क्या नेताजी के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं!

फ्रेंच चिंतक व पत्रकार फ्रेडरिक बास्तियात ने अपनी पुस्तक 'द लॉ' में कानून सम्मत लूटखसोट को बेहद आसान तरीके से स्पष्ट करते हुए लिखा है कि नागरिकों की निजता, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा से संबंधित कानूनों के अतिरिक्त बनने वाले अधिकांश कानून लक्षित जनता को फायदा पहुंचाने की बजाए कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल लोगों का हित अधिक करते हैं। उन्होंने लिखा है कि जिस प्रकार लोगों में शिक्षा हासिल करने की ललक होती है उसी प्रकार कुछ लोगों में शिक्षा प्रदान करने की उत्सुकता होती है। सरकार को ऐसे दोनों व्यक्तियों को आपस में मिलाने की कोशिश की जानी चाहिए न कि स्वयं स्कूल आदि स्थापित किया जाना चाहिए..

इसी से संबंधित एक कार्टून

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