उद्यमिता संबंधी गुण स्वभावगत- कंवल रेखी

अमेरिका की सिलीकॉन वैली और भारत के बैंगलूरू ने निश्चित ही मलेशिया के मल्टीमीडिया कॉरीडोर या टोक्यो बे के अत्याधुनिक आइटी पार्क की तुलना में जबरदस्त सफलता हासिल की है. सिलीकॉन वैली के सफल उद्यमी कंवल रेखी बता रहे हैं उद्यम, उद्योग और उद्यमिता की सफलता के सूत्र...

मौजूदा दिक्कतों को छोड़ दिया जाए तो पूरी दुनिया के लिए सिलिकॉन वैली की प्रगति ईर्ष्या का विषय है। 2002 में जब यह लेख लिखा गया तब 60 फीसदी की तेज रफ्तार से बढ़ता हुआ सॉफ्टवेयर उद्योग 10 अरब डॉलर के आकर तक पहुंच चुका था और इसमें 5 लाख लोगों को रोजगार मिल चुका था. 2009 में इस उद्योग का आकार 60 अरब डॉलर तक जा पहुंचा है और इसमें अब 30 लाख लोग काम कर रहे हैं.

समूचे अमेरिका को गतिवान बनाने में सिलिकॉन वैली की ऊर्जा का योगदान रहा है। पिछले दो दशकों में, हजारों उद्यमियों ने नई कंपनियों की शुरुआत कर ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित की जिसने समूचे उद्योग जगत की उत्पादकता को बढ़ा दिया।

सॉफ्टवेयर उद्योग की शानदार प्रगति

सिलीकॉन वैली की ही बदौलत अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी दुनिया में सबसे ज्यादा उत्पादक और तेज रफ्तार बन गई है। वह भी तब जब वह 80 के शुरुआती दशक में जर्मन और जापानी अर्थव्यवस्था के आगे हारती दिख रही थी। इसी दौरान भारत के दक्षिणी शहर बेंगलूरु में उद्यमियों ने सिफर से शुरुआत कर शिखर पर पहुंचते हुए विश्वस्तरीय सॉफ्टवेयर उद्योग स्थापित कर दिया। इस उद्योग ने 60 फीसदी की विकास दर से तरक्की करते हुए 10 अरब डॉलर के उद्योग का आकार ले लिया, जिसमें लगभग पांच लाख लोग काम करते हैं। अगले एक दशक में इसमें दस गुना बढ़ोतरी की उम्मीद भी लगाई जा रही है। (यह लेख 2002 में लिखा गया था, उद्योग ने इस दौरान 60 अरब डॉलर का तिलस्मी अंक छू लिया है और इसमें 2009 के आरंभ तक ही तीस लाख लोगों को रोजगार मिल चुका है)

भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति बदली सोच

इसने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पूरी सोच को ही बदलकर रख दिया है। एक निराशाजनक अर्थव्यवस्था के स्थान पर अब यह ज्ञान आधारित (नॉलेज बेस्ड) एक ऐसी उत्पादक अर्थव्यवस्था मानी जाती है जो सूचना प्रौद्योगिकी और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पूरी दुनिया के बाजार के लिए काम कर रही हो। हताशा का अहसास अब उम्मीद और उत्साह में बदल गया है।

यह साफ है कि उद्यमी अर्थव्यवस्था को गति देकर समाज को संपन्नता के रास्ते पर ले जा सकते हैं। इस बात को लेकर भी कोई शक नहीं है कि वैभव और उत्पादक रोजगार का इकलौता स्रोत उद्यमी ही हैं। आबादी का एक छोटा सा हिस्सा, केवल एक या दो फीसदी उद्यमी, पूरे समाज को तरक्की की राह ले जाने के लिए पर्याप्त हैं। इतिहास इस बात का गवाह है कि उन्हीं देशों ने वैभव और तरक्की के मामले में दुनिया को पछाड़ा जिन्होंने अपने नागरिकों में उद्यमिता संबंधी संस्कृति को विकसित किया।

उद्ममिता संबंधी स्वभावगत गुण

उद्यमियों को किसी एक स्वभावगत गुण से परिभाषित नहीं किया जा सकता, बल्कि उनके भीतर छिपे कई गुण मिलकर उनको दूसरों से बेहतर बनाते हैं। फिर भी एक गुण अनिवार्य (हां, अपने आप में पर्याप्त नहीं) माना जाता है और वह है नेतृत्व का गुण। उन्हें टीम बनाने, भविष्य को लेकर बेहतर सोच से लैस होना चाहिए और उन्हें अपनी टीम को आत्मविश्वास से लबरेज करते तो आना ही चाहिए। साथ ही उनका बुद्धिमान, परिश्रमी और दुनियादारी में माहिर होना भी जरूरी है। उनमें तेजी से सीखने की क्षमता होती है।

नीचे लिखे कुछ और ऐसे गुण हैं, जिनकी हम प्राथमिकता या क्रम निर्धारित नहीं की जा सकते:

बौद्धिक ईमानदारी

बौद्धिक ईमानदारी (इंटेलेक्चुअली ऑनेस्ट) यह हर उद्यमी की खास निशानी होती है। वे हरदम अपने आकलनों को जांच-परखकर ऐसी बातों को खारिज कर देते हैं जिनमें उनका विश्वास खत्म हो चुका हो। उन्हें अपनी ताकत और कमजोरियों की हकीकत पता होती है। वे अपने सबसे बड़े आलोचक होते हैं।

आत्मविश्वास

आत्मविश्वास से भरपूर उद्यमी आत्मविश्वास से भरपूर होकर भी जिद्दी नहीं होते। वे अपने संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति के भीतर जीत का जज्बा भर देते हैं।

गुणवत्ता को लेकर सजग

उनकी निगाह परिणामों पर होती है इसलिए उद्यमियों को परिणाम हासिल करने का जूनून सा होता है। वे ऐसी किसी भी प्रक्रिया या कदम में यकीन नहीं रखते जो परिणाम न दे सके। गुणवत्ता पर बल उद्यमी मूलतः ही बेहतर काम को लेकर सजग होते हैं। आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित सोच और आंकड़े उनकी रग-रग में समाए होते हैं। लागत, खर्च, अतिरिक्त खर्चलागत, मार्जिन, कीमतें और नफे जैसी बातें उनके भीतर ही होती हैं।

लीक से हट कर सोच

लीक से हटकर उद्यमी 'आउट ऑफ बॉक्स' सोच वाले होते हैं। वे परंपरागत सोच को चुनौती देकर नई और लीक से हटकर बातों को करने में यकीन रखते हैं। उद्यमी तभी तरक्की करते हैं जब वे मूल प्रकृति के अनुरूप काम करते हैं!

कूपमंडुक न बनें

सतही ज्ञान से थोड़ी बेहतर जानकारी रखने वाले (generalist) उद्यमी विशेषज्ञ नहीं होते बल्कि उनको आम तौर पर अपने क्षेत्र से संबंधित सर्वसामान्य जानकारी होती है। उद्यमी को केवल अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहते हुए कारोबार के हर पहलू को समझना और संभालते आना ही चाहिए।

जोखिम लेना

उद्यमी बैठने में यकीन नहीं रखते और जोखिम भी लेना जानते हैं। लेकिन इतने समझदार होते हैं कि वे अपने हर कदम को नापतौल कर ही उठाते हैं और बेवकूफी भरा जोखिम मोल नहीं लेते।

दृढ़निश्चयी उद्यमी

बहुत दृढ़ निश्चय वाले होते हैं और आसानी से हार नहीं मानते। वे हर प्रतिस्पर्धी को हराना जानते हैं। कुशल संसाधनों का कुशलतापूर्वक इस्तेमाल ही उद्यमिता का मूल है।

जानकारी से भरपूर उद्यमी
ऐसे उद्यमी अपने ईर्दगिर्द की परिस्थितियों और काम के माहौल के बारव् में भरपूर जानकारी रखते हैं। वे बाजार, प्रतिस्पर्धा और प्रौद्योगिकी की जानकारी हासिल करने का कोई मौका नहीं गंवाते।

न्यायोचित (फेयर) उद्यमी

न्याय संगत और साफसूथरे तरीके से काम करने वाले उद्यमी प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ अपने साथी कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के साथ न्यायोचित व्यवहार में यकीन रखते हैं। वे अपने काम में दूसरों के योगदान को कभी नहीं भूलते। उनके स्वभाव में मूलतः जीत की प्रवृत्ति होती है।

प्रतिस्पर्धी उद्यमी

ऐसे प्रतिस्पर्धा के लिए हरदम तैयार रहते हैं और समय-समय पर खुद को उद्योग के प्रतिस्पर्धियों से टक्कर के काबिल बनाने के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करते रहते हैं।

अवसरों का समुचित दोहन

मौके को ताड़ने वाले (अपॉर्च्युनिस्ट) उद्यमियों का हर कदम मौके के अनुरुप होता है। जब परिस्थिति अनुकूल हो तो वे लंबी अवधि की रणनीति को अपनाने का मौका नहीं चूकते।

आत्ममंथन

उद्यमी अपने कामकाज की कमजोरियों को जानने के लिए कहीं ओर देखने की बजाय आत्ममंथन में विश्वास रखते हैं। अपनी नाकामयाबी के लिए वे दूसरों को दोष नहीं देते।

बागी उद्यमी

प्रवाह के विपरीत तैरने का माद्दा रखने वाले लीक पर ही चलने में यकीन नहीं रखते और इस मामले में बागी प्रवृात्ति के होते हैं। दरअसल उनको लीक से हटकर चलने में फायदा होता है।

खुद ही खुद के प्रोत्साहक

सेल्फ मोटिवेटेड उद्यमियों की प्रेरणा का स्रोत वो खुद ही होते हैं। उनको आमतौर पर दूसरों की मदद की दरकार नहीं होती। केवल जरा सी बात या प्रेरणा ही उनको पूरे उत्साह के साथ काम में लगा देती है।

ये सभी स्वभावगत गुण अनिवार्यतः हर कामयाब उद्यमी में नहीं होते। हां, इनका एक उचित मेल हर कामयाब उद्यमी में होता है।

उद्यमी के लिए मददगार माहौल

परिश्रमी उद्यमी तो हर माहौल में काम कर सकते हैं, लेकिन उनके काम की बेहतरी के लिए उत्साह बढ़ाने वाला मददगार माहौल अनिवार्य हो जाता है। सरकार ही उन्हें ऐसा माहौल दे सकती है। ऐसे माहौल की न्यूनतम जरूरत कायदे-कानूनों से संरक्षित मुक्त बाजार है, जहां उद्यमी के मूलभूत अधिकारों का भी संरक्षण हो। सरकार अपने कर ढांचे को भी बेहतर बनाकर एक कोष का निर्माण कर सकती है जो किसी नुकसान की स्थिति में उद्यमियों का संबल बन सके। उद्यमियों के फलने-फूलने के लिए केवल सांस्कृतिक (कल्चरल) की पृष्ठभूमि ही काफी नहीं होती है इसे प्रभावित करने वाले अन्य कई कारक भी होते हैं। इनमें शामिल हैं:

रोल मॉडल यानी आदर्श

उभरते हुए उद्यमियों को शुरुआती जोखिम लेने का साहस देने के लिए आदर्श होना बहुत जरूरी है। उदाहरण के लिए 1980 के दशक में कुछ भारतीय उद्यमियों की सिलिकॉन वेली में कामयाबी ने आने वाली पीढ़ी को 1990 के दशक में सिलिकॉन वेली और बेंगलुरू में भी ऐसा ही करने के लिए प्रोत्साहित किया।

मददगार ढांचा

उद्यमियों को काम का गुर सीखाने के लिए मददगार ढांचा जरूरी है। यह उन्हें साथी ढूंढने और मार्गदर्शन के काम आता है। 1992 में सिलिकॉन वैली में टीआईई (टाई) के गठन ने उद्यमिता पर जोरदार तरीके से ध्यान दिया, जिसकी बदौलत सिलिकॉन वैली और बेंगलुरू में भारतीय उद्यमियों को एक नया उत्साह नई प्रेरणा मिली।

नाकामयाबी को स्वीकारना

नाकामयाबी को सीखने के एक मौके की तरह देखना चाहिए और इससे हताश होने की जरूरत नहीं है।

उद्यमियों के लिए सम्मान

समाज को उद्यमियों को लेकर सोच को और बेहतर बनाना चाहिए और समाज के हर वर्ग में उद्योजकता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अधिकांश लोगों को इसमें भागीदारी करना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा कामयाब उद्यमी अंततः समाज के उत्थान में मददगार साबित हो सकें।

उद्यमिता का अनुभव

अपने ईर्द-गिर्द उद्यमी और उद्योग होने पर उद्यमिता सामर्थ्य और संभावनाएं रखने वाले लोगों को भी प्रोत्साहन मिलता है।

पूंजी तक पहुंच

उद्यमिता के विकास के लिए पूंजी (सीड एंड वेंचर केपिटल) की आसानी से उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वेंचर केपिटलिस्ट शुरूआती दिनों में आने वाले जोखिमों को लेकर अच्छा मार्गदर्शन कर सकते हैं।

प्रतिभाओं की उपलब्धता

उद्यम आधारित कंपनियों के विकास में उपलब्ध प्रतिभाओं की भूमिका अहम होती है। अनुभवी पेशेवर ही उद्यमों का रूख करते हैं।
सख्त सरकार द्वारा समर्थित ढांचा, उद्यम संकुल के विकास के लिए उतना मददगार नहीं होता जितना कि प्रोत्साहन देने वाली सरकार और उसकी नीतियां। उदाहरण के लिए मलेशिया का मल्टीमीडिया सुपर कॉरिडॉर या टोक्यो बे का अतिआधुनिक आईटी पार्क वह तूफानी कामयाबी हासिल नहीं कर पाया जो सिलिकॉन वैली या बेंगलुरू ने हासिल की। सिलिकॉन वेली और बेंगलुरू में तो आईटी उद्योग के ऐसे ढांचे खड़े हो गए हैं जिन्हें किसी बाहरी मदद की दरकार नहीं।

उपसंहार (Conclusion)

उद्यमी ही आधुनिक समाजों की कामयाबी के मूल में हैं। समाज को ऐसी नीतियों को अपनाना चाहिए जो उद्यमिता को प्रोत्साहित करें। जरूरी नहीं कि यह प्रोत्साहन प्रत्यक्ष हो। सांस्कृतिक कारकों की भूमिका भी अहम होती है। खुले बाजार वाली अर्थव्यवस्था उद्यमिता के लिए माकूल होती है। यह साफ नहीं है कि कौन से स्वभावगत गुण या किन ऐसे गुणों का मेल उद्यमी के विकास की गारंटी होता है। समाज को हर किसी को किसी न किसी उद्यम से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और समय-समय पर कामयाब लोगों का सम्मान भी करना चाहिए।

टाई के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के पूर्व चेयरमैन कंवल रेखी इस वक्त भारतअमेरिकी वेंचर केपिटल फंड इन्वेंटस केपिटल पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक हैं। अमेरिकी नागरिक कंवल ने 1997 में मिशिगन टेकनालॉजी यूनिवर्सिटी से बिजनेस और इंजीनियरिंग में पीएचडी की थी।

कँवल रेखी

Add new comment

Filtered HTML

  • Lines and paragraphs break automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <blockquote> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.

Plain text

  • No HTML tags allowed.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Lines and paragraphs break automatically.