कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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लोकतंत्र बचाने का तीन सूत्रीय एजेंडा
 
पिछले दो दशकों में भारत का आर्थिक उदय उल्लेखनीय घटना है। इसने करोड़ों लोगों को घोर गरीबी से निकालकर ठोस मध्यवर्ग  बनाया है। बहुत ही खराब शासन (उत्तरप्रदेश में तो आपराधिक शासन) के बीच समृद्धि हासिल की गई है। दुर्गा शक्ति प्रकरण सार्वजनिक जीवन में आपराधिक व्यवहार का ताजा मामला है। उत्तरप्रदेश के लोगों ने जब अखिलेश यादव में भरोसा जताया तो उन्हें लगा कि वे अलग प्रकार की सरकार चुन रहे
Published on 20 Aug 2013 - 13:58

 

क्रिकेट के इंडियन प्रीमियम लीग में फिक्सिंग घोटाला हमारे राष्ट्रीय जीवन के बीमार और कभी खत्म न होने वाले राष्ट्रीय पतन की एक और अपमानजनक कहानी है। हम प्रशासन और कानूनी संस्थाओं पर आरोप लगाने के इतने अभ्यस्त हो चुके हैं कि हम भूल गए कि हमारी दयनीय शिक्षा प्रणाली भी इसके लिए जिम्मेदार है। और हां, माता-पिता भी दोषी हैं, क्योंकि घर हमारे नैतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिर भी एक प्रेरणादायक शिक्षक एक युवक के नैतिक मूल्यों में परिवर्तन ला सकता है। यह निष्कर्ष है 33 वर्षीय हार्वर्ड अर्थशास्त्री राज

Published on 2 Jul 2013 - 17:48

 

भारत में जहां सरकार की जरूरत नहीं है, वहां आम आदमी लाल फीताशाही में मीलों तक जकड़ा है लेकिन जहां उसकी बहुत ज्यादा जरूरत है-उदाहरण के तौर पर सड़कों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए- वहां सिपाही गायब हैं। 2014 के आम चुनाव में मतदाता दुविधा में होगा। उसे विकास, रोजगार और धर्म निरपेक्षता, बहुलता के बीच चुनाव करना पड़ेगा। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व और 2014 में एक संभावित प्रधानमंत्री के रूप में गंभीर दावेदार के तौर पर 62 वर्षीय नरेंद्र मोदी के अचानक उभरने से देश में एक तूफान सा आ गया है।
Published on 9 May 2013 - 18:56

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