लोगों को अधिक आय अर्जित करने

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