पत्रकारों के लिए आई पॉलिसीः लोकनीति में प्रमाण पत्र, 16-18 दिसंबर 2016

पत्रकारों के लिए आई पॉलिसी

सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) व एटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में भारत के एकमात्र उदारवादी हिंदी वेबपोर्टल आजादी.मी एक बार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए आई पालिसी (लोकनीति में सर्टिफिकेट) कार्यक्रम। पत्रकारों के लिए 16-18 दिसंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय (दो रात, तीन दिन) आवासीय कार्यशाला (वर्कशॉप) में सामाजिक समस्याओं के मूल कारणों और शिक्षा, आजीविका, सुशासन आदि पर सरकारी नीतियों के पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा परिचर्चा की जाएगी। यह कार्यक्रम पत्रकारों को खबर खोजने तथा घटनाओं और प्रवृत्तियों के तीक्ष्ण विश्लेषण के लिए नई दृष्टि प्रदान करेगा।

लोक नीतियों के बारे में समझ बढ़ने से पत्रकार तब ज्यादा सजग और जिज्ञासु हो जाता है जब लोक नीतियों के इरादों और उसके गैर इरादतन परिणामों के बीच फर्क करना होता है। विकास और इससे जुड़े प्रभावों की समस्याओं और सामाजिक संघर्ष पैदा करने में सीधी भूमिका होती है, किंतु प्रायः इस बात को हल्के में ले लिया जाता है। सेंटर फार सिविल सोसायटी का उद्देश्य यह समझ पैदा करना है कि किस तरह सामाजिक समस्याएं सीधे सीधे खराब लोक नीतियों से जुड़ी होती हैं अथवा खराब नीतियों के कारण बिगड़ती जाती हैं। लोक नीतियों पर ध्यान केंद्रीत करके समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा नकारात्मक प्रभाव को रोकने लिए आई पालिसी कार्यशाला भारतीय पत्रकारिता की गुणवत्ता और नैतिक आधार को मजबूत बनाना चाहती है।

पत्रकारों के लिए कुछ बुनियादी लाभ

• भारत के प्रमुख जनमत निर्माताओं, समीक्षकों, ब्लागरों और रिपोर्टरों से संपर्क और उनके अनुभवों के बारे में जानने का अवसर।
• पब्लिसिटी, एडवोकेसी और रिपोर्टिंग तकनीक की नवीनतापूर्ण जानकारी।
• वर्तमान सामाजिक समस्याएं और शासन की स्थिति को सुधारने और सभी गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ मुहैया कराने में सरकार, बाजार और सिविल सोसायटी की भूमिकाओं से अवगत होने व उन्हें परिभाषित करने का अवसर।
• वस्तुनिष्ठ तथ्यों और आत्मनिष्ठ दृष्टिकोणों के अंतर को स्पष्ट करना।

मीडिया संस्थानों को बुनियादी लाभ

रिपोर्टिंग की गुणवत्ता में सुधार, मुख्य मुद्दों के गहन विश्लेषण के द्वारा नीति निर्धारकों द्वारा तथ्यों और राय के बीच के घालमेल करने के प्रयास को कम करना और पाठकों को वास्तविक और समसामयिक समाधानों से अवगत कराने में सहायता। विकास की दशा और दिशा को तय करने में लोक नीतियों की भूमिका के बारे में समझ बढ़ाना। नीति निर्माताओं को सोचने और सवाल करने के तरीके उपलब्ध कराना।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऋषिकेश, जिम कॉर्बेट, दिल्ली, जयपुर, मुंबई आदि शहरों में इस तरह के पाठ्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें एसोशिएटेड प्रेस, पीटीआई, लोकसभा टीवी, आईबीएन7, एनडीटीवी, लाइव इंडिया, जी न्यूज, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, प्रभात खबर, संडे इडियन जैसे मीडिया संगठनों के पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इन कार्य़क्रमों में भाग लेने वाले पत्रकारों ने अपने संगठनों में लौटकर अपने साथियों को उन बातों से अवगत कराया जो उन्होंने इन पाठ्यक्रमों में सीखीं थीं, और जिन मुद्दों में उनकी दिलचस्पी थी उन पर दीर्घकालिक कार्य़ शुरू किया।

कौन भाग ले सकता है ? 

प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक/रेडियो आदि मीडिया संस्थानों में कार्यरत वरिष्ठ संवाददाता, फीचर लेखक, उप-संपादक, सह-संपादक, प्रोड्यूसर और एंकर आदि इस वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आमंत्रित हैं। ऐसे प्रतिभागी जो फ्रीलांस पत्रकार हैं और जिनका कोई फिक्स कॉलम किसी अखबार, मैगजीन अथवा न्यूज पोर्टल पर है, वे भी आवेदन करने के पात्र हैं। वर्कशॉप में केवल 25 आवेदक शामिल हो सकते हैं जिनका चयन अंतिम तिथि से पूर्व तक प्राप्त आवेदनों में से योग्यता के आधार पर किया जाता है।

रजिस्ट्रेशन शुल्क 

वर्कशॉप में हिस्सा लेने के लिए आवेदन और चयन के पश्चात रजिस्ट्रेशन शुल्क के तौर पर 2,500/- (पच्चीस सौ रूपए) चेक के द्वारा जमा कराने होंगे। इस शुल्क में दिल्ली से वर्कशॉप स्थल तक आने व जाने, तीन दिन (दो रात व तीन दिन) तक ठहरने, खाने-पीने का खर्च शामिल है। प्रतिभागियों के द्वारा वर्कशॉप को सफलता पूर्वक पूरा करने के पर 2,000/- (दो हजार रूपए) वापस कर दिए जाएंगे। इस प्रकार वर्कशॉप के लिए वास्तविक रजिस्ट्रेशन शुल्क मात्र 5,00/- (पांच सौ रुपए) हैं।

कृपया ध्यान दें

• कार्यक्रम से संबंधित विस्तृत जानकारी व आवेदन पत्र (http://ccs.in/application-form-ipolicy-journalists-2016(http://ccs.in/ipolicy-journalists) (http://ccs.in/event/detail/234). से प्राप्त किए जा सकते हैं। 

• चुने गए प्रतिभागियों के लिए वर्कशॉप की पूरी अवधि के दौरान उपस्थित रहना होगा। तभी उन्हें आई-पॉलिसी में भागीदारी का सर्टिफिकेट व 2,000/- (दो हजार रुपए) वापस किए जाएंगे।
• वर्कशॉप में शामिल न हो पाने की स्थिति में रजिस्ट्रेशन शुल्क की राशि वापस नहीं की जाएगी।

सभी आवेदन और मनोनयन पत्र अंतिम तिथि 8 दिसंबर 2016 तक प्राप्त हो जाने चाहिए।

किसी भी अन्य जानकारी के लिए अविनाश चंद्र, संपादक आजादी.मी से – 9999882477 या 011 26537456 विस्तार 21 पर संपर्क करें अथवा avinash@ccs.in पर ईमेल करें...

सेंटर फार सिविल सोसायटी के बारे में
सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी की स्थापना 15 अगस्त, 1997 को की गई थी। यह एक दिल्ली स्थित एक स्वतंत्र, लाभ न कमाने वाला, शोध आधारित शैक्षणिक थिंकटैंक है। यह नागरिक समाज (सिविल सोसायटी) को पुर्नजीवित करते हुए और राजनीतिक समाज की पुनर्रचना के द्वारा भारत के समस्त नागरिकों के लिए अवसर और समृद्धि बढ़ाने, जीवन की गुणवता में सुधार लाने के काम में लगा हुआ है। हमारा मुख्य उद्देश्य नीतिगत मुद्दों विशेषकर सुशासन, जीविका और शिक्षा के क्षेत्र में विकल्प और जवाबदेही आधारित समाधान और नवीनतापूर्ण सामाजिक व समुदायिक संसाधन बनकर लोकनीति के जरिये सुधार लाना है। हम अनुसंधान कार्यक्रमों, सेमिनारों और प्रकाशनों के माध्यम से लोगों के विचारों, अभिमतों और विचार पद्धति में परिवर्तन लाने की कोशिश करते हैं। हम सीमित नियंत्रण, विधि सम्मत शासन, मुक्त व्यापार और व्यक्तिगत अधिकारों की हिमायती हैं। सीसीएस अकादमी पत्रकारों, यंग लीडर्स, डेवलपमेंट लीडर्स के लिए शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन करती है। जहां प्रतिभागी समाजिक समस्याओं के नीति पर आधारित  समाधानों पर मंथन करते हैं।

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