पत्रकारों के लिए अगली ipolicy उत्तराखंड के नौकुचियाताल में, आवेदन शुरू

थिंकटैंक सेंटर फार सिविल सोसायटी (सीसीएस), उदारवादी वेबपोर्टल आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग कार्यक्रम ipolicy 2017. 16-18 जून 2017 तक एटलस नेटवर्क व एडलगिव के संयुक्त तत्वावधान में पत्रकारों के लिए ipolicy (लोकनीति में सर्टिफिकेट) कार्यक्रम के आयोजन के लिए इस बार उत्तराखंड के रमणीय स्थल नौकुचियाताल का चयन किया गया है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदन करने की की अंतिम तिथि 31 मई 2017 थी जिसे बढ़ाकर अब 5 जून कर दिया गया है। इस तीन दिवसीय (दो रात, तीन दिन) आवासीय कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक समस्याओं के मूल कारणों, सरकारी नीतियों का शिक्षा, रोजगार, सुशासन आदि पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा परिचर्चा और सार्थक विमर्श करना है। यह कार्यक्रम पत्रकारों को खबर खोजने तथा घटनाओं और प्रवृत्तियों के तीक्ष्ण विश्लेषण के लिए नई दृष्टि प्रदान करेगा।

विशेषज्ञों के साथ लोकनीतियों के बाबत चर्चा परिचर्चा करने के बाद पत्रकार इसे लेकर ज्यादा सजग और जिज्ञासु हो जाता है और लोक नीतियों के निर्माण के दौरान नीति, नियत, इरादतन और उसके गैर इरादतन परिणामों के बीच फर्क करने में और अधिक सक्षम होता है। जबकि अक्सर इस बात की अनदेखी हो जाती है कि विकासात्मक कार्यों के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं और सामाजिक संघर्ष की स्थिति पैदा होने में नीतियों की सीधी भूमिका होती है। सेंटर फार सिविल सोसायटी का उद्देश्य यह समझ पैदा करना है कि किस तरह सामाजिक समस्याएं वर्तमान नीतियों का परिणाम हैं या वह खराब नीतियों के कारण बिगड़ती जा रही हैं। सामाजिक बदलाव को प्रभावित करने के लिए लोक नीति पर ध्यान केंद्रित करके ipolicy भारतीय पत्रकारिता की गुणवत्ता और नैतिक आधार को मजबूत बनाना चाहती है।

पत्रकारों के लिए कुछ बुनियादी लाभ

• भारत के प्रमुख जनमत निर्माताओं, समीक्षकों, ब्लागरों और रिपोर्टरों से संपर्क और उनके अनुभवों के बारे में जानने का अवसर। साथ ही पब्लिसिटी, एडवोकेसी और रिपोर्टिंग तकनीक की नवीनतापूर्ण जानकारी।
• वर्तमान सामाजिक समस्याएं और शासन की स्थिति को सुधारने और सभी गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ मुहैया कराने में सरकार, बाजार और सिविल सोसायटी की भूमिकाओं को परिभाषित करना।
• वस्तुनिष्ठ तथ्यों और आत्मनिष्ठ दृष्टिकोणों के अंतर को स्पष्ट करना।
• समाज के उत्थान में शिक्षा की भूमिका और इसके विभिन्न पहलुओं (आरटीई, नई शिक्षा नीति आदि) पर व्यापक चर्चा करना।

मीडिया संस्थाओं को बुनियादी लाभ

रिपोर्टिंग की गुणवत्ता में सुधार, जैसे मुख्य मुद्दों के गहन विश्लेषण के द्वारा तथ्यों और राय के बीच के घालमेल को कम करना और पाठकों को वास्तविक और समसामयिक समाधानों से अवगत कराना। लोक नीति और विकास की दिशा को तय करने में लोक नीति की भूमिका के बारे में समझ बढ़ाना। नीति निर्माताओं को सोचने और सवाल करने के तरीके उपलब्ध कराना।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिल्ली, जयपुर, मसूरी, जिम कॉर्बेट, सरिस्का आदि में ipolicy कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें एसोशिएट प्रेस, पीटीआई, लोकसभा टीवी, एनडीटीवी, दूरदर्शन, जी न्यूज, टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, बीबीसी जैसे मीडिया संगठनों के पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इन कार्य़क्रमों में भाग लेने वाले पत्रकारों ने अपने संगठनों में लौटकर अपने साथियों को उन बातों से अवगत कराया जो उन्होंने इन पाठ्यक्रमों में सीखीं थीं और जिन मुद्दों में उनकी दिलचस्पी थी उन पर दीर्घकालिक कार्य़ शुरू किया।

कौन भाग ले सकता है ?

ipolicy में हिस्सा लेने के लिए समस्त जनसंचार माध्यमों जैसे कि समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज चैनलों, न्यूज एजेंसियों, रेडियो आदि में कार्यरत संवाददाता, फीचर लेखक, उप संपादक, सह संपादक, प्रोड्यूसर और एंकर योग्य हैं। ऑनलाइन माध्यमों और फ्रीलांस पत्रकारों के आवेदनों को भी उनके कार्यों और अनुभव के आधार पर कार्यक्रम में सम्मिलत किया जा सकता है। अंतिम तिथि तक प्राप्त आवेदनों में से योग्यता के आधार पर चयन किया जाता है। कुल सीटों की संख्या अधिकतम 26 है। कार्यक्रम में विभिन्न जनमाध्यमों के यूपी यूनिट में शिक्षा बीट को कवर कर रहे पत्रकारों को अतिरिक्त वरीयता प्रदान की जाएगी।

भाग लेने की प्रक्रिया

कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक पत्रकारों को 5 जून से पूर्व https://goo.gl/forms/orMDZggwd2SSv38l1 पर क्लिक कर आवेदन करना होगा। आवेदन पत्र में वर्णित समस्त सूचनाओं का सही जवाब देना आवश्यक है। आवेदन के दौरान अपनी बाइलाइन खबरों का लिंक एवं मीडिया संस्थान द्वारा जारी परिचय पत्र की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी। पूर्णतया भरे गए फार्मों का विश्लेषण करने के पश्चात सीसीएस के द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को ईमेल व फोन के द्वारा सूचित किया जाएगा। चयन की सूचना देने वाले ईमेल में कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवश्यक फीस की राशि की सूचना और इसे जमा कराने के लिए लिंक प्रदान किया जाएगा। पेमेंट होने के बाद ही चयन की प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।

कृपया ध्यान दें :

• आवेदन व मनोनयन पत्र https://goo.gl/forms/orMDZggwd2SSv38l1 से प्राप्त किए जा सकते हैं। 
• चुने गए प्रतिभागियों के लिए पाठ्यक्रम की पूरी अवधि के दौरान उपस्थित रहना होगा। तभी उन्हें लोकनीति के बारे में प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
• कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन के लिए 2000 रुपए का शुल्क लिया जाएगा जिसमें से 1500 रूपए कार्यक्रम के समापन पर रिईम्बर्स कर दिया जाएगा। कार्यक्रम के लिए चयनित प्रतिभागी कार्यक्रम के आयोजन की तिथि के एक सप्ताह पूर्व तक अपने नाम वापस ले सकते हैं। एक सप्ताह के से कम समय बाकी रहने पर नाम वापस लेने पर आवेदन राशि वापस नहीं की जाएगी। प्रतिभागियों को आयोजकों की पूर्व अनुमति के बगैर कार्यक्रम स्थल छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। कार्यक्रम स्थल पर दो रात व तीन दिन तक ठहरने, ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर, चाय/कॉफी आदि की व्यवस्था सीसीएस द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम स्थल तक जाने के लिए लखनऊ से बस की व्यवस्था की जाएगी। सभी प्रतिभागियों को अपने शहर से लखनऊ आने व लखनऊ से अपने शहर वापस लौटने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। पर्याप्त संख्या में प्रतिस्पर्धी आवेदन प्राप्त होने की स्थिति में कार्यक्रम स्थल के लिए दिल्ली अथवा नोएडा से वाहन की व्यवस्था करने पर विचार किया जा सकता है।

नोटः भरे हुए आवेदन पत्र 5 जून 2017 तक मिल जाने चाहिए। 5 जून के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

किसी भी अन्य जानकारी के लिए अविनाश चंद्र – 9999882477, 26537456 विस्तार 47 पर कॉल कर अथवा avinash@ccs.in पर ईमेल कर संपर्क किया जा सकता है।

सेंटर फार सिविल सोसायटी के बारे में

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी की स्थापना 15 अगस्त, 1997 को की गई थी। यह एक दिल्ली स्थित एक स्वतंत्र, लाभ न कमाने वाला, अनुसंधान और शैक्षिक थिंक टैंक है। जो नागरिक समाज को पुर्नजीवित करते हुए और राजनीतिक समाज की पुनर्रचना के द्वारा भारत के समस्त नागरिकों के लिए अवसर और समृद्धि बढ़ाने, जीवन की गुणवता में सुधार लाने के काम में लगा हुआ है। हमारा उद्देश्य है मुख्य नीतिगत मुद्दों विशेषकर सुशासन, जीविका और शिक्षा के क्षेत्र में बाजार आधारित समाधान और नवीनतापूर्ण सामाजिक समुदायिक संसाधन बनकर लोकनीति के जरिये सुधार लाना। हम अनुसंधान कार्यक्रमों, सेमिनारों और प्रकाशनों के माध्यम से लोगों के विचारों, अभिमतों और विचार पद्धति में परिवर्तन लाने की कोशिश करते हैं। हम सीमित नियंत्रण, विधि सम्मत शासन, मुक्त व्यापार और व्यक्तिगत अधिकारों की हिमायती हैं। सीसीएस पत्रकारों, यंग लीडर्स, डेवलपमेंट लीडर्स के लिए शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है जहां प्रतिभागी समाजिक समस्याओं के नीति आधारित समाधानों पर मंथन करते हैं।

आजादी.मी के बारे में

हिंदीभाषियों को उदारवादी मुद्दों पर अंर्तदृष्टि और सुझाव देने के लिए वेबसाइट है azadi.me। यह सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी (www.ccs.in), एटलस वैश्विक पहल (http://atlasnetwork.org/globalinitiative/) एवं केटो इंस्टीट्यूट (www.cato.org) की संयुक्त नई पहल है। इस वेबसाइट में उदारवादियों के उच्च कोटि के लेखन-कार्य, समकालीन समस्याओं के स्वतंत्र विचारों के आवेदन, ब्लॉग, चर्चा बोर्ड और अन्य उदारवादी संस्थाओं की विचारधारा के प्रकाशन, शोधपत्र, वीडियो, पोडकास्ट आदि होंगे। यह वेबसाइट कानून बनानेवालों और हिंदी समुदाय से संपर्क बनाने का एक शक्तिशाली एवं प्रभावशाली साधन होगा जिसकी पहुंच अंग्रेजी संचार की अपेक्षा भारत में बड़े पैमाने पर है।