गरीबों के नाम पर बनने वाली नीतियों की गरीबों पर ही पड़ती है मार

गरीबों के नाम पर सरकारों द्वारा बनायी जाने वाली लोक लुभावनी नीतियां, लाभकारी कम और नुकसान दायक ज्यादा होती हैं। सरकारें टैक्स के नाम पर पहले तो करदाताओं के खून पसीने से अर्जित की गई गाढ़ी कमाई की उगाही करती हैं और बाद में विभिन्न सेवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराने के नाम पर वोट बैंक की राजनीति करती हैं। यह तब है जबकि दुनियाभर के उदाहरणों से यह सिद्ध होता है कि मुफ्त चीजें उपलब्ध कराने की योजनाओं ने समस्या को कम करने की बजाए उन्हें बढ़ाया ज्यादा है। कल्याणकारी सरकारों द्वारा जन कल्याण के नाम पर बनायी जाने वाली योजनाओं और उनके परिणामों से पत्रकारों को अवगत कराने के लिए सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस), आजादी.मी व फ्रेडरिक न्यूमन फाऊंडेशन (एफएनएफ) के संयुक्त तत्वावधान में एक तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
 
जयपुर के होटल जयपुर ग्रीन में आयोजित आई-पॉलिसी नामक इस कार्यशाला में पारिस्थितिक (पर्यावरण) चुनौतियों, आजीविका की समस्या, शिक्षा, गुड गवर्नेंस आदि विषयों पर चर्चा की गई। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों द्वारा अपनी अपनी विशेज्ञता वाले विषयों पर पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिया गया। वर्कशॉप में दो डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का भी प्रदर्शन किया गया। इस दौरान दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, ऑल इंडिया रेडियो सहित विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकारों व संपादकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। कार्यशाला के समापन के बाद ग्रेजुएशन सेरेमनी का भी आयोजन किया गया और शामिल प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। वर्कशॉप के दौरान उभर कर आए कुछ विषय निम्न हैं:
 
अच्छी नीति की मदद से समाजिक परिवर्तन
वर्कशॉप के दौरान सीसीएस के सीओओ हर्ष श्रीवास्तव ने कुछ ऐसी नीतियों पर प्रकाश डाला जिनके होने के कारण बेवजह जनता की आर्थिक, सामाजिक व राजनैति आजादी प्रभावित होती है। हर्ष ने विभिन्न देशों की समस्याओं और उनके समाधान का उदाहरण देते हुए बताया एक छोटी सी पॉलिसी किस प्रकार लोगों का जीवन बदल सकती है। उन्होंने रेहड़ी-पटरी वालों, रिक्शा चालकों व फल, सब्जी बेचने जैसे छोटे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों में लिप्त लोगों की समस्याओं के कारणों व उनके समाधानों पर भी बात की।
 
छोटे व कम फीस वाले स्कूल, सरकारी स्कूलों से है बेहतर
स्कूल व स्कूली शिक्षा की समस्याओं व समाधानों पर चर्चा करते हुए शांतनु गुप्ता ने बताया कि तमाम शोधों व सर्वेक्षणों से यह साबित हो चुका है कि सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन के मुकाबले निजी स्कूल न केवल बेहतर हैं बल्कि उनमें पढ़ने वाले छात्रों का प्रदर्शन भी तुलनात्मक रूप से अच्छा है। उन्होंने बताया कि एक तरफ सरकार स्कूलों को फीस बढ़ाने से रोकती है, दूसरी तरफ उनमें कार्यरत अध्यापकों का वेतन छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के बराबर करने की बात की जाती है। शांतनु ने बताया कि किस प्रकार सरकारी अध्यापकों का यूनियन अपने हितों को पूरा कराने में सक्षम होता है और अभिभावकों व छात्रों के हितों की अनदेखी करता है। जबकि निजी स्कूलों में अभिभावकों और छात्रों की बात ज्यादा सुनी जाती है और उनपर अमल भी किया जाता है।  
 
गरीबों को मिले संपत्ति का अधिकार
गुजरात से आए वक्ता अम्बरीश मेहता ने बताया कि जैसे ही संपत्ति के अधिकार की बात होती है, इस अधिकार प्रोजेक्शन कुछ इस प्रकार किया जाता है जिससे लोगों में यह संदेश जाता है कि यह अधिकार केवल अमीरों के हित में हैं और इससे गरीबों का भला नहीं होता है। उन्होंने आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन जैसी संपत्तियों का स्मरण कराते हुए बताया कि अमीरों की संपत्ति तो सुरक्षित होती है लेकिन गरीबों की संपत्ति पर सरकार निगाह होती है और इसे किसी प्रकार भी छीन लेना चाहती है।
 
जनमाध्यमों के लिए एजेंडा का होना जरूरी
राजस्थान पत्रिका समूह की समाचार संपादक शिप्रा माथुर ने पत्रकारों से जन कल्याण के मुद्दों को एजेंडा बनाने और उन्हें प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने राजस्थान में मोबाइल टॉवरों की बढ़ती संख्या, मानकों की अनदेखी और इससे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के मुद्दे पर अपनी संस्था द्वारा चलाई गई मुहिम का उदाहरण दिया। उन्होंने पत्रकारों से रूटीन के कार्यों से इतर जन कल्याण की खबरों पर भी जोर देने की बात कही।
 
जनसंख्याः समृद्धि का एक कारण
सीसीएस द्वारा संचालित आई-जस्टिस से जुड़े वकील प्रशान्त नारंग ने लोगों की उन भ्रांतियों से पर्दा हटाने का काम किया जो कि यह मानते थे कि सभी समस्याओं की जड़ जनसंख्या का बढ़ना है। उन्होंने सिंगापुर, लंदन, पेरिस आदि तमाम शहरों का उदाहरण देते हुए समझाया कि वहां की जनसंख्या का घनत्व भारत की जनसंख्या के घनत्व से अधिक है फिर भी उन देशों ने अपनी नीतियों में परिवर्तन कर समस्याओं का समाधान ढूंढ लिया है। विभिन्न देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंनें यह भी बताया कि किस प्रकार जनसंख्या समृद्धि का कारण बनती है।  
 
सरकार वही करे, जिसे जनता ना कर सके
वर्कशॉप के दौरान सीसीएस के सदफ हुसैन ने बताया कि किस प्रकार एक अच्छी लोकनीति को बनाते समय सरकार को उन क्षेत्रों से अलग रखना चाहिए जहां निजी तौर पर बेहतर काम किया जा रहा हो। सदफ ने बताया कि जब सरकार सबकुछ करने का प्रयास करती है तो समस्या वहीं से शुरू होने लगती है। लेकिन यदि समस्या के समाधान की जिम्मेदारी सामूहिक से सामूदायिक और फिर सामुदायिक से निजी स्तर तक पहुंचने लगती है तो उसका हल आसानी से निकलने लगता है। इस बात को सिद्ध करने के लिए सदफ ने पोल गेम व बेनडाना गेम का भी आयोजन किया।
 
- अविनाश चंद्र

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