कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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अगले महीने होने वाले आम चुनाव भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण चुनाव हो सकते हैं। देश के सामने विशाल युवा आबादी के रूप में सीमित मौका है। यदि हम उचित प्रत्याशी को चुनते हैं तो यह फैसला करोड़ों भारतीयों की जिंदगी में समृद्धि लाएगा और वक्त के साथ भारत एक मध्यवर्गीय देश हो जाएगा। यदि हम गलत उम्मीदवार चुनते हैं तो फायदे की यह स्थिति विनाश में बदल सकती है और भारत इतिहास में पराजित देश के रूप में दर्ज हो सकता है।

भारत के अवसर इस तथ्य में निहित हैं कि यह एक खास तरीके से युवा देश है। खास इस तरह कि यहां

Published on 28 Mar 2014 - 17:49

दुनिया आशावाद और निराशावाद में बंटी हुई है। आर्थिक आशावादियों का विश्वास है कि यदि सरकार बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में निवेश करे और उद्यमियों के समक्ष मौजूद बाधाओं को दूर करे तो बड़ी तादाद में नौकरियों के सृजन के साथ-साथ अर्थव्यवस्था का विकास संभव होगा। इससे कर राजस्व बढ़ेगा, जिसका निवेश गरीबों पर किया जा सकेगा। यदि कुछ दशक तक हम इस नीति का अनुकरण करें तो हमारा देश धीरे-धीरे मध्य वर्ग में तब्दील हो जाएगा। दूसरी ओर निराशावादियों की भी कुछ चिंताएं हैं, जिनमें असमानता, क्रोनी कैपिटलिज्म,

Published on 10 Mar 2014 - 13:50

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी महंगाई की ही शिकायत कर रहा था। टीवी पर लोग आलू, प्याज, घी और दाल की कीमतें बताते नजर आते थे। हालांकि चुनावी पंडित हमेशा का चुनाव राग ही गा रहे थे, लेकिन कांग्रेस की हार में भ्रष्टाचार से ज्यादा महंगाई का हाथ रहा। हाल में महंगाई कुछ कम हुई हैं, लेकिन सभी दलों के लिए यह चेतावनी है कि आम आदमी महंगाई के दंश को भूलने वाला नहीं है और यह आगामी आम चुनाव में नजर आएगा।

अर्थशास्त्रियों को भी यह समझ में

Published on 10 Feb 2014 - 18:33

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