कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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वर्ष 2014 में भारत के समक्ष जो सबसे बड़ी संभावना और चुनौती होगी, वह आर्थिक विकास की उच्च दर को वापस लौटाने की होगी, जैसा कि कुछ वर्ष पहले था। यह केवल उच्च विकास ही है जो हमारे देश की सतत समृद्धि को सुनिश्चित करेगी। 2014 के आम चुनावों में हमें अवश्य ही एक ऐसे उम्मीदवार और पार्टी के पक्ष में मतदान करना चाहिए जो विकास को वापस पटरी पर लौटा सके।

हमें नहीं भूलना चाहिए कि अर्थव्यवस्था में एक फीसद की बढ़ोतरी से प्रत्यक्ष तौर पर 15 लाख

Published on 30 Dec 2013 - 15:37

लंबे वक्त के बाद आखिर भारतीय लोकतंत्र सही दिशा में जाता दिखाई दे रहा है और आगामी चुनाव में मतदाताओं के सामने अच्छे विकल्प मौजूद हैं। इसमें एक विकल्प वाम-मध्यमार्गी और दक्षिण-मध्यमार्गी आर्थिक नीतियों के बीच चुनाव का है। यह ध्रुवीकरण कई लोकतंत्रों में मौजूद है, जो लोगों को समृद्धि की ओर ले जाने वाले दो सर्वथा भिन्न रास्तों के बारे में परिचित कराता है। दो मुख्य दल, कांग्रेस और भाजपा (नरेंद्र मोदी इसके अधिकृत प्रत्याशी बनने के बाद) इस ध्रुवीकरण को दर्शाते हैं।

Published on 28 Oct 2013 - 18:08
लोकतंत्र बचाने का तीन सूत्रीय एजेंडा
 
पिछले दो दशकों में भारत का आर्थिक उदय उल्लेखनीय घटना है। इसने करोड़ों लोगों को घोर गरीबी से निकालकर ठोस मध्यवर्ग  बनाया है। बहुत ही खराब शासन (उत्तरप्रदेश में तो आपराधिक शासन) के बीच समृद्धि हासिल की गई है। दुर्गा शक्ति प्रकरण सार्वजनिक जीवन में आपराधिक व्यवहार का ताजा मामला है। उत्तरप्रदेश के लोगों ने जब अखिलेश यादव में भरोसा जताया तो उन्हें लगा कि वे अलग प्रकार की सरकार चुन रहे
Published on 20 Aug 2013 - 13:58

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