कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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स्वतंत्रता दिवस का अवसर थोड़ा रुकने, रोजमर्रा की घटनाओं पर सोच का दायरा बढ़ाने और पिछले 68 साल के दौरान अपने देश की यात्र पर नजर डालने का बढ़िया वक्त होता है। आजाद देश के रूप में अपने भ्रमपूर्ण इतिहास पर जब मैं नजर डालता हूं तो कुहासे में मील के तीन पत्थरों को किसी तरह देख पाता हूं। अगस्त 1947 में हमने अपनी राजनीतिक लड़ाई जीती। जुलाई 1991 में आर्थिक आजादी हासिल की और मई 2014 में हमने सम्मान हासिल किया।
 
Published on 16 Nov 2015 - 15:19
बांग्लादेश के साथ हुआ समझौता ऐतिहासिक है। इससे कश्मीर जितना ही पुराना विवाद तो हल हुआ ही, उपमहाद्वीप को साझा बाजार की ओर बढ़ने में भी मदद मिली है। व्यापार और निवेश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अथक कूटनीति का ताजगीदायक फोकस है। सत्ता में आने के बाद से ही हमारे पड़ोसियों की जरूरतों पर उन्होंने बहुत निकटता से गौर किया है, जिसका फल अब सामने आ रहा है। हालांकि, समझौते पर बरसों से काम हो रहा था, लेकिन इतिहास इसका श्रेय मोदी को देगा। अन्य किसी भारतीय नेता की तुलना में उनमें यह सहज समझ है कि
Published on 16 Nov 2015 - 12:50
राजनीति थोड़े वक्त का खेल होता है, जबकि अर्थव्यवस्था लंबे समय का। दोनों आखिर में मिलते हैं, लेकिन बीच के समय में वे विपरीत दिशाओं में जाते लगते हैं। इस विरोधाभास के कारण ज्यादातर लोगों का निराश होना अपरिहार्य है। अपनी सरकार की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यही समस्या है। अच्छे रिकॉर्ड के बावजूद वे अपने समर्थकों की असाधारण रूप से ऊंची अपेक्षाओं को मैनेज करने में नाकाम रहे। मुख्य प्राथमिकताओं पर निगाह न रख पाने से योजनाएं अमल में लाने की उनकी
Published on 1 Jun 2015 - 19:58

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