आने वाले समय में चीन को पछाड़ देगा भारत

पिछले कई दशकों तक भारत भुखमरी, फॉरेन एड और घूसखोरी में दुनिया में नंबर वन रहा, लेकिन साल 2000 से शुरू हुआ नया दशक हर दौड़ में पिछड़ने वाले इस देश के संभावित महाशक्ति में बदलने का गवाह बना। 21वीं सदी का एक और दशक पूरा करने पर यानी 2020 में भारत का स्वरूप क्या होगा, इस बारे में पेश हैं 8 संभावनाएं।

  1. भारत दुनिया की इकनॉमी में सबसे तेजी से बढ़ने वाले देश के तौर पर चीन को पीछे छोड़ देगा। चीन धीरे-धीरे बूढ़ों के देश में बदलता जाएगा और घटती वर्कफोर्स के कारण मजबूर होकर उसे अपनी करंसी का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। इसलिए इसकी ग्रोथ दर कमजोर पड़ेगी, ठीक उसी तरह, जैसे जापान 1980 के दशक तक अजेय दिखने के बाद 1990 के दशक में धीमा पड़ता गया। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद चीन का निर्यात आधारित कारोबारी मॉडल धीरे-धीरे फीका पड़ने लगेगा क्योंकि दुनिया उस समय पहले की तरह उसके निर्यात की खपत कर पाने में सक्षम नहीं होगी। इस बीच भारत पहले से ज्यादा शिक्षित वर्कफोर्स के साथ बढ़त कायम कर लेगा। भारत के गरीब राज्य धीरे-धीरे धनी राज्यों के मुकाबले खड़े होने लगेंगे। इससे भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2020 तक 10 फीसदी तक पहुंच जाएगी, जबकि चीन की 7-8 फीसदी रह जाएगी।
  2. अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत अंग्रेजी बोलने वालों का दुनिया में सबसे बड़ा देश बन जाएगा। इसलिए ग्लोबल पब्लिशिंग इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर भारत की ओर रुख करेगी। रुपर्ट मर्डोक के उत्तराधिकारी अपने ढहते हुए मीडिया साम्राज्य को भारतीय खरीदारों को बेच देंगे। न्यू यॉर्क टाइम्स एक बड़े भारतीय पब्लिशर्स की सब्सिडियरी बन जाएगा।
  3. साल 2000 से शुरू हुए दशक में आखिरकार भारत पर से तमाम परमाणु प्रतिबंध उठा लिए गए और इसने परमाणु क्लब की सदस्यता की ओर कदम बढ़ा दिया। साल 2020 तक भारतीय कंपनियां परमाणु उपकरणों की प्रमुख निर्यातक के तौर पर उभरेंगी और ग्लोबल सप्लाई चेन की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगी। इसलिए उस समय दूसरों पर परमाणु प्रतिबंध लगाने की कुंजी भारत के पास होगी।
  4. अमेरिका और कनाडा के साथ मिलकर भारत समुद्र की सतह पर ठोस रूप में पाई जाने वाली गैस हाइड्रेट्स से नेचुरल गैस निकालने की नई प्रौद्योगिकी विकसित करेगा। भारत के पास दुनिया में गैस हाइड्रेट्स का सबसे बड़ा भंडार है, जिसके बूते यह दुनिया का सबसे बड़ा गैस उत्पादक बन जाएगा। यह भारत को बिजली उत्पादन में कोयला की जगह गैस का इस्तेमाल करने में सक्षम बनाएगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में बड़े पैमाने पर कमी होगी और जयराम रमेश को संतों के समान शांति मिल जाएगी।
  5. भारत गंगा की गोद में बसे प्रदेशों- असम, राजस्थान और गुजरात में मौजूद विशाल शेल फॉर्मेशन से शेल गैस निकालना शुरू कर देगा। नई तकनीक ने शेल गैस के निकास को काफी सस्ता कर दिया है। इसके कारण भारत गैस का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक बन जाएगा। इस बीच ईरान की जनता मुल्लाओं को उखाड़ फेंकेगी और वहां एक नया लोकतांत्रिक शासन स्थापित होगा। इस शासन के कारण आर्थिक वृद्धि दर में तेजी आएगी और 2020 तक वहां गैस की कमी महसूस की जाने लगेगी। ऐसे में भारत-ईरान के बीच पाइपलाइन परियोजना फिर से प्रासंगिक हो जाएगी, लेकिन इस बार गैस भारत से ईरान को निर्यात की जाएगी।
  6. भारत के ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र अलग राज्य बनाने की मांग करेंगे। साल 2020 तक मौजूदा 28 राज्यों की जगह देश में 50 राज्य होंगे। नए राज्य भी कोई बहुत छोटे नहीं होंगे। करीब 1.5 अरब जनसंख्या और 50 राज्यों के साथ भारत के हर राज्य में करीब 3 करोड़ लोग होंगे, जो अमेरिका के हर राज्य की औसतन 60 लाख जनसंख्या से फिर भी ज्यादा होंगे।
  7. भारत के उत्थान से चिंतित चीन हिमालय की सीमा पर तनाव बढ़ाएगा। चीन तिब्बत से आने वाली ब्रह्मपुत्र नदी को पानी की कमी वाले उत्तरी चीन की ओर मोड़ने की धमकी देगा। भारत ऐसी किसी परियोजना को बम से उड़ा देने की धमकी देगा। यह मुद्दा सुरक्षा परिषद में जाएगा।
  8. इस्लामिक कट्टरपंथी अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर कब्जा कर लेंगे। अमेरिका इस क्षेत्र से पूरी तरह बाहर हो जाएगा और इसके नतीजों को भुगतने के लिए भारत बच जाएगा। देश में आतंकवाद का जोर बढ़ेगा, लेकिन इकनॉमी भी लगातार बढ़ती जाएगी। ऐसा कैसे? मुंबई की उपनगरीय रेल से गिरकर हर साल 3,000 लोग मर जाते हैं और इससे मुंबई की ग्रोथ पर कोई असर नहीं पड़ता। आतंकवाद से भारत परेशान जरूर होगा, लेकिन इसकी ग्रोथ पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

- स्वामीनाथन अय्यर