सार्वजनिक नीति - उर्जा एवं पर्यावरण लेख

इस पेज पर विभिन्न लेखकों के उर्जा एवं पर्यावरण पर लिखे गये लेख दिये गये हैं। पुरा लेख पढ़ने के लिये उसके शीर्षक पर क्लिक करें।आप लेख पर अपनी टिप्पणीयां भी भेज सकते हैं।

हमारे देश में भूजल के गिरते स्तर और उसके बढ़ते प्रदूषण पर समय-समय पर चिंता जतलाई जाती रही है। पर्यावरण संबंधी तमाम सरकारी, गैर सरकारी अध्ययन हमें लगातार आगाह करते रहे हैं कि जल प्रदूषण की समस्या इतने भयानक स्तर तक पहुंच गई है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो निकट भविष्य में हमारे लिए पीने के पानी के भी लाले पड़ जाएंगे। अब खुद जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़े इन तथ्यों की पुष्टि कर रहे हैं। देश के करीब 650 जिलों के 158 इलाकों में भूजल खारा हो चुका है, 267 जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में फ्लोराइड की अधिकता है और 385 जिलों में नाइट्रेट की मात्रा तय मानकों से

चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने पिछले दिनों कहा कि उनके देश में अगले पांच साल के लिए वार्षिक संवृद्धि दर का लक्ष्य घटाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है। हमें तीव्र आर्थिक संवृद्धि के लिए अपने पर्यावरण का बलिदान नहीं करना चाहिए। उन्होंने सरकार से सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि से ध्यान हटाकर संवृद्धि की गुणवत्ता और लाभ पर केंद्रित करने को कहा। वेन का बयान चीन और भारत की आर्थिक संवृद्धि का वैश्विक पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पश्चिमी जगत की चिंताओं के मद्देनजर आया है। पिछले साल चीन की संवृद्धि दर 10.3 प्रतिशत थी, जो इस साल 9 प्रतिशत रह गई है। यद्यपि वह अपने देश के

हाल ही में केंद्र सरकार ने बांस को पेड़ नहीं, घास की संज्ञा दे दी है. इस आधिकारिक पुष्टि के साथ ही लम्बे समय से बांस को घास घोषित किये जाने के लिए चल रहे अभियान को राहत मिली है. इस आधिकारिक पुष्टि से जंगलो में रहने वाले आदिवासियों के अधिकार भी स्थापित हो सकेंगे.

बांस के घास घोषित होने के साथ ही उम्मीद है कि हमारे जंगलों का नुकसान कुछ कम होगा और देश के करोड़ों लोगों को रोज़गार मिल सकेगा. साथ ही साथ देश के आदिवासियों को अपने जंगलों और उन से मिलने वाले फायदों पर बेहतर इख्तियार मिल सकेगा.

अब

बारह दिनों तक जलवायु परिवर्तन पर चले कोपनेहेगन सम्मेलन में अंतिम दिन अमेरिका ने चार उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के साथ एक समझौते को दिया अंजाम. अमेरिका समझौते को भविष्य के लिए अहम कदम मान रहा जबकि कई देश कर रहे आलोचना.

जलवायु

हिमालय की बर्फ का पिघलना, समुद्र के जलस्तर का बढ़ना और पृथ्वी के तापमान में वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग की भयावहता की ओर ही इशारा करते हैं। यही नहीं, बाढ, सूखे, बीमारी, कुपोषण और अकाल सरीखे खतरे भी हमारे सिर पर मंडरा रहे है. www.azadi.me की ओर से पेश है कोपेनहेगन के बहाने

मैं लैड पेंसिल हूँ- साधारण लकडी की पैंसिल, जिसे सभी पढ़ने-लिखने वाले लड़के, लड़कियॉ और बड़े जानते हैं।

लिखना मेरी प्रवृत्ति और पेशा दोनों है। कुल मिला कर मै यहीं करती हूं।

आप हैरान हो सकते है कि मै अपनी वंशावली क्यों लिख रही हूं। अच्छा! आरंभ से ही, मेरी कहानी बड़ी रोचक है। और दूसरा, मै एक रहस्य हूं- वृक्ष से कहीं ज्यादा, सूर्यास्त से अधिक और यहां तक की बिजली की चमक से भी कहीं ज्यादा।

    सरकार और निजी क्षेत्र के पारस्परिक सहयोग से छत्तीसगढ़ में हाथियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। वन और वन्य जीवन की रक्षा के लिए होने वाले सरकारी प्रयास अब तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहे हैं। शेर और बाघ को बचाने वाले वन्य जीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय पार्कों में शेर और बाघों की संख्या में लगातार कमी देखने को मिली है। ऐसे में हाथियों को बचाने की छत्तीसगढ़ की मंशा रंग लाए इसकी शुभकामना ही की जा सकती है। शुक्र है कि सरकार अपनी योजना में निजी क्षेत्र को भी शामिल कर रही है। पर सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि योजना में प्रोत्साहन को किस प्रकार से

Pages