आर्थिक सुधारों का श्रेय मनमोहन और नरसिम्हा राव की ‘जुगलबंदी’ कोः जयराम रमेश

पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने देश में 1991 में हुए आर्थिक सुधारों को भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय नरसिम्हा राव और तत्कालीन वित्तमंत्री डा. मनमोहन सिंह की ‘जुगलबंदी’ का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जीवित होते तो देश को आर्थिक सुधारों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता। वह आर्थिक सुधारों के प्रभाव व इसके पूर्व की व्यवस्था को रेखांकित करते वेबसाइट ‘इंडियाबिफोर91.इन’ का विमोचर कर रहे थे। इस वेबसाइट को थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी द्वारा तैयार किया गया है। इस वेबसाइट पर कोई भी व्यक्ति आर्थिक सुधारों के पूर्व के अपने अनुभवों को साझा कर सकता है।

शनिवार को फिक्की ऑडिटोरियम में आयोजित ‘इंडियाबिफोर91.इन’ वेबसाइट का विमोचन करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने नब्बे क दशक में आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया के दौरान के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि देश में आर्थिक सुधारों के लिए प्रयास सन् 1980 से ही शुरू हो गए थे। उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों के लिए अपने दरवाजे को खोलने को लेकर विपक्ष सहित सरकार में शामिल लोगों का भी विरोध झेलना पड़ा। जयराम रमेश ने बताया कि नरसिम्हा राव की राजनैतिक कुशलता और मनमोहन सिंह की आर्थिक विशेषज्ञता ने इसे संभव कर दिखाया हालांकि उस दौर के वित्तीय संकट ने भी इसमें काफी मदद की।

इस मौके पर सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के अध्यक्ष व जानेमाने अर्थशास्त्री डा. पार्थ जे. शाह ने कहा कि भारत को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी तो सन 1947 में मिल गई थी किंतु आर्थिक आजादी के प्रयास 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद से ही शुरू हुए। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों की गति अत्यंत सुस्त होने के बावजूद लोगों के जीवन स्तर व प्रतिव्यक्ति आय में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। डा. शाह ने आशा व्यक्त की कि वर्तमान मोदी सरकार आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया को न केवल बरकरार रखेंगे बल्कि सुधारों की गति में तीव्रता भी लाएंगे। इस मौके पर फिक्की के सेक्रेटरी जनरल ए दीदार सिंह, अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के पूर्व सदस्य व अर्थशास्त्री अरविंद विरमानी, प्रवीण चक्रवर्ती, आईडीएफसी इक्विटी के पूर्व चेयरमैन लुइस मिरांडा सहित तमाम गणमान्य लोग उपस्थित थे।

- आजादी.मी