गुरचरण दास

इस पेज पर गुरचरण दास के लेख दिये गये हैं। उनके लेख विभिन्न भारतीय एवं विदेशी शीर्ष पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं। इसके अलावा उन्होने कई बेस्टसेलर किताबें भी लिखी हैं।

पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें।

अधिक जानकारी के लिये देखें: http://gurcharandas.org

बेहतर विकल्प, मुश्किल चुनाव

gurcharan_das.jpg

लंबे वक्त के बाद आखिर भारतीय लोकतंत्र सही दिशा में जाता दिखाई दे रहा है और आगामी चुनाव में मतदाताओं के सामने अच्छे विकल्प मौजूद हैं। इसमें एक विकल्प वाम-मध्यमार्गी और दक्षिण-मध्यमार्गी आर्थिक नीतियों के बीच चुनाव का है। यह ध्रुवीकरण कई लोकतंत्रों में मौजूद है, जो लोगों को समृद्धि की ओर ले जाने वाले दो सर्वथा भिन्न रास्तों के बारे में परिचित कराता

धार्मिक व राजनीतिक आजादी देने वाला देश आर्थिक आजादी देने में नाकाम क्यों

GD.jpg
लोकतंत्र बचाने का तीन सूत्रीय एजेंडा
 

नई राजनीति की तलाश

gur.jpg

जब वित्तमंत्री पी.

पूंजीवाद की नैतिकता

money.jpg

वह अक्टूबर के शुरुआती दिनों की एक खुशनुमा शाम थी। एक मुख्य समाचार चैनल के एंकर अरविंद केजरीवाल के नवीनतम शिकार की करतूतों की व्याख्या करते हुए गला फाड़-फाड़कर लालच पर दोष मढ़ रहे थे। उसी दिन केजरीवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ से गलत तरीके से सस्ती जमीन लेने के आरोप लगाए थे। अगले ही पल एंकर बताने लगे कि इस पूरी समस्या की जड़ क्रोनी कैपिट

बदलाव की बेचैनी

india_1684813c.jpg

जब भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का झंडा अन्ना हजारे के हाथों से अरविंद केजरीवाल के पास आया तो इसमें एक नया जोश देखने को मिला। पिछले कुछ हफ्तों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के खुलासे सामने आए। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई सफल होती है या नहीं, लेकिन यह अपने पीछे एक बड़ी उपलब्धि छोड़ रही है। इसने म

देश की सफलता के मायने

gur.jpg

केवल भारतीयों के बीच ही नहीं, पूरे विश्व में इस बात के खूब हल्ले है कि भारत एक महाशक्ति बन रहा है। हर दिन पाश्चात्य मीडिया में कोई न कोई खबर दिखाई पड़ती है, जिसमें भारत को भविष्य की महाशक्ति के रूप में दर्शाया जाता है। जाहिर है, ये बातें एक ऐसे देश को मीठी ही लगेंगी जिसे बीसवीं सदी में हताश राष्ट्र बताया जाता था। इस हताशा का मुख्य कारण हमारा खराब आर्थिक प्रदर्शन था, किंतु सुध

भूमंडलीकरण और विश्व व्यापार संगठन हमारे सबसे बड़े दोस्त ------ (2)

gur.jpg

मेरे मत में भूमंडलीकरण या कंवर्जेस का विरोध करना पागलपन है। सिएटल में विरोध का जो प्रदर्शन हुआ वह पागलपन था। विरोध करनेवालों में कई श्रमिक संगठनवादी थे जो अपने बाजार की रक्षा कर रहे थे। विरोध करनेवालों की कोशिश है कि भारत के उत्पादन उनके यहां न पहुंचे। लेकिन विश्व व्यापार संगठन का प्रयास है कि सब आगे बढ़े। विश्व व्यापार से गरीब और अमीर दोनों को समान लाभ पहुंचे। इसलिए

भूमंडलीकरण और विश्व व्यापार संगठन हमारे सबसे बड़े दोस्त ------ (1)

gur.jpg

मेरे भूमंडलीकरण के संबंध में साफ विचार हैं। अर्थशास्त्र में एक पुरानी बात बतलाई जाती है । यदि व्यापार और पूंजी निवेश के आधार पर गरीब देश का संबंध अमीर देश के साथ स्थापित हो जाता है तो कालांतर में दोनों देशों का जीवन स्तर समान हो जाता है । इसे ‘थ्योरम आफ कंवर्जेंस’कहा जाता है। यह एडम स्मिथ का विचार है। 20वी सदी के नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पाल सैमुअलसन ने &nb