कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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यदि भारतीयों ने अगस्त 1947 में आजादी और जुलाई 1991 में आर्थिक स्वतंत्रता हासिल की थी तो अब मई 2014 में उन्होंने गरिमा हासिल की है। नरेंद्र मोदी की जोरदार जीत का यही महत्व है। यदि आप मोदी को सत्ता में लाने वाले मतदाता को जानना चाहते हैं तो आपको एक ऐसे युवा की कल्पना करनी पड़ेगी जो हाल ही गांव से स्थानांतरित होकर किसी छोटे शहर में आया है। उसे अभी-अभी अपनी पहली नौकरी और पहला फोन मिले हैं और जिसे अपने पिता से बेहतर जिंदगी की तमन्ना है। मोदी के संदेश के आगे वह अपनी जाति व धर्म भूल गया, जिसे
Published on 23 May 2014 - 18:43
मनमोहन सिंह का उत्थान और पतन आधुनिक समय की त्रासदी है। इसे उनके पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब 'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में दर्ज किया गया है। कई लोगों ने कहा कि ऐसी किताब तो तब लिखी जानी चाहिए जब मुख्य पात्र काल-कवलित हो गए हों या कम से कम अपने पद पर न हो। ऐसी किताब चुनाव के दौरान तो नहीं ही प्रकाशित की जानी चाहिए। खैर, यह किताब भाजपा के लिए यूपीए-2 सरकार को लताडऩे के लिए वक्त पर मिला तोहफा सिद्ध हुई।
 
Published on 29 Apr 2014 - 19:04
आने वाले कुछ सप्ताह में मैं मतदान करने के लिए जाऊंगा। मतदान बूथ पर मेरा सामना खामियों-खराबियों वाले उम्मीदवारों से होगा, लेकिन मेरे सामने उसे चुनने की मजबूरी होगी जिसमें सबसे कम खामी होगी। यहां सवाल यही है कि किस आधार पर मैं अपनी पसंद के उम्मीदवार का चयन करूं? सामान्य सी बात है कि मैं उस उम्मीदवार को वोट देना पसंद करूंगा जो करोड़ों भारतीयों के जीवन में संपन्नता-समृद्धि लाने में मददगार हो। इस संदर्भ में भ्रष्टाचार, महंगाई, सेक्युलरिज्म और आतंकवाद जैसी बातें भी अपेक्षाकृत कम महत्व रखती हैं
Published on 8 Apr 2014 - 17:20

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