उत्कृष्ट शिक्षा के माधयम से पहुंच में सुधार

सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी की अति महत्वपूर्ण परियोजना का नाम स्कूल चयन अभियान है और इसे वर्ष 2007 में आरंभ किया गया था। यह ऐसा अभियान है जिसमें वर्तमान भारत के स्कूली शिक्षा पध्दति में बहुत ही जरूरी सुधार किए जाएंगे और इसके लिए शिक्षा प्रमाणकों, नियामक सुधारों और प्रोत्साहक शिक्षा जिज्ञासुओं की त्रि-भुजा पहुंच का प्रयोग किया जाएगा।

40 प्रतिशत भारतवासी अशिक्षित हैं, और सरकारी स्कूल भारत के बच्चों की जरूरतों पर खरे नहीं उतरते। नागरिक समाज केन्द्र गुण सुधार, विशेषकर गरीबों के लिए शिक्षा की पहुंच पर प्रकाश डालता है। नीति निर्धारकों, शिक्षा विशेषज्ञों और आम कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर स्कूली चयन अभियान हमारा ध्यान दाखिले के अवरोधों को हटाने और शिक्षा प्राप्त करने वालों को प्रोत्साहित में केन्द्रित करता है और स्कूलों और कॉलेजों को लाभप्रद बनाते हुए विधि और विस्तार की गुंजाइश और शिक्षा प्रमाणकों के माधयम से प्रतिस्पर्धाओं की ओर आगे बढ़ता है।

अधिक जानकारी के लिये देखें: स्कूल चयन अभियान

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संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार घोषणापत्र 1948 के अनुच्छेद 26 शिक्षा से संबंधित है जिसकी तीन धाराएं हैं। पहला, निशुल्क एवं आवश्यक प्राथमिक शिक्षा से संबंधित है तो दूसरा शिक्षा के उद्देश्यों (समझ को बढ़ावा देने, सहनशीलता, सभी राष्ट्रों, जाति व धार्मिक समूहों के साथ मित्रता) की स्थापना करता है। तीसरी धारा अभिभावकों को अपने बच्चों को दिए जाने वाली शिक्षा के प्रकार को चुनने पूर्वाधिकार की बात कहता है। अभिभावकों के चुनने का विचार शिक्षा के अधिकार (आरटीई) एक प्रमुख घटक रहा है, लेकिन भारत में शिक्षा के सुधार को लेकर होने वाली बहसों में शायद ही इस पर कभी चर्चा होती है।  

 

गैर सरकारी संस्था क्राई (चाइल्ड राइट्स ऐंड यू) की ओर से हाल ही में जारी रिपोर्ट ने बहुचर्चित शिक्षा के अधिकार (आरटीई) की कमियों की ओर एक बार फिर से ध्यान आकर्षित किया है। कुछ महीने पहले एक अन्य एनजीओ ‘प्रथम’ ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आरटीई को लागू किये जाने के बाद शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। इसके लिए आमतौर पर दोषी ठहराए जाने वाले कारकों, जैसे राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, लालफीताशाही, भ्रष्टाचार आदि को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा। कमियां इस कानून के भीतर ही हैं।

 

गांवों में मोबाइल गवर्नेंस की जरूरत

तेईस साल की राखी पालीवाल राजस्थान के राजसमंद जिले में उपली-ओदेन पंचायत की उप-प्रमुख हैं। वह एकमात्र निर्वाचित महिला सदस्य हैं, जो बाइक चलाती हैं। सुबह चार बजे उठकर खुले में शौच के खिलाफ महिलाओं को सलाह देती हैं। दिन में लॉ स्कूल जाती हैं और स्मार्ट फोन से फेसबुक अपडेट करती हैं।

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इलाहाबाद में इन दिनों महाकुंभ मेले की धूम मची है। महाकुंभ में स्नान कर अपने सभी दुखों से निवारण करने की चाह में देशभर के लोग अपने अपने काम-धंधे और रोजगार से छुट्टी लेकर यहां महीने भर डेरा जमाए रहते हैं। अल सुबह से ही संगम के तीरे डेरा डाले रहने के बावजूद त्रिवेणी के संगम स्थल पर मन भरकर डुबकी लगाने की इच्छा कुछेक लोगों को ही प्राप्त होता है। बाकी बस किसी प्रकार दूर किनारे से ही डुबकी लगा अपने को तृप्त मान लेते हैं।

दिल्ली के निजी व महंगे स्कूलों द्वारा अब पड़ोस के आर्थिक रूप से कमजोर व पिछड़ी जाति के छात्रों को निशुल्क दाखिला देने से इंकार करना संभव नहीं हो सकेगा। जी हां, पड़ोस के निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले की चाह रखने वाले गरीब व पिछड़ी जाति के छात्रों के अभिभावकों को अब पर्याप्त जानकारी के अभाव में भ्रमित करना और नियम और शर्तों का हवाला देते हुए स्कूल में भर्ती करने में आनाकानी बरतना महंगा साबित होने वाला है। दिल्ली सरकार व शिक्षा निदेशालय द्वारा पहले से ही अपनाए गए कड़े रुख के क्रम में अब दिल्ली नगर निगम ने भी आस्तीनें चढ़ा ली हैं। यहां तक कि एमसीडी ने अपने अधीन क्षेत्रों में

नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस के बैनर तले अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थिंकटैंक संस्था सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्वारा आयोजित एक दिवसीय “निसा स्कूल लीडर्स सम्मिट” यूं तो बुधवार की देर रात संपन्न हो गया, लेकिन सम्मिट में उपस्थित स्कूल संचालकों व शिक्षाविदो ने स्कूली शिक्षा की बेहतरी के लिए शुरू किए गए अभियान रूपी इस मशाल को हमेशा जलाए रखने का संकल्प लिया। स्कूली शिक्षा की बेहतरी, छात्रों व अभिभावकों को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने, शिक्षण प्रशिक्षण के श्रेष्ठ तौर तरीकों और सरकारी नीतियों के कारण बंदी के कगार पर पहुंच चुके निजी बजट स्कूलों की सहायता के लिए आयोजित इस

उड़ीसा के केंद्रपाड़ा संसदीय क्षेत्र से बीजू जनता दल के सांसद व सुलझे हुए राजनेता बैजयंत (जय) पांडा ने थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) द्वारा स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों विशेषकर ‘स्कूल वाऊचर’ कार्यक्रम की जमकर तारीफ की है। श्री पांडा ने सीसीएस द्वारा विगत कई वर्षों से गरीब छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए चलाए जा रहे वाऊचर प्रोग्राम की सफलता और इसकी प्रभावशीलता की भी जमकर तारीफ। यहां तक कि उन्होंने देश के सभी राज्यों के सभी जिलों में ऐसे पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का भी सुझाव दिया। वह सीसीएस के चौथे वार्षिक ‘स्कूल च्वाइस ने

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