दुनिया में आर्थिक आजादी घटी, भारत 94वें पायदान पर

नई दिल्ली- सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी द्वारा जारी सालाना वार्षिक रिपोर्ट “इकोनॉमिक फ्रीडम ऑफ द वर्ल्ड 2011’’ में भारत 94वें पायदान पर है। बीते साल वह 90वें स्थान पर था। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष पार्थ शाह ने कहा, “बीते साल के मुकाबले भारत की रैंकिंग में गिरावट निराशाजनक है। आर्थिक आजादी बढ़ने के बजाय घटी है। व्यापक भ्रष्टाचार और लाइसेंस राज की परेशानियों ने भारतीयों के लिए बेहतर और अपनी क्षमताओं के साथ जीवन-यापन को बेहद मुश्किल बना दिया है।’’

कुल मिलाकर पूरी दुनिया में आर्थिक आजादी का स्तर गिरा है। इस साल की वार्षिक रिपोर्ट दर्शाती है कि औसत आर्थिक आजादी का स्कोर वर्ष 2009 में घटकर 6.64 पर आ गया है, जो बीते करीब तीन दशक का न्यूनतम स्तर है। वर्ष 2008 में यह 6.67 था। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के प्रोफेसर अजय शाह ने कहा, “भारत के आर्थिक विकास को तेज करने में अधिक आर्थिक आजादी की अहम भूमिका है। इस मामले में ताजा आंकड़े निश्चय ही चिंताजनक हैं।’’ आर्थिक आजादी के मामले में हांगकांग फिर पहले स्थान पर रहा है। इसके बाद सिंगापुर और न्यूजीलैंड का नंबर आता है।

आर्थिक आजादी के मामले में अमेरिका की रैंकिंग में तेज गिरावट आई है। वर्ष 2010 में छठे स्थान से लुढ़ककर वह अब 10वें पायदान पर आ गया है। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी सरकार के कर्ज और अधिक खर्च हैं। साथ ही कानूनी ढांचे और संपत्ति के अधिकारों के लिए स्कोर का घटना भी इस गिरावट की एक बड़ी वजह हैं। सर्वे में शामिल 141 देशों में एक बार फिर जिंबाब्वे सबसे कम अंक हासिल कर निचले पायदान पर है। इससे ऊपर म्यांमार, वेनेजुएला, अंगोला और कांगो का स्थान रहा।

डॉ. पार्थ शाह का मानना है, “आर्थिक स्वतंत्रता और समृद्धि के बीच रिश्ते को नकारा नहीं जा सकता। वे देश जो आर्थिक आजादी के मामले में ऊपरी पायदान पर हैं, उनके यहां नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाला जीवन स्तर उपलब्ध है। पूरे अरब में फैली राजनीतिक अशांति यहां के लोगों की आर्थिक आजादी के लिए बढ़ती चाहत का नतीजा है। इस आजादी में समृद्धि, रोजगार में वृद्धि, राजनीतिक स्वतंत्रता और गरीबी उन्मूलन शामिल हैं।”

वार्षिक सहयोगी समीक्षा इकोनॉमिक फ्रीडम ऑफ द वर्ल्ड रिपोर्ट को सार्वजनिक नीति से जुड़े प्रमुख कनाडाई थिंक टैंक फ्रेजर इंस्टीट्यूट द्वारा 85 देशों की मदद से तैयार किया जाता है। इस रिपोर्ट में दुनिया भर के विभिन्न देशों की रैंकिंग से जुड़े सूचकांक को तैयार करने के लिए 42 अलग-अलग मानकों का इस्तेमाल किया गया है। ये वे मानक हैं, जो आर्थिक आजादी को प्रोत्साहित करते हैं। व्यक्तिगत पसंद, स्वैच्छिक लेनदेन, प्रतिस्पर्धा की स्वतंत्रता और निजी संपत्ति की सुरक्षा आर्थिक आजादी की आधारशिला हैं। इसे पांच अलग-अलग क्षेत्रों में मापा जाता है:

  1. सरकार का आकार,
  2. कानूनी ढांचा और संपत्ति के अधिकारों की सुरक्षा,
  3. उचित धन तक पहुंच,
  4. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने की स्वतंत्रता और
  5. कर्ज, श्रम और कारोबार का नियमन।

सर्वे दिखाता है कि आर्थिक आजादी के ऊंचे स्तर वाले देशों के निवासी अधिक संपन्नता, अधिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लंबी उम्र का आनंद उठाते हैं। पूरी रिपोर्ट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.फ्रीदवर्ल्ड.कॉम पर उपलब्ध है। 

आर्थिक आजादी के प्रमुख घटकों में भारत का स्कोर (1 से 10 तक, जहां अधिक अंक आर्थिक आजादी के ऊंचे स्तर को दर्शाते हैं):

सरकार का आकार: बीते साल की रिपोर्ट में 6.67 से बदलकर 6.69 हो गया 

कानूनी ढांचा और संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा: 5.93 से बदलकर 5.72 हुई

उचित धन तक पहुंच: 6.82 से बदलकर 6.54 हो गई

कर्ज, श्रम और व्यवसाय का नियमन: 6.31 से बदलकर 6.50

नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया (एनएएसवीआई) के समन्वयक और सीसीएस के भागीदार अरविंद सिंह के अनुसार, “रेहड़ी पटरी कारोबार गरीब उद्यमियों के लिए किसी प्रबंधन स्कूल से कम नहीं है। यहां वे किसी कारोबार को चलाने के लिए सभी कौशल सीख जाते हैं। हालांकि, विकास के लिए जरूरी उनकी आर्थिक आजादी का वित्तीय सेवाओं की पहुंच के अभाव और शोषण करने वाले बिचौलियों व हफ्ता वसूली करने वाले नगर निकाय तथा पुलिस कर्मियों द्वारा गला घोंट दिया जाता है। एक ऐसा पेशा जो लाखों गरीबों को गरीबी से उबार सकता है, आर्थिक आजादी के अभाव में वह एक बेगैरत और बार-बार के अपमान वाला पेशा बन जाता है।”

अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग

दुनिया भर में सबसे ज्यादा आर्थिक आजादी हांगकांग में है। इस मामले में इसे 10 में सें 9.01 अंक मिले हैं। शीर्ष पायदान के अन्य देशों में सिंगापुर (8.68), न्यूजीलैंड (8.20), स्विटजरलैंड (8.03), ऑस्ट्रेलिया (7.98), कनाडा (7.81), चिली (7.77), ब्रिटेन (7.71), मॉरिशस (7.67), अमेरिका (7.60) शामिल हैं। 

अन्य दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग और अंक: जर्मनी 21वां (7.45), जापान 22वां (7.44), फ्रांस 42वां (7.16), इटली 70वां (6.81), मेक्सिको 75वां (6.74), रूस 81वां (6.55), चीन 92वां (6.43), भारत 94वां (6.40) और ब्राजील 102वां (6.19)।

कुछ देशों की आर्थिक आजादी के स्कोर में वर्ष 1990 से तेज बढ़त दर्ज की गई है। यूगांडा में सबसे अधिक सुधार हुआ है। इसका स्कोर 1990 में 3 अंक से बढ़कर इस साल 7.10 अंक पर पहुंच गया है। इसके बाद जांबिया (3.52 से बढ़कर 7.35), निकारागुआ (2.96 से 6.76), अल्बानिया (4.24 से 7.54) और पेरू (4.13 से 7.29) का नाम आता है। इसी अवधि के दौरान वेनेजुएला में आर्थिक आजादी में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसका स्कोर 5.45 से घटकर 4.23 अंक रह गया। इसी तरह जिंबाब्वे (5.05 से घटकर 4.06), अमेरिका (8.43 से 7.58) और मलेशिया (7.49 से 6.68) नीचे की ओर खिसके हैं। 

रिपोर्ट से पता चलता है कि ऊंचे पायदानों पर काबिज देशों में सबसे गरीब 10 प्रतिशत लोगों की औसत आय 8,735 डॉलर थी। इसकी तुलना में निचले पायदानों पर मौजूद देशों में इन्हीं गरीबों की औसत आय महज 1,061 डॉलर रही। सबसे ज्यादा आर्थिक आजादी वाले देशों में सबसे गरीब 10 प्रतिशत लोग उन देशों में रहने वालों से करीब दोगुनी आमदनी वाले निकले, जहां आर्थिक आजादी सबसे कम है।

आर्थिक आजादी सूचकांक: इकोनॉमिक फ्रीडम ऑफ द वर्ल्ड उस दर्जे को मापता है कि किसी देश की नीतियां और संस्थान आर्थिक स्वतंत्रता को कितना समर्थन करते हैं। 2011 की यह रिपोर्ट फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के जेम्स ग्वार्टने व गस ए. स्टावरोस और सदर्न मेथडिस्ट यूनिवर्सिटी के रॉबर्ट ए. लॉसन व बिलॉयट कॉलेज के जोशुआ हॉल ने तैयार की है। इस साल की रिपोर्ट में वर्ष 2009 के आंकड़ो के आधार पर दुनिया की 95 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले 141 देशों की रैंकिंग की गई है। 

इकोनॉमिक फ्रीडम नेटवर्क, सभी आंकड़ों और पूर्व इकोनॉमिक फ्रीडम ऑफ द वर्ल्ड रिपोर्टों की अधिक जानकारी के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.फ्रीदवर्ल्ड.कॉम पर जा सकते हैं।

15 अगस्त, 1997 में गठित सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी सार्वजनिक नीति से जुड़ा एक स्वतंत्र अलाभकारी थिंक टैंक है। सिविल सोसाइटी के पुनरुत्थान और इसमें नई जान फूंक कर यह देश के सभी नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए समर्पित है। अपने पुरस्कृत कार्यक्रमों के जरिए सीसीएस नवीन विचारों के माध्यम से समुदाय और बाजार आधारित उचित सार्वजनिक नीति समाधान सुझाता है, खासकर शिक्षा, जीवन यापन, प्रशासन और पर्यावरण के क्षेत्र में। वर्तमान और भावी नेताओं को इन विचारों से रूबरू कराकर सीसीएस सभी भारतीयों के लिए अवसर और समृद्धि बढ़ा रहा है।