‘कास्ट ऑन द मेन्यू कार्ड’ नहीं हुई प्रदर्शित, ‘सोनपुर मेला’ ने लूटी वाहवाही

- रिपील लॉः क्लीन इंडिया, क्लीन स्टेट्यूट्स पर पैनल डिस्कशन के दौरान निर्रथक कानूनों की समाप्ति पर हुई चर्चा       

बीफ मुद्दे के विवाद के कारण सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से प्रदर्शन की अनुमति हासिल करने में नाकाम रहने के कारण डॉक्यूमेंट्री “कास्ट ऑन द मेन्यू कार्ड” अंततः “12वें जीविका एशिया लाइवलीहुड डॉक्यूमेंट्री फेस्टिवल” में प्रदर्शित नहीं हो सकी। इस कारण आयोजकों और डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले छात्रों के साथ ही साथ इसे देखने पहुंच दर्शकों को भी निराशा हाथ लगी। हालांकि बिहार के विख्यात पशुमेले पर आधारित डॉक्यूमेंट्री “सोनपुर मेला” ने लोगों की निराशा को कम करने में सफलता प्राप्त की। इस फिल्म को दर्शकों से जमकर तारीफ मिली। इस दौरान कानून की किताब में दर्ज निरर्थक कानूनों के उन्मूलन के लिए “रिपील लॉः क्लीन इंडिया, क्लीन स्टेट्यूट्स” विषय पर पैनल परिचर्चा भी की गई।

सीरीफोर्ट ऑडिटोरियम में तीन दिनों तक चलने वाले “12वें जीविका एशिया लाइवलीहुड डॉक्यूमेंट्री फेस्टिवल” के दूसरे दिन शनिवार को “सोनपुर मेला”, “चाइनाः फॉर माय ब्लू ब्रदर्स”, “डोन्ट वेस्ट पीपल”, “डा. सरमस्ट्स म्यूजिक स्कूल”, “इनसाइड मी”, “जर, जमीन और जान”, “कास्ट इन इंडिया”, “ए बोहेमियन म्यूजिशियन”, “स्ट्रीट टेल्स”, “कास्ट ऑन द मेन्यू कार्ड”, “स्ट्रीट टेल्स” आदि डॉक्यूमेंट्री फिल्में प्रदर्शित होनी थी। किंतु “बीफ” मुद्दे के कारण उपजे विवाद और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनुमति नहीं मिलने के कारण डॉक्यूमेंट्री “कास्ट ऑन द मेन्यू कार्ड” का प्रदर्शन नहीं किया जा सका। इस दौरान इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म को बनाने वाले टाटा इस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई के छात्रों, फेस्टिवल के आयोजकों और इसे देखने पहुंचने वाले दर्शकों को निराशा झेलनी पड़ी। हालांकि इस निराशा को सुदेश उन्नीरामन निर्मित “सोनपुर मेला” ने काफी हद तक कम करने में सफलता हासिल की। यह फिल्म को दर्शकों व समीक्षकों से सराहना हासिल करने में सफल रही। इस दौरान निरर्थक कानूनों के उन्मूलन के लिए “रिपील लॉः क्लीन इंडिया, क्लीन स्टेट्यूट्स” विषय पर एक पैनल परिचर्चा का भी आयोजन किया गया। परिचर्चा के दौरान दिल्ली सरकार की पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा, नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के शुभो रॉय, आमआदमी पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा, सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट विक्रमजीत बैनर्जी मौजूद रहें। परिचर्चा का संचालन आई-जस्टिस के एडवोकेट प्रशांत नारंग ने किया।

फिल्म के बाद दर्शकों से चर्चा के दौरान डॉक्यूमेंट्री “सोनपुर मेला” निर्माता सुदेश उन्नीरामन ने बताया कि बिहार के सोनपुर में गंडक नदी के तट पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले पशु मेला को एशिया के सबसे बड़े मेले का तमगा हासिल है। किंतु यह मेले के अतिरिक्त आस्था और अर्थ का अभूतपूर्व संगम भी है। कार्तिक पूर्णिमा के स्नान और हरिहरनाथ की पूजा अर्चना के साथ शुरू होने वाले मेले में हाथी, घोड़े, बकरियों आदि के अलावा कपड़े, खिलौने, मिठाईयां व दैनिक उपभोग की समस्त चीजें कम कीमत पर आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। यही कारण हैं कि मॉल्स, शॉपिंग कॉम्पलेक्स और मल्टीप्लेक्स की चकाचौंध के बावजूद सोनपुर मेले की लोकप्रियता में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है।

 

- आजादी.मी

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