कमेन्टरी - गुरचरण दास

गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

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बांग्लादेश के साथ हुआ समझौता ऐतिहासिक है। इससे कश्मीर जितना ही पुराना विवाद तो हल हुआ ही, उपमहाद्वीप को साझा बाजार की ओर बढ़ने में भी मदद मिली है। व्यापार और निवेश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अथक कूटनीति का ताजगीदायक फोकस है। सत्ता में आने के बाद से ही हमारे पड़ोसियों की जरूरतों पर उन्होंने बहुत निकटता से गौर किया है, जिसका फल अब सामने आ रहा है। हालांकि, समझौते पर बरसों से काम हो रहा था, लेकिन इतिहास इसका श्रेय मोदी को देगा। अन्य किसी भारतीय नेता की तुलना में उनमें यह सहज समझ है कि
Published on 16 Nov 2015 - 12:50
राजनीति थोड़े वक्त का खेल होता है, जबकि अर्थव्यवस्था लंबे समय का। दोनों आखिर में मिलते हैं, लेकिन बीच के समय में वे विपरीत दिशाओं में जाते लगते हैं। इस विरोधाभास के कारण ज्यादातर लोगों का निराश होना अपरिहार्य है। अपनी सरकार की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यही समस्या है। अच्छे रिकॉर्ड के बावजूद वे अपने समर्थकों की असाधारण रूप से ऊंची अपेक्षाओं को मैनेज करने में नाकाम रहे। मुख्य प्राथमिकताओं पर निगाह न रख पाने से योजनाएं अमल में लाने की उनकी
Published on 1 Jun 2015 - 19:58
गर्मी की छुटि्टयां और भारतीय रेल का अटूट संबंध रहा है। हर भारतीय मन में रेलवे को लेकर छुटि्टयों में की गई यात्रा की कोई न कोई रूमानी याद जरूर होती है। आज ये रूमानी यादें धुंधला गई हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ नेताओं ने इसके साथ निजी जागीर जैसा व्यवहार कर इसे कुचल डाला है। रेलवे भारतीय व्यवस्था का लघु रूप है- अक्षम, भ्रष्ट, राजनीतिकरण से बेजार, गैर-जरूरी स्टाफ के बोझ से चरमराती असुरक्षित सेवा। सरकारी एकाधिकार और धन-आवंटन में राजनीति के कारण निवेश व टेक्नोलॉजी के लिए पैसे की तंगी इसकी मूल समस्या
Published on 28 Apr 2015 - 20:29

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